महिला किसानों के सम्मान में, सिंघु पर महिला दिवस

देश में महिला दिवस के सबसे बड़े उत्सव पर, 8 मार्च, 2021 को महिला किसानों को सम्मानित करने और तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध प्रदर्शन में उनकी भूमिका की सराहना करने के लिए हज़ारों महिलाएं सिंघु बॉर्डर पर इकट्ठा हुईं

11 मार्च, 2021 | आमिर मलिक

गाज़ीपुर के किसानों के लिए शौरौं में उबलते बर्तन

मुज़फ़्फ़र नगर के शौरौं गांव के निवासी गाज़ीपुर में नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे किसानों के भोजन की व्यवस्था करने के लिए संसाधन जमा कर रहे हैं। गन्ने की खेती करने वाले कई लोग क़र्ज़ में डूबा होने के बावजूद राशन दे रहे हैं

9 मार्च, 2021 | पार्थ एमएन

बागपत के किसानः ‘झूठ कब तक चलेगा?’

दिल्ली की सीमाओं के उस पार किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। उत्तर प्रदेश में स्थित ऐसे ही एक विरोध स्थल को देर रात में होने वाली कार्रवाई के बाद तोड़ दिया गया — क्योंकि राजधानी में गणतंत्र दिवस पर होने वाली हिंसा में कुछ नेताओं को ‘संदिग्ध’ बताया गया था

3 मार्च, 2021 | पार्थ एमएन

गीत और नृत्य के माध्यम से किसानों का विरोध प्रदर्शन

जनवरी के अंत में मुंबई के आज़ाद मैदान में किसानों के विरोध प्रदर्शन में, महाराष्ट्र के डहाणू तालुका के आदिवासी समुदायों के धुमसी और तारपा वादकों ने गीत और नृत्य के माध्यम से नए कृषि क़ानूनों का विरोध किया

24 फरवरी, 2021 | ऊर्ना राउत और रिया बहल

‘अगर हम उनके साथ खड़े नहीं होंगे, तो कौन होगा?’

विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद आय का नुक़सान होने के बावजूद, हरियाणा-दिल्ली सीमा पर स्थित सिंघु और उसके आसपास के कई छोटे व्यापारी, दुकानदार, श्रमिक और विक्रेता किसानों के साथ पूरी एकजुटता से खड़े हैं

23 फरवरी, 2021 | अनुस्तुप रॉय

किसान आंदोलन में पेटवाड़ की महिलाओं का योगदान

हरियाणा के पेटवाड़ गांव की सोनिया पेटवाड़, शांति देवी और अन्य महिलाएं अपने तरीक़े से किसान आंदोलन का समर्थन कर रही हैं — टिकरी में राशन भेजने के साथ-साथ वे विरोध प्रदर्शनों में भाग भी लेती हैं

17 फरवरी, 2021 | संस्कृति तलवार

जंभाली के किसानः हाथ टूटा, हौसला नहीं

नारायण गायकवाड़ हाथ टूटने के बावजूद, किसानों से बात करने और नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करने के लिए जनवरी में आज़ाद मैदान पहुंचे। कोल्हापुर के यह किसान कृषि मुद्दों पर भारत भर में कई रैलियों में भाग ले चुके हैं

12 फरवरी, 2021 | संकेत जैन

‘सात बारह के बिना, हम कुछ नहीं कर सकते’

अरुणाबाई और शशिकला — दोनों आदिवासी समुदायों की विधवाएं, और औरंगाबाद जिले में किसान और खेतिहर मज़दूर हैं — नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन में भाग लेने और अपनी ज़मीन का मालिकाना हक़ मांगने के लिए मुंबई आईं

8 फरवरी, 2021 | रिया बहल

‘क्या कॉर्पोरेट वाले हमें मुफ्त में खिलाएंगे?’

पीडीएस राशन की कमी, जमाख़ोरी, खाद्य की बढ़ती क़ीमतें — महाराष्ट्र के किसान, जो मुंबई के आज़ाद मैदान में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, वे इन समस्याओं और कृषि क़ानूनों के अन्य संभावित दीर्घकालिक प्रभावों से चिंतित हैं

8 फरवरी, 2021 | ज्योति शिनोली

सर्खणी में, सात बारह से लैस एक लंबी लड़ाई

आदिवासी किसान, अनुसाया कुमारे और सरजाबाई आदे अपने भूमि अधिकारों के लिए महाराष्ट्र के सर्खणी गांव में जनवरी से विरोध प्रदर्शन कर रही हैं; वे तीन नए कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ मुंबई के धरने में शामिल हुईं

8 फरवरी, 2021 | श्रद्धा अग्रवाल

अमीर किसान, वैश्विक साज़िश, स्थानीय मूर्खता

दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शनकारी किसानों को तितर-बितर करने के प्रयास विफल होने के बाद, वैश्विक साज़िश की बात करके स्थानीय दमन को उचित ठहराया जा रहा है। क्या आगे किसी और ग्रह का हाथ होने का पता लगाने की कोशिश की जाएगी?

06 फरवरी, 2021 | पी साईनाथ

बेंगलुरु में: ‘हमें कॉर्पोरेट मंडियां नहीं चाहिएं’

दिल्ली की ट्रैक्टर परेड का समर्थन करने और कॉर्पोरेट-केंद्रित कृषि नीतियों के ख़िलाफ़ अपना विरोध जताने के लिए, गणतंत्र दिवस पर उत्तर कर्नाटक के किसान ट्रेनों और बसों से बेंगलुरु पहुंचे

03 फरवरी, 2021 | गोकुल जीके और अर्कतापा बासु

‘वे हमारा ही गेहूं हमें तीन गुनी क़ीमत पर बेचते हैं’

महिला किसान और खेतिहर मज़दूर जो अपने भूमि अधिकारों के लिए लड़ रही हैं, नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ मुंबई में विरोध प्रदर्शन कर रही थीं ताकि उन्हें अपनी अन्य फ़सलों को भी एमएसपी से नीचे न बेचना पड़े

1 फ़रवरी, 2021 | संकेत जैन

बंगाल में पैरों के नीचे से खिसकती ज़मीन के लिए महिलाओं का संघर्ष

18 जनवरी को महिला किसान दिवस पर पश्चिम बंगाल के गांवों से किसान और खेतिहर मज़दूर महिलाएं नए कृषि क़ानूनों का विरोध करने और कई अन्य चिंताएं व्यक्त करने के लिए कोलकाता पहुंचीं

29 जनवरी | स्मिता खटोर

जीजाबाईः गणतंत्र दिवस पर स्वतंत्रता की मांग

छोटी उम्र में आदिवासी किसानों की चिंताओं के बारे में जानने में मदद करने के लिए 10 साल की नूतन को उसकी दादी, जीजाबाई नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ नासिक से मुंबई तक निकाले गए मार्च में अपने साथ ले आईं

28 जनवरी, 2021 | पार्थ एमएन और रिया बहल

‘एक दिन ऐसा आएगा जब कोई किसान नहीं होगा’

कर्नाटक भर के किसानों का कहना है कि नए कृषि क़ानून पूरे भारत के किसानों को प्रभावित करते हैं। उनमें से कई दिल्ली में किसानों की परेड का समर्थन करने के लिए गणतंत्र दिवस पर बेंगलुरु में ट्रैक्टर रैली में शामिल हुए

27 जनवरी, 2021 | तमन्ना नसीर

ट्रैक्टर रैली विभाजितः ‘वो हमारे लोग नहीं थे’

टिकरी से किसानों के ट्रैक्टरों का काफ़िला शांतिपूर्वक तरीक़े से आगे बढ़ रहा था, तभी एक छोटा समूह उससे अलग हो गया, जिसने नांगलोई चौक पर अराजकता पैदा कर दी और नागरिकों के एक अभूतपूर्व तथा अनुशासित गणतंत्र दिवस परेड को बाधित कर दिया

27 जनवरी, 2021 | संस्कृति तलवार

‘हम अभी भी ज़मीन के मालिक नहीं हैं’

नासिक की आदिवासी किसान विधवाओं- भीमा टंडाले, सुमन बोंबाले और लक्ष्मी गायकवाड़ के लिए भूमि अधिकार चिंता का मुख्य विषय होने के बावजूद वे नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए मुंबई आई हैं

26 जनवरी, 2011 | पार्थ एमएन

‘टिकरी में 50 किमी तक ट्रैक्टरों की लाइन’

26 जनवरी की ट्रैक्टर रैली के लिए टीकरी बॉर्डर पर हज़ारों ट्रैक्टरों की क़तार लग चुकी है। महिला किसान इसकी अगुवाई करेंगी, और सभी योजनाओं पर सावधानी से काम किया जा रहा है

25 जनवरी, 2021 | शिवांगी सक्सेना

‘ट्रैक्टर चलाते समय मुझे लगता है कि मैं उड़ रही हूं’

सरबजीत कौर ट्रैक्टर चलाते हुए पंजाब के अपने गांव से 400 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करके किसानों के विरोध स्थल, सिंघु तक पहुंची हैं और अब 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली में भाग लेने के लिए तैयार हैं

25 जनवरी, 2021 | स्निग्धा सोनी

‘मैं अपना ट्रैक्टर चलाते हुए दिल्ली ले जाऊंगा’

हरियाणा के कंदरौली गांव के युवा किसान, चीकू ढांडा किसानों के विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए पांच बार सिंघु जा चुके हैं। वह फिर जा रहे हैं, इस बार 26 जनवरी की ट्रैक्टर रैली में शामिल होने के लिए

25 जनवरी, 2021 | गगनदीप

‘आपने पूरे देश को जगा दिया है’

एक बेहद प्रतिष्ठित पूर्व नौसेना प्रमुख, जो लंबे समय से ख़ुद खेती का कर रहे हैं, कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली और देश भर में विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हैं

24 जनवरी, 2021 | एडमिरल लक्ष्मीनारायण रामदास

सिंघु में कई शानदार सेवाओं का नेटवर्क

‘पगड़ी लंगर’ से लेकर दर्ज़ी, ट्रकों से जुड़े चार्जिंग पोर्ट और दर्पण, मुफ़्त लॉन्ड्री, मालिश, जूतों की मरम्मत तक — सिंघु में बड़ी संख्या में गैर-किसान भी मौजूद हैं, जो इन सेवाओं के ज़रिए एकजुटता दिखा रहे हैं

23 जनवरी, 2021 | जॉयदीप मित्रा

पंजाब के खेतिहर मज़दूर: ‘हमें कीड़ों की तरह देखा जाता है’

पश्चिमी दिल्ली के टिकरी विरोध स्थल पर, 70 वर्षीय तारावंती कौर पंजाब के उन दलित खेतिहर मज़दूरों में से एक हैं, जिनका मानना है कि केंद्र के नए क़ानून उन्हें और ग़रीब कर देंगे

21 जनवरी, 2021 | संस्कृति तलवार

किसान आंदोलन में महिलाएं: ‘हम दोबारा इतिहास रच रहे हैं’

भारत में महिलाएं कृषि में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं, और इस समय बहुत सारी महिलाएं — किसान और गैर-किसान, युवा और बुज़र्ग, विभिन्न वर्गों और जातियों से संबंध रखने वाली — दिल्ली के आसपास किसानों के विरोध स्थलों पर पूरी दृढ़ता से मौजूद हैं

16 जनवरी, 2021 | श्रद्धा अग्रवाल

पंजाब से लेकर सिंघु तकः चित्रकारी द्वारा विरोध

लुधियाना के रहने वाले कला के एक शिक्षक ने किसानों के आंदोलन में अपने योगदान के रूप में सिंघु विरोध स्थल पर एक विशाल कैनवास पर पेंटिंग की है

14 जनवरी, 2021 | अनुस्तुप रॉय

‘कृषि क़ानून अमीर और ग़रीब दोनों किसानों को प्रभावित करते हैं’

शाहजहांपुर में, किसानों के बीच एकजुटता में वर्ग का कोई भेद नज़र नहीं आता, और महाराष्ट्र के आदिवासी किसान — जिनमें से कई के पास छोटे भूखंड हैं — उत्तरी भारत के अपने किसान साथियों की बहुतायत और उदारता से काफ़ी प्रभावित हुए

14 जनवरी, 2021 | पार्थ एमएन

‘मेरा ख़ून काफ़ी बह रहा है, यह मुझे लोगों ने बताया...’

सत्तर वर्षीय सरदार संतोख सिंह 27 नवंबर को पंजाब के अपने गांव से जब सिंघु आए, तो उस दिन आंसू गैस का गोला लगने से वह घायल हो गए थे — लेकिन चोट के बावजूद, वह विरोध स्थल पर डटे हुए हैं

9 जनवरी, 2021 | कनिका गुप्ता

‘खेती हमारा धर्म है, हमें लोगों को खिलाना पसंद है’

पंजाब के गुरुदीप सिंह और राजस्थान के बिलावल सिंह शाहजहांपुर के विरोध स्थल पर लंगर चलाते हैं, और कहते हैं कि इस सरकार को भूखे प्रदर्शनकारियों से निपटने की आदत है, इसलिए वे यहां हर किसी का पेट अच्छी तरह भरने को सुनिश्चित कर रहे हैं

2 जनवरी, 2021 | पार्थ एमएन

‘मैं किसानों के मुद्दे पर जागरूकता फैलाने के लिए गाती हूं’

नासिक जिले की 16 वर्षीय भील आदिवासी खेतिहर मज़दूर और गायक-संगीतकार, सविता गुंजल ने अपने अद्भुत गीतों से महाराष्ट्र के किसानों द्वारा दिल्ली तक के जत्थे में सभी के जोश और संकल्प को बढ़ाए रखा

31 दिसंबर, 2020 | श्रद्धा अग्रवाल

किसानों के विरोध प्रदर्शन में मटर छीलता हरफ़तेह सिंह

राजस्थान-हरियाणा सीमा पर 100 लोगों के लिए आलू-मटर की सब्ज़ी बनाने में अपने परिवार की मदद करने के लिए सबसे कम उम्र का एक प्रदर्शनकारी सामने आता है

31 दिसंबर, 2020 | श्रद्धा अग्रवाल

किसानों के लिए नई लड़ाई में शामिल हुए युद्ध के नायक

दिल्ली के द्वार पर मौजूद लाखों किसान प्रदर्शनकारियों के बीच सशस्त्र बलों के कई नायक भी हैं, जिनमें से कुछ भारत के लिए लड़े जाने वाले विभिन्न युद्ध में 50 से अधिक पदक जीत चुके हैं

29 दिसंबर, 2020 | आमिर मलिक

“हम हंसते, गाते और झूमते हुए दिल्ली पहुंचेंगे”

महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से लगभग 1,000 किसान, जिनमें से अधिकांश आदिवासी हैं — वाहन, टेम्पो, जीप और कारों द्वारा दिल्ली के प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं। यह एक ख़ूबसूरत और प्रतिबद्ध क़ाफ़िला है

24 दिसंबर, 2020 | श्रद्धा अग्रवाल

दिल्ली के द्वार पर किसानों का ‘बेला चाओ’

पिछले महीने से दिल्ली के द्वार पर किसानों और उनके समर्थकों के आंदोलन ने कई आकर्षक कविताओं और गीतों को जन्म दिया है। लेकिन यह गीत निश्चित रूप से पिछले कई वर्षों के सर्वश्रेष्ठ प्रतिरोधी गीतों में से एक है

23 दिसंबर, 2020 | पूजन साहिल और कारवाने मोहब्बत मीडिया टीम

‘महिला किसानों को नया क़ानून नहीं चाहिए’

भारत में महिलाएं कृषि में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं, लेकिन उन्हें कभी किसान के रूप में मान्यता नहीं दी जाती — पिछले हफ्ते उनमें से कई महिलाएं नए कृषि क़ानूनों को ख़त्म करने के आह्वान का समर्थन करते हुए पुणे में एकत्र हुईं

18 दिसंबर, 2020 | विद्या कुलकर्णी

‘इस सर्दी में, हमारे दिल जलते हुए अंगारे हैं’

किसानों के विरोध स्थल, सिंघू और बुराड़ी के अस्थायी शिविरों में ठहरे प्रदर्शनकारी हर दिन के अंत में लंबी रात गुज़ारने और भाईचारे की भावना तथा नए संकल्प के साथ आगे की लड़ाई लड़ने की तैयारी करते हैं

15 दिसंबर, 2020 | शादाब फ़ारूक़

‘मैं यहां भोजन के लिए आती हूं’

सिंघू बॉर्डर पर किसानों के विरोध प्रदर्शन ने आसपास के फुटपाथों और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले कई परिवारों को आकर्षित किया है, जो मुख्य रूप से लंगर — मुफ़्त भोजन — के लिए आते हैं और ये सामुदायिक रसोई घर सभी का स्वागत करते हैं

14 दिसंबर, 2020 | कनिका गुप्ता

किसान हरजीत सिंह चल नहीं सकते, लेकिन मज़बूती से खड़े हैं

दिल्ली-हरियाणा सीमा के सिंघु बॉर्डर पर डटे किसान बहुत सी मुश्किलों का सामना करते हुए सैकड़ों किलोमीटर दूर से आए हैं। उन्हीं में से एक हरजीत सिंह भी हैं, जो टूटे कूल्हे और घायल रीढ़ की हड्डी के बावजूद यहां तक पहुंचे हैं

12 दिसंबर, 2020 | आमिर मलिक

और आपने सोचा यह सिर्फ़ किसानों के बारे में है?

नए कृषि क़ानून केवल किसानों को ही नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को संवैधानिक उपचार से वंचित कर रहे हैं — जो कि 1975-77 के आपातकाल के बाद से अभी तक नहीं देखा गया था। दिल्ली के द्वार पर मौजूद किसान हम सभी के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं

10 दिसंबर, 2020 | पी साईनाथ

‘एपीएमसी से संबंधित क़ानून मौत का वारंट है’

दिल्ली-हरियाणा के विरोध प्रदर्शन में, किसानों की मांगों में तीन नए कृषि क़ानूनों को निरस्त करना शामिल है — और वे कंटीले तार, बैरिकेड्स, अपने स्वयं के नुक़सान, अपमान आदि का सामना करने को तैयार हैं

30 नवंबर, 2020 | आमिर मलिक

पालघर में विरोधः ‘हम आज पीछे नहीं हटेंगे’

हरियाणा-दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को अपना समर्थन देने और अपनी 21 मांगों के लेकर, आदिवासी समुदाय के किसान 26 नवंबर को महाराष्ट्र के पालघर जिले में इकट्ठा हुए

28 नवंबर, 2020 | श्रद्धा अग्रवाल

हिंदी अनुवादः मोहम्मद क़मर तबरेज़

Mohd. Qamar Tabrez is PARI’s Urdu/Hindi translator since 2015. He is a Delhi-based journalist, the author of two books, and was associated with newspapers like ‘Roznama Mera Watan’, ‘Rashtriya Sahara’, ‘Chauthi Duniya’ and ‘Avadhnama’. He has a degree in History from Aligarh Muslim University and a PhD from Jawaharlal Nehru University, Delhi. You can contact the translator here: