मयारू बैरी
कच्छ के एक झिन मुटियारिन के दुख भरे गीत जऊन ह बिहाव के बाद अपन परिवार ले दूरिहा चले गे हवय अऊ अपन पीरा बतावत हवय

SANGUR, PUNJAB
|THU, JUL 20, 2023
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कच्छ के एक झिन मुटियारिन के दुख भरे गीत जऊन ह बिहाव के बाद अपन परिवार ले दूरिहा चले गे हवय अऊ अपन पीरा बतावत हवय
एक ठन अइसने इलाका के लोकगीत जऊन ह राजनीतिक उथल-पुथल के बाद घलो संगीत, वास्तुकला अऊ संस्कृति मं अपन मेलजोल ले भरे परंपरा ला बचा के रखे हवय. ये भक्ति गीत अपन संग रेगिस्तान के गजब के महक ला लेके आथे
बिहाव के बाद अपन दाई-ददा के घर ले बिदा होवत नोनी के मन के बात ये कच्छी गीत मं झलकत हवय
ये लोकगीत मं कच्छ के देहात के माइलोगन मन जयदाद मं बरोबर हक हिस्सा सेती अवाज उठावत हवंय
भुज के ये कच्छी लोकगीत मं मया अऊ तड़प ला बताय गे हवय. ये ह पारी मं कच्छी लोक गीत मन के कड़ी मं दूसर आय
गुजरात के ये उत्तर-पच्छम इलाका के एक ठन गीत कच्छ के लोगन मन के अऊ संस्कृति के बखान करथे
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