
SANGUR, PUNJAB
|SAT, SEP 16, 2023
मेहरारू के सेहत पर पारी शृंखला
भारत के गांव-देहात के मेहरारू लोग के प्रजनन आउर यौन सेहत पर उनकर आपबीती पारी के एह शृंखला में दरज कइल गइल बा. एह कहानी में मेहरारू लोग के बच्चा पैदा ना कर सके के दुख, जबरिया गर्भपात, परिवार नियोजन से ‘कन्नी कटावत मरद’, पहुंच से बाहिर गांव के खराब स्वास्थ्य देखभाल ब्यवस्था के बारे में जाने आ समझे में मदद मिली. इहंवा अइसन कहानी आ रिपोर्ट भी भेंटाई, जवना में झोलाछाप डॉक्टर, नर्स, अकुशल दाई आउर जोखिम भरल तरीका से जचगी, माहवारी चलते भेदभाव, बेटा के जादे महत्व आ अइसने आउर बहुते कुछ शामिल बा. एह में से बहुते कहानी भारत के गांव-देहात में सेहत से जुड़ल पूर्वाग्रह, आउर रीति-रिवाज, आम लोग आउर समुदाय, लैंगिक अधिकार, लइकी आ मेहरारू लोग के रोज-रोज के संघर्ष के बारे में बा, उनकर छोट-छोट जीत आउर खुशी के बारे में भी बा
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50. अन्हार में गांव: दाई भरोसे माई लोग के सेहत
जम्मू कश्मीर के बांदीपुर जिला के एगो दूर-दराज गांव में गरभ वाला मेहरारू लोग बिजली आउर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के बदहाली से जूझ रहल बा. गांव के एगो बूढ़ दाइए ओह लोग के एकमात्र सहारा बाड़ी
49. बीड़ी बांधे में सुलग रहल बा महिला मजदूरन के जिनगी
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिला में मेहरारू लोग बीड़ी बनावे के काम करेला, सबले गरीब, सबले कमती मजूरी, देह खटावे वाला काम, आ हरमेसा तंबाकू के बुरादा संगे रहे से ओह लोग के सामान्य आ बच्चा जने से जुड़ल सेहत पस्त रहेला
48. 'चार दिन गाय-गोरू जइसन जिए के पड़ेला'
उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिला में माहवारी आ जचगी बखत लइकी आ मेहरारू लोग के जिनगी मुहाल बा, थोपल गइल रोक-टोक, रीति रिवाज आ दिक्कत के गठरी उठाए फिरेली
47. चलत जीप में डिलीवरी, जच्चा-बच्चा भगवान भरोसे
हिमाचल प्रदेश के गांवन में जरूरत पड़ला पर डॉक्टर, नर्स आ दाई ना मिले से इहंवा के मेहरारू लोग के जचगी बखत भारी दिक्कत होखत बा. सुलभ चिकत्सा सेवा के अभाव आ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ठप पड़ला के कारण जच्चा आ बच्चा भगवान भरोसे बारन
46. एगो दलित देश के मेहरारू लोग के किस्सा
कर्नाटक के हावेरी जिला में असुंडी गांव के बहरी दलित बस्ती के मेहरारू लोग के तबियत कम मजूरी आ ‘पेट भर खाए के’ ना मिले से, पस्त बा, टोला में शौच के सुविधा ना होखे से माहवारी घरिया बेसंभार दरद आ दोसर परेशानी झेलत बारी
45. ‘मरद से पूछली ना, नसबंदी करवावे निकल गइली’
उदयपुर के गमेती समुदाय के जादे मरद लोग सूरत आ दोसर शहर में मजदूरी करेला, घर में पीछे रह गइल लुगाई लोग अब सेहत आ जिनगी के फैसला आपन हाथ में लेवत बा, एह खातिर घरवाला के मुंह ना देखी, ई ठान लेले बा
44. ‘बच गइनी, ना त गोदी में लइके खेलावत रहतीं’
दिल्ली में रहे वाली सुनीता के आउर बच्चा ना चाहत रहे, एह खातिर कवनो आसान आ सुरक्षित तरीका खोजली, बाद में कॉपर-टी फेल हो गइल त बच्चा गिरावे खातिर उनकरा पीएचसी से प्राइवेट क्लिनिक, दिल्ली अउरी आखिर में बिहार के सरकारी अस्पताल तक ए़ड़ी घिसे के पड़ल
43. टिकरी: मेहरारू लोग के ‘बिगाड़ेवाली’ दीदी
ऊ कलावती बारी, अमेठी के टिकरी गांव में मेहरारू लोग के पक्का सहेली, उनकरा पास सुरक्षित बा सभ के तबियत के कुंजी, उनकर झोली में कंडोम ह, बच्चा रोके के गोली ह, ऊ बाते-बाते में मेहरारू लोग के बच्चा पैदा करे से जुड़ल सगरे हक से जागरूक भी कर देवेली
42. कोखवा अन्हार भइल, कुहूके करेजवा
महाराष्ट्र के बीड जिला में गन्ना के खेत में काम करेवाली मेहरारू लोग के बड़ आबादी के आपन बच्चादानी हटावे के पड़त बा, एह ऑपरेशन से गुजरला के बाद जिनगी नरक भ गइल बा, देह आ मन के रोग धइले बा, घरवाला के औरत के सुख ना दे पाए से गृहस्थी में कलह होखत बा
41. ‘लागल भीतरी कुछो कट के गिरल जात बा’
पश्चिम बंगाल के सुंदरबन में इहंवा नदी के पाना बहुते खारा बा, कमाई खातिर पानी में घंटों खड़ा होके मछरी, झींगा पकरे के मजबूर, गरमी में जरत घाम, सरकारी इलाज से कोसों दूर, मेहरारू लोग बच्चादानी आ दोसर तरह के सेहत के परेशानी झेले के मजबूर ह
40. केहू देह टटोलेला, केहू अछूत मानेला
यौनकर्मी लोग के देश के राजधानी दिल्ली में भी इलाज खातिर बहुत परेशानी उठावे के परेला, अस्पताल में गंदा व्यवहार, लांछन आ शोषण झेले के होखेला, गोपनीयता के साथ खिलवाड़ कइल जाला, अब महामारी आउर बेदम कइले बा
39. ‘जहंवा लोग सरकारी नर्स ना, ‘झोला-छाप’ डॉक्टर के बाट जोहेला’
झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिला के भीतरिया गांव सभ में स्वास्थ्य सेवा के हालत पस्त बा. लाचारी में इलाज खातिर ‘रूरल मेडिकल प्रैक्टिशनर’ यानी, ‘झोला छाप डॉक्टर’ के असरा ताके के पड़त बा. एह बीच स्वास्थ्य सेवा पूरा तरीका से इंसानी भरोसा आउर ब्यवहार के भरोस बा
38. मिलीं, मेलघाट के दाई लोग के अंतिम पीढ़ी से
महाराष्ट्र के मेलघाट टाइगर रिजर्व के लगे के आदिवासी बस्ती में रोपी आ चारकू जइसन पारंपरिक दाई दशकन से घर में जचगी करावत आइल बाड़ी. बाकिर, अब दुनो दाई बूढ़ हो गइल बाड़ी. दुख के बात बा ओह लोग के विरासत के आगे बढ़ावे वाला केहू नइखे
37. ‘सरकार, डॉक्टर, घरवाला सभे हमनी के नीचा देखावेला’
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिला के मुसहर मेहरारू लोग दोहरा शोषण झेल रहल बा. सेहत के बुनियादी सुविधा त पहिलहीं से ओह लोग के नइखे मिलत, ऊपर से अस्पताल में अपना संगे होखे वाला भेदभाव चलते स्वास्थ्य सुविधा के अकाल से जूझ रहल बा
साल 2021
36. ‘कागज’ से बेदखल मधुबनी के बेटी लोग
बिहार के मधुबनी जिला के गरीब आउर पिछड़ल परिवार से आवे वाला मेहरारू लोग मुसीबत घरिया भी सेहत के जरूरी सेवा आउर साधन तक पहुंच ना पावेला. सरकारी तंत्र से तनी राहत जरूर बा, बाकिर जब उहंवा भी बेइमानी होखेला त ऊ लोग बहुत लाचार महसूस करेला. अस्पताल में पइसा मंगला के कारण बेटी लोग के जन्मप्रमाण पत्र नइखे बनावल जात
35. यूपी: ‘हमरा हाथरस के डर हरमेसा लागल रहेला’
सोनू आउर मीना के कहानी, प्रयागराज के गांव में दलित बस्ती के सभे लइकी के कहानी हवे. हाथरस जइसन मामला के बाद, इहंवा लइकी लोग के माहवारी सुरु होखते, छोट उमिर में बियाह क देहल जात बा
34. ‘तीन ठो बेटी भइल, त दू ठो बेटा पइदा करे के पड़ी’
बिहार के गया जिला में समाज के अलग-अलग हिस्सा से आवे वाला मेहरारू लोग के आपन जिनगी पर अख्तियार नइखे रह गइल. भूखमरी, जात-पात, भेदभाव, रिवाज आउर समाज के मार से ओह लोग के जिनगी मुहाल भइल बा
33. ‘कॉपर-टी के जाल में फंसली: जिनगी दरद बन गइल’
महामारी में मेहरारू लोग के तबियत संगे खिलवाड़ हो रहल बा. दीपा डिलीवरी के बाद दिल्ली के एगो अस्पताल से लउटली, त पता ना रहे उनकरा देह में कॉपर-टी डालल जा चुकल बा. दू बरिस बाद जब तेज दरद आउर जादे खून आवे लागल, तबो डॉक्टर लोग केतना महीना तक डिवाइस के पता ना लगा सकल
32. ‘अइसन लागेला, मरद लोग के नजर हरमेसा हमनिए पर बा’
पटना के झोपड़पट्टी में रहे वाला जवान लइकी लोग के बंद पड़ल सुलभ शौचालय, लमहर दूरी पर ब्लॉक, परदा लागल ट्रेन के छोट-छोट डिब्बा जइसन खोली, नहाए आउर सेनेटरी पैड बदले खातिर एकांत के कमी, रात के शौच खातिर रेल पटरी पर जाए के मजबूरी जइसन बहुते परेसानी उठावे के पड़ता
31. बिहार के पानी में का बा...
बिहार के गांवन में ग्राउंडवाटर (भूजल) में घुलल आर्सेनिक के चलते प्रीती जइसन बहुते परिवार के मरद-मेहरारू के कैंसर से जान गंवावे के पड़ल, उनकरो छाती में गांठ बन गइल बा, एतना दुख उठवला के बाद भी इहां के मेहरारू लोग के इलाज जी के जंजाल बा
30. बिहार के मुसहर मेहरारू: जिनगी बा बदहाल, स्वास्थ्य सुविधा के बा अकाल
बिहार के शिवहर जिला में मुसहर टोला के शांति मांझी के सात गो लरिका घरहीं पैदा भइल बाड़ें. इहंवा ना त स्वास्थ्य सेवा के पहुंच बा, ना डिलीवरी में मदद खातिर गांव में कवनो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बा
29. देह हमार, हुकूम काहे तोहार…
बिहार के राजधानी पटना में जवान मेहरारू आउर लइकी लोग बेटा के आस में लरिका पैदा करत रहे के मजबूर बा. उनकर परिवार में समाज के पुरान रीति-रिवाज आउर पूर्वाग्रह के आगे कायदा कानून के भी ना चलेला
28. हर महीना ‘कैद’ के रिवाज पर अंगुरी उठे लागल बा
कर्नाटक में काडूगोल्ला के मेहरारू लोग माहवारी बखत आ जचगी के बाद घर से बाहिर गाछ तरे आउर झोपड़ी में अछूत जइसन रहे के मजबूर बा, कानून, जागरूकता अभियान आ निजी लड़ाई लड़ला के बादो समाज में कलंक आ देवी-देवता के डर से ई रिवाज चल रहल बा. बाकिर अब एकरा खिलाफ मेहरारू लोग एकजुट हो रहल बा
27. ‘समाज हमनी के बियाह लाइक ना समझेला’
बिहार के मुजफ्फरपुर के ‘चतुर्भुज स्थान’ में सेक्स वर्कर लोग के अक्सरहा आपन ‘परमानेंट’ ग्राहक के खुस करे के चक्कर में छोट उमिर में गरभ ठहर जाला, कोविड-19 के कारण लागल लॉकडाउन में ओह लोग के हालत आउर खस्ता हो गइल बा
26. मलकानगिरी में काहे जाए के पड़ता नदिया के पार?
ओडिशा के मलकानगिरी में बांध वाला इलाका के आदिवासी मेहरारू लोगन के इलाज भारी मुश्किल ह- घना जंगल, ऊंच पहाड़ी, पुलिस-नक्सली झड़प के बीच बिगड़ल नाव सेवा आ टूटल सड़क अस्पताल तक जाए के इकलौता साधन बा
25. बिहार: ‘कोरोना में भी बाल बियाह के लड़ी लागल बा’
बिहार के गांव-देहात में पछिला बरिस लॉकडाउन बखत गांव लउटल जवान मजूर के किशोरी लइकिन से बियाह दिहल गइल रहे, ओह में से बहुते लइकी अब पेट से बारी, आउर आपन भविष्य के लेके चिंता में बारी.
24. चुप्पे-चुप्पे बदल रहल बा मधुबनी के कहानी
दस बरिस पहिले तक, बिहार के हसनपुर गांव में परिवार नियोजन के खराब नजर से देखल जात रहे, बाकिर अब इहंवा के मेहरारू लोग, स्वास्थकर्मी शमा आ सलहा लगे गरभ रोके वाला इंजेक्शन लेवे आवे लागल बारी, ई बदलाव कइसे आइल ह?
23. गारी सुनत, काम के बोझ ढोवत बिहार के लेडी डॉक्टर
बिहार के किशनगंज में काम करे वाली मुट्ठी भर लेडी डॉक्टर पर पूरा मेहरारू लोग के सेहत के जिम्मा बा, उनकरा खातिर दिन लमहर बा, मेडिकल सप्लाई कम बा, बेरे बेर पेट से होखे आ गर्भनिरोधक के लेके उनकर अनिच्छा से निपटल एगो बहुते मुश्किल काम बा
22. ‘बोअल जाला बेटा, उग आवेली बेटी लोग’
गुजरात में ढोलका के भारवाड़ समुदाय में बेटा पैदा करे के दबाव आ परिवार नियोजन के कम साधन के चलते, गर्भनिरोधक और प्रजनन के अधिकार इहंवा के मेहरारू लोग बदे सिरिफ एगो खोखला शब्द हवे
21. 'एतना पढ़बू, त तोहरा से बियाह के करी?'
बिहार के समस्तीपुर जिला में, महादलित समुदाय के किशोर लइकी लोग के खाली एह खातिर टोंट सहे आउर मारपीट झेले के पड़ेला कि ऊ लोग स्कूल ना जाए, आपन सपना भूल जाए, बियाह कर लेवे. दुई-चार गो लइकी लोग त एकर विरोध करे के कोशिश करेली, बाकी सभ चुपचाप हार मान लेवेली
20. ‘ऑफिसे में बिछौना लगाके सुते के पड़ता’
बिहार के दरभंगा जिला के एक ठो स्वास्थ्य केंद्र में जगह आउर सुविधा के कमी के चलते स्वास्थ्यकर्मी के ऑफिस में, वार्ड के बेड पर, आ कबो-कबो जमीन पर भी सुते के पड़ता
19. वैशाली: ‘जेकरा देख ऊ पइसा अइंठे के तइयार बा’
बिहार के वैशाली जिला के एक ठो पीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन में जाला लागल बा, करमचारी सभे घूस मांगता, एगो मेहरारू के बिना जांच कइले, लरिका उनकरा पेट में मरल बतावल जात बा- एह बदइंतजामी आ फर्जीवाड़ा चलते प्राइवेट क्लीनिक के चक्कर लागल बा, आउर पानी जेका पइसा बहत बा
18. ‘खस्ताहाल अस्पताल, ‘बिना डिग्री’ डॉक्टर करे इलाज’
बिहार के बड़गांव खुर्द में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के हाल खस्ता बा, अहाता में जानवर चरत बारन, डॉक्टर आ कर्मचारी के अता-पता नइखे, फोन से नेटवर्क नदारद बा, एह सभ से आजिज मेहरारू लोग घर पर डिलीवरी करावे के मजबूर बा
17. ‘अल्मोड़ा: लरिका जने खातिर पहाड़ से टकरात बारी’
पिछरा बरिस, उत्तराखंड के अल्मोड़ा में रानो सिंह के, पहाड़ी रस्ता से अस्पताल जात-जात बीच सड़क पर लरिका हो गइल, अइसन दुर्गम इलाका आ भारी खरचा के कारण पहाड़ी बस्ती के बहुत लोग घरे पर जचगी करावे के मजबूर बा
साल 2020
16. जबरिया नसबंदी, उजड़ गइल केतना जिनगी
राजस्थान के बांसी गांव में भावना सुथार के नसबंदी के बाद अकाल मौत हो गइल, ‘शिविर’ में सगरे कायदा-कानून के नाफरमानी भइल, कवनो दोसर उपाय के बारे में सोचे के मौका ना दिहल गइल, उनकर घरवाला सरकारी स्वास्थ्य बेवस्था के एह लापरवाही के खिलाफ लड़त बारन, न्याय खातिर अबहियो भटकत बारन
15. ‘नौवां महीना में भी ग्राहक के खुस करे के मजबूर’
चार बेर गरभपात, पियक्कड़ घरवाला, आउर कारखाना के नउकरी छूटला के बाद, दिल्ली के हनी के पांचवा बेर पांव भारी भइल त मजबूरी में आपन देह बेचे के फैसला कइली, ओकरा बाद से ऊ यौन संक्रमण- एसटीडी संगे जियत बारी, अब लॉकडाउन में कमाए खातिर छटपटात बारी
14. ‘कवन ठगवा कोखवा लूटल हो…’
नसबंदी के बाद इंफेक्शन भइल, त राजस्थान में दौसा जिला के सुशीला देवी के तीन बरिस ले दरद भोगे के पड़ल, अस्पताल के चक्कर लागल, करजा बढ़त चल गइल, आ आखिर में बच्चादानी हटावे के पड़ल
13. ‘खटत-खटत जिनगी ओरियात बा’
जिनगी भर बेमारी आ कइएक गो ऑपरेशन के बाद पुणे में एगो गांव के बिबाबाई लोयरे के देह झुक के दोहरा गइल बा, एकरा बादो किसान परिवार के एह मेहरारू के आराम नइखे, खेती के काम आ लकवा लागल घरवाला के संभारत बारी
12. ‘बच्चादानी खिसकला से उनकर जिनगी बिलटत बा’
महाराष्ट्र के नन्दुरबार जिला में बच्चादानी खिसकला से आजिज आइल भील मेहरारू लोग के बखत पर इलाज नइखे मिल पावत, सड़क आ मोबाइल कनेक्टिविटी ना होखे से एह लोग के डिलीवरी के दिक्कत आउर बेसंभार दरद से भी सहे के पड़त बा
11. ‘देह-दिमाग के कमजोरी मेहरारू लोग पर दोहरा मार जइसन बा’
दिमागी रूप से कमजोर मेहरारू के यौन आउर प्रजनन स्वास्थ्य अधिकार के अक्सरहा उल्लंघन होखेला, ऊ लोग के आपन बच्चादानी हटावे के मजबूर कइल जाला, बाकिर महाराष्ट्र के वाडी गांव के मालन मोरे भाग्यशाली बारी कि उनका आपन माई के साथ मिलल
10. ‘12 गो लरिकन पैदा भइल तब फेरा खतम भइल’
हरियाणा के बीवां गांव में, समाज के नियम-कायदा, पहुंच से बाहिर स्वास्थ्य सेवा आ ढीला-ढाला प्रदाता के चलते मेओ मुसलमान तक गर्भनिरोधक नइखे पहुंच पावत- एह से मेहरारू लोग जचगी के फेरा में पड़ जाता
9. लॉकडाउन में पीरियड के कहानी, एगो बुचिया के जुबानी
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिला में लॉकडाउन के बाद स्कूल बंद भइला से, गरीब परिवार के लइकिन के फ्री सेनेटरी नैपकिन नइखे मिलत, एकरा से अब ऊ लोग पुरान कपड़ा लेवे के मजबूर बा जेकरा से इंफेक्शन आ दोसर परेशानी शुरू हो गइल बा, खाली यूपी में अइसन लइकी लोग के संख्या 10 लाख होई
8. तनखा के ठिकाना ना, काम चाहीं चकाचक
मामूली तनखा, कबो खत्म ना होखे वाला सर्वेक्षण, रिपोर्ट आ दोसर काम के चलते सुनीता कोल्हू के बैल भइल बारी, हरियाणा के सोनीपत ज़िला के उनकरे जइसन आउर आशा कार्यकर्ता, आपन हक आ गांव-देहात में मेहरारू लोग के जचगी के जरूरत पूरा करे खातिर लड़त बारी
7. 'ई बच्चा केकर बच्चा बा'
तमिलनाडु के नीलगिरी जिला में आदिवासी बच्चा लोग आधा पेट खाए के मजबूर बा, इहंवा गुडलूर में महतारी लोग के खून में हीमोग्लोबिन बहुते कम बा, 7 किलो के दु बरिस के बच्चा, दारू के लत, घटत कमाई आ जंगल से बढ़त दूरी अब आम बात बा, आउर आदिवासी मेहरारू में कुपोषण बहुत तेज़ी से फैइल रहल बा
6. ‘पोता के आस में, चार गो लरिका के माई बन गइनी’
हरियाणा के एगो गांव बा हरसान कलां, उहंवा के मरद लोग के दबंगई बरदाश्त करत मेहरारू लोग बतावत बारी, कइसे आपन जिनगी के बड़ फैसला करे आउर परिवार नियोजन करे के तरीका आपन हाथ में लेवे खातिर ओह लोग के लड़े के पड़त बा
5. 'अब त बकरिये हमार बचवा बारे सन!'
महाराष्ट्र के नंदुरबार जिला में धड़गांव इलाका के मेहरारू लोग के कोख सून होखल जाता, लोगवा के ताना, लांछन आ प्रजनन (बच्चा जने) से जुड़ल समस्या के सही इलाज ना मिले से उनकर जिनगी मुरझा गइल बा
4. ‘नसबंदी करावे से कबले मुंह चोराई मरद लोग?’
परिवार नियोजन के मामला में सफलता के मूल मंत्र ह ‘मरद के हिस्सेदारी', बिहार में ‘विकास मित्र’ आउर ‘आशा कार्यकर्ता’ के नसबंदी करावे खातिर आदमी लोग के राजी करे में पसीना छूट गइल बा, पिछरा बरिस खाली एगो मरद नसबंदी खातिर मानलन, साफ बा कि अनचाहल गरभ के रोके के पूरा भार अभियो मेहरारू लोग के माथे बा
3. ‘ऊ लोग के खाली एगो गोली देके टरका देहल जाला'
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिला में सरकारी अस्पताल में सभ सुबिधा बा, बाकिर ई जादेतर आदिवासी मेहरारू के पहुंच से बाहर बा, एहिसे ऊ लोग गर्भ गिरावे आउर जचगी बदे झोलाछाप डॉक्टर के चक्कर में फंस जाली
2. नसबंदी करावत बारी मेहरारू, कन्नी काटत बारन मरद
सुप्रीम कोर्ट के 2016 में आइल आदेश के बाद नसबंदी शिविर के जगह ‘नसबंदी दिवस’ ले लेहले बा. बाकिर आजो नसबंदी मेहरारू लोग के जादे होला. बच्चा रोके के कवनो दोसर नया तरीका ना होखे के चलते यूपी के मेहरारू लोग ई कदम उठावेली
1. नीक कूवलापुरम के ‘भवनवा’ नाही लागे सखिया!
मदुरई ज़िला के कूवलापुरम आ चार गो दोसर गंउवा में माहवारी भइला पर मेहरारू लोग के घर से निकाल के गंउवा से बाहिर ‘गेस्टहाउस’ में भेज दिहल जाला. देवी-देवता के खिसियाए के अंदेशा आ पुरुषप्रधान सोच के कारण इहंवा केहु में ई भेदभाव के खिलाफ आवाज उठावे के हिम्मत नइखे
अनुवाद: स्वर्ण कांता
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