बस्तर में पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियां

29 Mar, 2016



FOCUS

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के एक तथ्यान्वेषी दल की रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ राज्य का बस्तर मंडल काफी तेजी से संघर्षों के क्षेत्र में बदलता जा रहा है। यहां सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच लगातार जंग जारी है। इन दोनों के बीच पत्रकार फंसे हुए हैं और उन पर सरकारी व गैर-सरकारी दोनों ही ताकतों का हमला हो रहा है। 

पिछले कुछ महीनों के दौरान पत्रकारों पर हमले की कई घटनाएं खबरों में आई हैं। खबरों के अनुसार कम से कम दो ऐसे पत्रकार हैं जिन्हें गिरफ्तार किया गया और जेल में डाला गया है और अन्य ऐसे पत्रकार हैं जिन्हें इस कदर धमकाया गया कि उन्हें अपनी जान बचाने के लिए बस्तर छोड़कर बाहर जाना पड़ा। सूचना के अनुसार कम से कम एक पत्रकार के आवास पर भी हमला हुआ है। 

इन खबरों की पड़ताल करने के लिए एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने तीन सदस्यों की एक तथ्यान्वेषी टीम का गठन किया। चूंकि सीमा चिश्ती यात्रा करने में असमर्थ थीं, इसलिए प्रकाश दुबे और विनोद वर्मा ने 13, 14 और 15 मार्च, 2016 को रायपुर/जगदलपुर का दौरा किया। 

तथ्यान्वेषी कमेटी के सदस्यों ने जगदलपुर में कई पत्रकारों और सरकारी अफसरों से मुलाकात की। रायपुर में इस टीम ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और राज्य के सभी शीर्ष अधिकारियों समेत कई संपादकों और कुछ वरिष्ठ पत्रकारों से मुलाकात की। 

टीम ने पत्रकार मालिनी सुब्रमण्यम और आलोक पुतुल के बयानात दर्ज किए। टीम ने केंद्रीय कारागार का दौरा कर के वहां बंद पत्रकार संतोष यादव से भी मुलाकात की। 

तथ्यान्वेषी दल इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि पत्रकारों को खतरे संबंधी मीडिया में आई खबरें सच हैं। छत्तीसगढ़ में मीडिया जबरदस्त दबाव में काम कर रहा है। जगदलपुर और सुदूर आदिवासी अंचलों में पत्रकारों को खबरें जुटाने और प्रसारित करने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। पत्रकारों पर जिला प्रशासन, खासकर पुलिस का दबाव है कि उनके मुताबिक खबर लिखें और ऐसी खबरें न छापें जिसे प्रशासन अपने खिलाफ मानता है। इलाके में काम कर रहे पत्रकारों पर माओवादियों का भी दबाव है। मोटे तौर पर यह धारणा है कि प्रत्येक पत्रकार पर सरकार निगरानी रखे हुए है और उनकी सभी गतिविधियों की जासूसी की जा रही है। वे फोन पर कुछ भी बात करने से हिचकिचाते हैं क्योंकि उन्हीं के मुताबिक ‘‘पुलिस हमारा एक-एक शब्द सुनती है।’’ 

कई वरिष्ठ पत्रकारों ने इस बात की पुष्टि की है कि एक विवादास्पद नागरिक समूह सामाजिक एकता मंच बस्तर में पुलिस मुख्यालय द्वारा वित्तपोषित और संचालित किया जाता है। उनके मुताबिक यह समूह सलवा जुड़ुम का ही एक अवतार है। 


AUTHOR

तथ्यान्वेषी दल के सदस्य 

प्रकाश दुबे, सीमा चिश्ती, विनोद वर्मा