29. वो गलियां गई कहां, वो बोली कहां गई?
किताबोंसे पहले, रोज़ की आवाज़ोंमें बसती है हमारीमातृभाषा जो आज बहुतकम सुनाई देती हैं. अंतरराष्ट्रीयमातृभाषा दिवस पर पारीभाषाउन आवाज़ों को याद कररहे हैं जो मोहल्लेकी शांति को तोड़ते हुएभी ज़िंदा रखती थीं, भाईचाराको, भाषा को…
फ़रवरी 21, 2023 | पारीभाषा टीम






























