
SANGUR, PUNJAB
|FRI, NOV 01, 2024
तीज त्योहार आ एकरा सोहावन बनावे वाला
पुरखन के किस्सा, देवी-देवता के महिमा, धरती-आसमान, बदलत मौसम, फसल के सुख. भारत में होखे वाला परब-त्योहार में रउआ ई सब कुछ मिल जाई. लोग के आपस में जोड़के, ई जात-पात आ मरद-मेहरारू के भेद भुला देवेला, धरम के देवाल गिरा देवेला. रीत-रिवाज आ परंपरा के त बना के रखबे करेला, बाकिर रोज-रोज के एके तरह के दिनचर्या आ काम-धंधा से पाकल देह-मन के हरियरो कर देवेला. ई सब अलग-अलग जाति समाज से आवे आउर आपन काम-काज आ कला से गीत-संगीत, नाच-पूजा आ भोज-भात के शोभा बढ़ावे वाला कारीगर लोग के बिना पूरा ना हो सके. पारी के दस्तावेज अपना में एह तरह के नाना प्रकार के परब-त्योहार आ ओकर रौनक बढ़ावे वाला के कहानी समेटले बा
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13. पियर बदरा तरे भक्तन के टोली
हर साल अक्टूबर के आस-पास महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिला के पट्टन कोडोली गांव में विट्ठल बीरदेव यात्रा निकलेला. एह मौका पर धनगर आ कुरुबा चरवाहा समुदाय के लोग जुटेला. खूब धूम-धड़ाका, नाच-गान आ आस्था के माहौल रहेला. एगो फोटो स्टोरी
12. ‘माई रुसेली त समुंदर में बिला जाली’
तमिल महीना, मासी में इरुलर समुदाय के लोग आपन देवी कन्निअम्मा के खुस करे आउर उनकरा पूजे खातिर अपना घर लावेला चेन्नई लगे मामल्लपुरम के समुदंर तीरे पूरा जोर-शोर से जुटेला. उहंवा तट पर पंडित लोग केकरो बियाह करावेला, त कहूं नामकरण संस्कार होखत रहेला, आउर कहूं भेंट चढ़ावल जात रहेलाबा
11. गंगरेल में विस्थापित देवी के नाच
दक्खिनी छत्तीसगढ़ में राज्य के कोना-कोना से आइल गोंड आदिवासी लोग दिन भर होखे वाला गंगरेल मड़ई उत्सव मनावला
10. बराबरी के मशाल से जगमग उगादी उत्सव
आंध्र प्रदेस के मेडापुरम में हर साल उगादी उत्सव भव्य तरीका से मनावल जाला. एकर समूचा आयोजन देवता के मूरति गांव लेके आवे वाला अनुसूचित जाति के लोग करेला
9. मछुआरा लोग के देवता गढ़े वाला दुर्लभ कलाकार
तिरूवल्लूर जिला में एगो देहाती कलाकार उत्तरी चेन्नई में मछुआरा लोग के देवता- कन्निसामी के मूरति गढ़ेलन. मूरति गांव के माटी आउर भूसा से तइयार कइल जाला. अंधाधुंध बिकास के एह दौर में अब ई दुनो चीज मिलल दूभर हो गइल बा
8. इरुलर तीज त्योहार में के अड़ंगा लगावत बा?
तमिलनाडु में बंगलामेडु गांव के इरुलर समुदाय में देवी के पूजा-पाठ आउर उत्सव मनावे के तौर-तरीका में धीरे-धीरे बहुते बदलाव आ रहल बा
7. तुलुनाडु के साझा संस्कृति के पहरुआ पटाखा कारीगर
कर्नाटक बहुते तरह के समन्वयवादी परंपरा के धरती रहल बा. पटाखा कारीगरी ओहि में से एगो बा. एह में मुस्लिम मरद लोग तरह तरह के धार्मिक आउर सांस्कृतिक मौका खातिर पटाखा बनावे आउर फोड़े के काम करेला. गर्नाल साइबेर, आउर एकदम अलग तरह के एह कला के बारे में एगो फिलिम
6. चादर बादनी: परंपरा के डोर से बंधल कठपुतली के खेला
बीरभूम के जवान आदिवासी किसान तपन मुर्मू फसल कटाई के परब में कठपुतली के खेला देखावेलन. ऊ बहुते चिंतित बाड़न कि उनकर पीढ़ी के ई कला सीखे में कवनो रुचि नइखे रह गइल
5. माजुली के रास महोत्सव आउर मठ में राउर स्वागत बा!
असम में धूमधाम से मनावे जाए वाला, नृत्य आउर नाटक से भरपूर रास उत्सव खातिर लोग साल भर से अगोरिया कइले रहेला. बाकिर नयका पीढ़ी के एह में रुचि ना होखे आउर पलायन करे से कलाकार भेंटल मुस्किल भइल जात बा
4. तुलुनाडू के ‘भूत’ पूजा में उमड़ेला भाईचारा के रसधार
अरब सागर के कर्नाटक में पड़े वाला तटीय इलाका में अलग-अलग समुदाय के लोग मिलके भूत पूजा करेला. एह मौका पर प्रदर्शन करे वाला सईद नासिर आउर उनकर संगीत के टोली के विरासत पर एगो फिलिम बनावल गइल बा. ऊ फिलिम इहंवा प्रस्तुत बा
3. अस्सी बरिस से उनकर दीया दीवाली में अंजोर कइले बा
एस. परदेसम के हाथ से बनल लाखन दीया दीवाली में लोग के घर के अन्हार दूर करत आवत बा. विशाखापट्टनम के कुम्मारी वीढ़ी के रहे वाला 92 बरिस के बूढ़ एह गली के अंतिम कुम्हार बानी
2. वारली बस्ती के देवाली खास बा!
मुंबई से ठीक बाहिर एगो आदिवासी पाड़ा बा. उहंवा शहर के चकाचौंध से दूर, हमार परिवार हर साल जेका पारंपरिक पकवान, पूजा-पाठ, प्रकृति के प्रति श्रद्धा भाव आउर खुसी के साथ इहो साल देवाली मनावत बा
1. कुमारटुलि के सफर
कोलकाता के सैकड़न साल से ढेर पुरान कुम्हारन के बस्ती में करीगर लोग रात भर माटी के मूर्तियन पर काम कर रहल बा. एके उ लोग जल्दिये दुर्गा पूजा खातिर शहर भेजिहें
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