पत्रकार, अनन्या टोपनो, रोहित गगराई, आकाश एका अऊ पल्लबी लुगुन ह पारी ला अपन अनुभव बताइन: “अइसने किसिम के [शोध] काम करे ह हमर बर कुछु नवा आय. हमन लोगन मन ला साग भाजी बेंचेइय्या मन ले मोलभाव करत देखन, फेर हमन जानथन के साग भाजी कमाय कतक कठिन आय. हमन ला अचरज होथे के लोगन मन किसान मन के संग दाम ला लेके काबर बहस करथें?”
इहाँ तक ले जऊन लइका मन गाँव-देहात मं नई जावंय, वो मन ला घलो लगथे के लिखे बर बनेच कुछु हवय, जइसने के कचरा संकलेइय्या एन. सरम्मा के कहिनी, जेन ह त्रिवेन्द्रम मं एक ठन मुफत के रसोई चलाथे. सरम्मा के डहर ले कहे गे हवय, “मंय ये नियम के सखत पालन करथों के कऊनो घलो भूखाय झन रहय काबर के मंय बचपना मं भारी गरीबी ले जूझे रहेंव.”
ये कहिनी आयशा जॉयस ह लिखे गे रहिस अऊ येला हजारों पढ़ेइय्या मन लाइक करिन अऊ कमेन्ट घलो करिन जेन मन मदद करे ला चाहत रहिन. जब सरम्मा ले पूछे गे रहिस के ओकर बेटी घलो इहीच बूता काबर करथे, त वो ह कहिथे, “दलित ला कऊन नउकरी दिही” लोगन मन हमेशा ये देखथें के तोर काय हैसियत हवय. हमन कतको घलो लगन ले काम करन कुछु घलो करन, फेर हमर करा अऊ कऊनो रद्दा नई ये. हमर जिनगी बस अइसनेच चलत हवय.”
हमन वो मन ला साक्षात्कार के तकनीक, साक्षात्कार सेती लोगन मन के सहमति हासिल करे अऊ पाठक ला जोड़ के रखेइय्या जानकारी मन के क्रॉस-सेक्शन ला धरे के जरूरत ऊपर घलो प्रशिक्षित करथन. महत्तम ढंग ले लइका मन ये घलो सिखथें के ये कहिनी मन ला कइसने लिखे जाय अऊ रचे जाय जेकर ले वो ह खुद के ब्लॉग के छोड़ रिपोर्टिंग के तथ्य के रूप मं दिखय.
जब पत्रकारिता अक्सर कतको जरिया अऊ आंकड़ा के मदद ले बड़े खोजी जानकारी ले जुड़े होथे, हमन अपन लइका मन ला लोगन मन के सरल रुपरेखा लिखे सेती प्रोत्साहित करथन. ये रुपरेखा लोगन मन के रोज के अनुभव, ओकर काम. काम के घंटा, ओकर ले मिले ख़ुशी, ओकर मन के काम के तरीका, बिपत मं जूझे, ओकर मन के जिनगी के सुख-दुख अऊ अपन लइका मन बर वो मन के सपना के शामिल होथे.
पारी एजुकेशन ह हमर वो कोशिश आय के नव पीढ़ी मन ईमानदार पत्रकारिता के नजरिया ले समाजिक मुद्दा ला पहिचानेंव अऊ मान करेंव. लोगन मन अऊ ओकर कहिनी मन ला चेत धरके बतावत लइका मन पत्रकारिता के संगे संग अपन क्लास मं घलो मानवता के पक्ष ला लेके आथें.
गर तुमन चाहत हव के पारी तुम्हर संस्थान के संग काम करे, त किरपा करके [email protected] मं लिखव.
ये कहिनी के फीचर इमेज पारी के फोटो एडिटर बिनाइफर भरूचा ह खींचे रहिस
अनुवाद: निर्मल कुमार साहू