डॉ. रेंगलक्ष्मी कहिथें, “जिहां जियादा दुवाब होथे, उहाँ विविधता घलो जियादा होथे. समंदर तीर के तमिलनाडु, खास करके कडलूर ले लेके रामनातपुरम जिला के बीच के इलाका ला लेवव, जिहां नुनचुर अऊ माटी के गुन के सेती धान के कतको अचरज भरे देसी किसिम देखे ला मिलथे, जेन ह अलग-अलग बखत मं पकथे. जइसने के नागपट्टिनम अऊ वेदारण्यम के बीच के इलाका मं कुलिवेदिचान अऊ अइसने एक कोरी ले जियादा (20 ले जियादा) धान के किसिम चलन मं हवंय.”
“नागपट्टिनम अऊ पूम्पुहार के बीच मं एक ठन दीगर किसिम - कलुरंडई अऊ ओकर ले मिलत जुलत कतको दीगर किसिम के कमाय जावत रहिन जेन ह उहाँ के मुताबिक रहिस, जेकर ले पहिली के खेती के पर्यावरण तंत्र ला बेवस्थित रखे जा सकय. ये किसिम मन ला पारंपरिक माने जावत रहिस, अऊ वोला अवेइय्या सीजन सेती संभाल के रखे जावत रहिस. फेर काबर के अब बहिर ले बीजा आय लगिस, आदत के रूप मं तऊन बीजा ला संभाल के रखे के परंपरा नंदा गे हे.” येकरे सेती मऊसम मं बदलाव सेती भारी दुवाब के हालत बन जाथे, “विविधता ले जुरे जानकारी नंदा गे रहिथे,” डॉ. रेंगलक्ष्मी आरो करथें.
विविधता सेती छोटे खेत मन के सेती बांचे हवय, जिहां एके संग कतको फसल लगाय जाथे, लेनिन बताथे. “मशीनी तरीका अऊ बड़े बजार हमेसा येला नजरंदाज करेच हवंय. आभू घलो अइसने कतको फसल हवंय जउन ला बरसात के पानी के भरोसा वाले इलाका मं लगाय जाथे, अऊ जऊन ह बदलत मऊसम के असर ला झेल लेथें. रागी, तिल हरा, मटर, सेमी, बाजरा अऊ जुवार घलो बढ़िया फसल आंय. फेर जब किसान औद्योगिक खेती के तौर-तरीका मन ला अपना लेंव, अऊ जब खेती ले जुरे समाजिकता मन ला अंधाधुंध मसीन के काम के जगा मं राख देय जाय, तब ग्यान बाबत तेजी ले गिरावट जरुरी घटना होही,” लेनिन कहिथे.
सबले बड़े नुकसान हुनर के गिरती के रूप मं आगू मं आथे. येकरे सेती नइ के ग्यान गैरज़रूरी जिनिस आय, फेर येकर सेती के ग्यान-अऊ हुनर- ला पिछड़ा जिनिस मन ले जाथे. “अऊ ये के तेज़तर्रार मइनखे येकर पाछू नइ भागय. इही भयंकर मान्यता अऊ मानसिकता सेती अइसने कतको जानकार समाज के नजर मं आइन,” लेनिन जोर देवत कहिथे.
लेनिन के भरोसा आय के येकर निदान हवय. “हमन ला तऊन किसिम मन के चिन्हारी करे के जरूरत हवय जेन ह मूल रूप मं इहीच इलाका के आय. ये किसिम ला बचा के रखे ला परही, लगाय ला परही, अऊ रसोई तक पहुंचाय के इंतजाम करे ला परही. फेर संग मं अकेल्ला तिरुवन्नमलई मं तुमन ला सौ उद्यमी चाही जेन ह ‘बजार’ नांव के ये राक्षस ले लड़े सकय,” वो ह कहिथे.
“अवेइय्या पांच बछर मं मोला लगथे के हमन सब्बो एक ठन को-आपरेटिव के हिस्सा होबो अऊ आमूहिक खेती करत रहिबो. बीते बछर बेंच दिन तक ले बरसात होईस अऊ करीबन चालीस दिन तक ले सुरुज देंवता के दर्सन नइ होईस. अइसने मं तुमन धान ला कईसने सूखाहू? हमन ला धान सूखेइय्या मसीन चाही. मिलजुल के बूता करे ले हमर भीतर ताकत आही.”
वोला भरोसा हवय के बदलाव आही. बदलाव ओकर निजी जिनगी मं घलो दिखेइय्या हवय. जेठ (जून) मं ओकर बिहाव होवेइय्या हे. “राजनीतिक स्तर मं धन नीतिगत स्तर मं बदलाव धीरे धीरेच होही. हड़बड़ी मं करे गे फइसला के अपन नुकसान घलो हो सकथे.”
इही कारन आय के लेनिन के सुस्त रफ़्तार, कलेचुप आन्दोलन, जेन मं ओकर संगवारी मन ओकर संग हवंय, सायेद सफल साबित होंय...
ये शोध अध्ययन ला बेंगलुरु के अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के अनुसंधान अनुदान कार्यक्रम 2020 के तहत अनुदान हासिल होय हवय.
टिपर* एक ट्रक आय जेकर पाछू मं प्लेटफार्म होथे, जेन ला येकर आगू के मुड़ी ले उठाय जा सकथे, जेकर ले वजन ला उतारे जा सकथे.
जिल्द फोटू: चऊर के किसिम – कुल्लनकार, करुडन संबा अऊ करुनसीरक संबा. फोटू: एम. पलनी कुमार
अनुवाद: निर्मल कुमार साहू