छाया उबाले के इयाद बा कि उनकर माई जांता चलावे घरिया गीत गावत रहस. एह जांता गीत में परिवार के सुख, दुख आ परेसानी के बात समाइल रहत रहे


Pune, Maharashtra
|TUE, DEC 31, 2024
माहुर करैला मीठ कइसे बनाईं
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“माई ढेरे गीत गावत रहे. एतना गीत कि हमरा इयाद रखल मुस्किल बा,” छाया उबाले पारी के बतइली. हमनी उनका से भेंट करे पुणे, महाराष्ट्र के शिरूर तालुका गइल रहीं. ग्राइंडमिल सॉग्स प्रोजेक्ट (जीएसपी) में आपन गायल गीत से सहजोग करे वाला गायिका लोग से हमनी दोबारा संपर्क करे के कोसिस करत रहीं. एहि कोसिस में हमनी अक्टूबर 2017 में सविन्दाने गांव में रहे वाला पवार परिवार के दरवाजा खटखटइनी. ई एगो भरल-पूरल परिवार रहे, लइका, लइकी, पतोह आउर बच्चा लोग संगे रहत रहे.
बाकिर हमनी गीता पवार से मिल ना सकनी, काहेकि चार बरिस पहिले ऊ चल बसल रहस. बाकिर उनकर लइकी छाया उबाले जरूर भेंटा गइली. उहे हमनी के आपन माई के गीत के बारे में बतइली. 43 बरिस के छाया हमनी के आपन माई के चांदी के जोडावे (बिछिया) देखवली. बिछिया माई के फ्रेम लागल फोटो के बगल में संइत के रखल रहे.
माई से सुनल ओवि (जांता गीत) के इयाद करे के कोसिस करत छाया हमनी के जांता चलावे घरिय गावे वाला चार ठो गीत गा के सुनइली. ई चारों गीत के ऊ दू ठो छोट लोकगीत के बीच में गइली. एह में से एगो गीत खुसी के त दोसरका उदासी के रहे. गीत के सुरुआत दू लाइन के एगो कहानी से कइली. एह में भद्र के यशस्वी राजा अश्वपति के लइकी सावित्री के गुण के बखान करे वाला एगो पौराणिक कथा से लेवल गइल रहे. ई दोहा आगू गावे जाए वाला गीत के धुन बनावे वाला याला गला (तान) रहे. आमतौर पर इहे परंपरा रहे.

Samyukta Shastri

Samyukta Shastri

Samyukta Shastri
पहिल लोकगीत में ऊ महाभारत में आपन सौ ठो चचेरा भाई, कौरवन से लड़ाई करत पांच पांडव भाई लोग के तुलना एगो अकेला मेहरारू के रूप में अपना से करत बाड़ी. एगो अइसन मेहरारू जे आपन लमहर परिवार के अकेलहीं संभारत बा. ऊ पंढरपुर के मंदिर के विट्ठल-रुक्मिणी से आपन भक्ति देखावेली, आ उनका आपन माई-बाऊजी जेका पूजनीय मानेली. आपन माई-बाऊजी के इयाद करके उनकर गला भर आवत बा. ऊ आपन आंख से बहत लोर नइखी रोक पावत. लागता जइसे अचके बादल फाट गइल होखे आउर घर के टीन के छत पर तड़तड़ा के पानी बरसे लागल होखे.
गीत के अगिला लाइन में भाई से कहत बाड़ी कि उनका आपन चार ठो जेठ आउर जेठानी के जरूरत पूरा कइल मुस्किल हो रहल बा.
गीत के चार ओवि में छाया ओह स्नेह आ भेंट सब के बारे में बतावत बाड़ी जे लरिका लोग के आपन चाचा आ चाची से मिलल ह. लइका के मामा ओकरा एगो लाल रंग के कुरता आ टोपी लाके देले बाड़न. लइका जब भूखासल रोवे लागेला, त गायिका ओकरा दही-भात खियावे के कहत बाड़ी.
जल्दी जल्दी आपन लोर पोछत छाया एगो दोसर लोकगीत सुनावे लागत बाड़ी. एह में चुहल बा, हंसी-ठिठोली बा. गीत में सास के करैला कइल गइल बा. कहल गइल बा कि सास के खुस कइल टेढ़ काम बा. करैला जइसन सास, जाहे जेतना जतन कर, मीठ ना होई, कडुंवे रही. अंतिम गीत पर छाया संगे हमनियो ठहाका लगावे लागत बानी.
लोकगीत:
गिरीजा आसू गाळिते
भद्र देशाचा अश्वपती राजा पुण्यवान किती
पोटी सावित्री कन्या सती केली जगामध्ये किर्ती
एकशेएक कौरव आणि पाची पांडव
साळीका डाळीका गिरीजा कांडण कांडती
गिरीजा कांडण कांडती, गिरीजा हलक्यानं पुसती
तुमी कोण्या देशीचं? तुमी कोण्या घरचं?
आमी पंढरपूर देशाचं, काय विठ्ठलं घरचं
विठ्ठल माझा पिता, रुक्मिनी माझी माता
एवढा निरोप काय, सांगावा त्या दोघा
पंचमी सणाला काय ये बंधवा न्यायाला
ए बंधवा, ए बंधवा, तुझं पाऊल धुईते
गिरीजा पाऊल धुईते, गिरीजा आसू जी गाळिते
तुला कुणी बाई नि भुलीलं, तुला कुणी बाई गांजिलं
मला कुणी नाही भुलीलं, मला कुणी नाही गांजिलं
मला चौघे जण दीर, चौघे जण जावा
एवढा तरास मी कसा काढू रे बंधवा
गिरिजा लोर बहावेली
अश्वपति, भद्र के राजा, केतना भाग्यशाली रहस
उनकर लइकी, महान बिस्व-प्रसिद्ध सावित्री
एक सौ एक कौरव आ पांच ठो पांडव
चाउर होखे कि दाल, गिरिजा ओकरा कूटेली
अनाज कूटत-कूटत गिरिजा तनी धीरे से पूछेली
तू कवना देस से आइल बाड़ू? कवन परिवार से बाड़ूं?
हम पंढरपुर से आइल बानी. विट्ठल परिवार से बानी
विट्ठल हमार बाऊजी बाड़न, रुक्मिणी माई बाड़ी
दुनो लोग के हमार संदेस दे दीहीं
पंचमी के त्योहार के दिन भइया के भेज देवस
भाई हमरा ले जाई
हमार भाई, हम तोहर गोड़ धोवम भइया
गिरिजा तोहर गोड़ धोवेली, गिरिजा के आंख से लोर बहेला
तोरा के बिसरा देलक, तू काहे कष्ट में बाड़ू
हमरा केहू नइखे बिसरइले, हमरा केहू दुख नइखे देले
बाकिर हमार चार ठो जेठ आ चार ठो जेठानी बाड़ी
एतना दुख कइसे सहीं, सुन ओ भइया!
ओविस (जांता गीत):
अंगण-टोपडं सीता घालिती बाळाला
कोणाची लागी दृष्ट, काळं लाविती गालाला
अंगण-टोपडं हे बाळ कुणी नटविलं
माझ्या गं बाळाच्या मामानं पाठविलं
माझ्या गं योगेशच्या मामानं पाठविलं
अंगण-टोपडं गं बाळ दिसं लालं-लालं
माझ्या गं बाळाची मावशी आली कालं
रडतया बाळ त्याला रडू नको देऊ
वाटीत दहीभात त्याला खायला देऊ
सीता आपन लइका के कुरता-टोपी पहिना के तइयार करत बाड़ी
नजर-गुजर से बचावे खातिर गाल पर करियर टीका लगवले बाड़ी
कुरता आ टोपी में, आपन लइका के
अइसे के तइयार कइले होई!
लइका के मामा ई सब चीज ओकरा खातिर भेजले बाड़न
हमार योगेश के मामा ई भेजले बाड़न
कुरता आ टोपी... लइका लाल कपड़ा पहिरले बा
लइका के मामी ओकरा से भेंट करे काल्हे आइल रहस
लइका रोवे लागत बा, ओकरा चुप कराव
कटोरी में दही-भात खियाव
लोकगीत:
सासू खट्याळ लई माझी
सासू खट्याळ लई माझी सदा तिची नाराजी
गोड करू कशी बाई कडू कारल्याची भाजी (२)
शेजारच्या गंगीनं लावली सासूला चुगली
गंगीच्या सांगण्यानं सासूही फुगली
पोरं करी आजी-आजी, नाही बोलायला ती राजी
गोड करू कशी बाई कडू कारल्याची भाजी
सासू खट्याळ लई माझी सदा तिची नाराजी
हमार करैला जइसन सास
हमार सास बहुते कराकसिन बाड़ी, हरदम मुंह फुलइले रहेली
हम करैला के मीठ नइखी बना सकत (2)
सास उनकरे बात में आ गइली
लइका लोग प्रेम से लगे जाला आउर उनका ‘दादी-दादी’ कहेला
बाकिर ऊ लइका सब से ना बोलेली
हम एह माहुर करैला के कइसे पकाईं, एकरा मीठ कइसे बनाईं
हमार सास बड़ा कराकसिन बाड़ी, हरदम मुहं फुलइले रहेला
गायिका: छाया उबाले
गांव: सविन्दाने
तालुका: शिरूर
जिला: पुणे
तिथि: ई गीत अक्टूबर 2017 में रिकॉर्ड कइल गइल बा. ई फोटो सब भी उहे घरिया के खींचल हवे.
पोस्टर: सिंचिता परबत
हेमा राइरकर आ गाए पोइतेविन के सुरु कइल मौलिक ग्राइंडमिल सॉन्ग्स प्रोजेक्ट के बारे में पढ़ीं.
अनुवाद: स्वर्ण कांता
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