चमेली के आवते हल्ला मच जाला. रोज भोरे-भोरे मंडी पहुंचेला- धप्प से! मदुरई शहर के मट्टुतवानी मंडी में मोती जइसन चमकत कली- बोरा के बोरा कसा के आ रहल बा. गाड़ी से उतारे वाला चिल्लात बा, “वाझी, वाझी (बाजू, बाजू),” आउर झट से फूल के नीचे बिछावल प्लास्टिक पर उझल देहल जात बा- धम्म! ब्यापारी कोमल कोमल फूल के हल्का हाथ से बटोर के लोहा के तराजू पर धरत बा- खड़ खड़! अइसहीं एक एक किलो करके चमेली, ग्राहक के बेचे खातिर प्लास्टिक के झोला में डलात जात बाड़ी. मंडी में खूब गहमा-गहमी मचल बा. केहू भाव पूछत बा, त केहू गला फाड़-फाड़ के दाम बतावत बा. एने तिरपाल के चद्दर पर लसरायल-गील गोड़ के दाग बा. गोड़ तरे कचराइल बासी फूल पड़ल बा. बिचवइया लेन-देन पर पूरा नजर रखले बा. डायरी में हिसाब नोट होखत बा. तबहिए केहू चिल्लात बा, “हमरा पांच किलो चाहीं…”
मेहरारू लोग पूरा मंडी में घूम के नीमन-नीमन फूल खरीद रहल बा. फूल के परखे खातिर पहिले अंजुरी में भर के ऊ लोग एकरा निहारत बा. फेरु अंगुरी से निकल के कली नीचे फूल के ढेर पर गिर रहल बा. चमेली नीमन होई, त ई बरखा के बुन्नी (बूंद) जइसन झर-झर गिरे लागी. एगो फूल बेचे वाली मेहरारू गुलाब आउर गेंदा के जोड़ा लगाके, दांत से क्लिप खोल के ओहि में फंसा देत बाड़ी. फेरु ओकरा आपन केस में टांक लेत बाड़ी- फटाक! फूल केस में खूब फब रहल बा. अब माथ पर बेला, चेमली, गुलाब, गेंदा जइसन चटख रंग के फूल से भरल टोकरी उठा के ऊ मंडी के हो-हल्ला से निकल जात बाड़ी.
फूलवाली सड़क किनारे, एगो छतरी के छाह तरे टोकरी रख के बइठ गइली. तनी सुस्ता के ऊ फूल के डोरी में गूंथ के माला, लड़ी आउर गजरा बनावे लागत बाड़ी. एकरा बाद में गिनती के हिसाब से बेचल जाई. चमेली के कली हरियर तागा में गुंथल बाड़ी. ऊ एगो आज्ञाकारी बालक जेका तागा के दुनो ओरी बाहिर मुंह करके चुपचाप बइठल बाड़ी. एकर पंखुड़ी से निकल के भीना भीना खुश्बू नथुना में भरल जात बा. पूजा के थारी में सजावल, कार में टांगल, भगवान के फोटो पर लटकल माला में गूंथल फूल जब खिल उठेला, त एकर मादक गंध आपन होखे के प्रमाण देवेला आउर आपन नाम जोर से पुकारेला- मदुरई मल्ली.
पारी तीन बरिस में मट्टुतवानी मंडी तीन बेर पहुंचल. पहिल बेर गइल, त सितंबर 2021 में विनायक चतुर्थी से चार दिन पहिले, भगवान गणेश जी के जन्मदिन रहे. एह यात्रा में हमनी के फूल के ब्यापार के बारे में बुनियादी जानकारी मिलल. मट्टुतवानी बस स्टैंड के पाछू हमनी के फूल के एगो कारोबारी से भेंट भइल. कोविड चलते बाजार कबो-कबो लागत रहे. अइसन सोशल डिस्टेंसिंग खातिर कइल गइल रहे. एकरा बादो उहंवा तनी धक्का-मुक्की लउकत रहे.
हमनी के ‘कक्षा’ सुरु करे से पहिले मदुरई फूल बाजार संगठन के अध्यक्ष आपन नाम बतइलन: “हम पूकडई रामचंद्रन हईं. आउर ई,” ऊ फूल बाजार ओरी इसारा करत कहले, “हमार महाविद्यालय ह.”






























