‘इतने दिन से वोट देते आए हैं, मेरा नाम कैसे कट सकता है?’
हालिया चुनावों से पहले हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न यानी एसआईआर में कई आदिवासियों के नाम रद्द कर दिए गए थे, जिससे उन्हें बहुत चिंता और निराशा हुई. बाद में कुछ नाम मतदाता सूची में फिर से चढ़ा दिए गए. पर सवाल यह है कि उन्हें पहले हटाया ही क्यों गया था?
तमिलनाडु के विरुधाचलम में कुम्हार चीनी मिट्टी से बनी गुड़िया और मिट्टी के दीये बनाते हैं. इस काम से नियम उन्हें न तो नियमित आमदनी होती है और न ही उन्हें वैसा सम्मान मिलता है जिसके वे हकदार हैं. इसके बावजूद इन कलाकारों की हिम्मत नहीं टूटी है. वे अपने हाथों से मिट्टी को आकार देकर कलाएं गढ़ते हैं
महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के पिंपलगांव सरई गांव में मूल निवासियों से ज़्यादा प्रवासी परिवार रहते हैं. यहां के एक दरगाह में उनकी गहरी आस्था है जिसके बारे में उनका मानना है कि वहां मानसिक बीमारियों का चमत्कारी इलाज होता है
Parth M.N., P. Sainath, Binaifer Bharucha, Prabhat Milind
पंजाब में गुरमेल जैसे दलित कारीगर दुधारू पशुओं के लिए गेहूं के डंठल रखने वाले कुप्प बनाते हैं. हालांकि पशुचारे के भंडारण को लेकर लिखी गई यह कहानी राज्य में बदलती हुई खेती और पशुपालन के हालात को उजागर करती है