देश भर मं, देहात के माईलोगन मन अपन दिन के 20 फीसदी हिस्सा बिन रोजी-बनी वाले घर के बूता मं लगा देथें, एक ठन सर्वे मं ये बात कहे गे हवय. रपट के नांव टाइम यूज़ इन इंडिया-2019 आय अऊ येला सांख्यिकी अऊ कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) डहर ले रखे गे हवय.
भारत के गाँव-देहात के माईलोगन के, बनिहारिन, दाई, घरवाली, बेटी अऊ बहू के रूप मं घर के बूता – अचार, पापड़ अऊ सिलाई मं बीत जाथे. “कऊनो घलो हाथ सिलाई के बूता हमर बर सुभिता के होते. हमन जुन्ना लुगरा मन ला छांट के रखथन अऊ घर बर कथरी बनाय सेती वो ला काट के सिलथन.” उर्मिला देवी कहिथें, जेन ह उत्तर प्रदेश के बैठकवा बस्ती मं रहिथें.
घाम मं दीगर माइलोगन मन के संग भंइसा ला रोज के तैराय ला लेगे जाय, ये 50 बछर के आंगनबाड़ी दीदी सेती जिनगी के फुरसत के दिन आय. वो ह कहिथे, “जब हमर लइका मन खेलत रहिथें अऊ बेलन नदी के पानी मं कूदत रहिथें त हमन ला अपन बर फुरसत के मऊका मिलथे,” वो ह तुरते कथे के ये घाम मं नदी मं जियादा पानी नई ये येकर सेती लइका मन बर खतरा नई ये.
कोरांव जिला के देवघाट गांव के आंगनवाड़ी दीदी, उर्मिला हफ्ता भर तक ले नवा महतारी अऊ ओकर लइका मन के देखरेख मं लगे रहिथें, टीकाकरन अऊ दीगर जचकी के पहिली अऊ जचकी के बाद के जाँच के लंबा लिस्ट लिखत रहिथें.
चार जवान लइका के महतारी अऊ तीन बछर के कुंज कुमार के दादी ह 2000 ले 2005 तक देवघाट के गाँव के सरपंच चुने गे रहिन. वो ह बनेच अकन दलित बस्ती के पढ़े लिखे माइलोगन मन ले एक झिन आंय. “ मंय बेर के बेर तऊन जवान नोनी मन ला सुनावत रहिथों जऊन मन स्कूल पढ़े ला जाय छोड़ देथें. फेर वो मन नई सुनेंव अऊ ओकर घर के मन नई सुनंय,” वो बेबस होय अपन खांध ला उचाकवत कहिथें.
उर्मिला कहिथें, “बर-बिहाव अऊ सगाई मं माईलोगन मन ला कुछु बखत बर अपन आप ला देखे के मऊका मिलथे, हमन एके संग गाथन, एके संग हंसथन.” वो ह हंसत आगू कहिथे के ये गाना बर-बिहाव अऊ घर के नाता-रिस्ता ऊपर रहिथे अऊ बने नई घलो हो सकथे.