
SANGUR, PUNJAB
|SAT, MAR 27, 2021
भारत के आनी-बानी के बाजा के मजा लेवव
भारत के गाँव-देहात मन मं बजेइय्या बाजा गाँव-देहात के इलाका मन के जइसने आनी-बानी के हवय- हिमाचल प्रदेश के तार वाले बाजा रुबाब अऊ डफ जइसने खंजरी, पश्चिम बंगाल के बनम अऊ गबगुबी, महाराष्ट्र के बड़े सींग जइसने तारपा, छत्तीसगढ़ के घूमाके हवा ले बजेइय्या बांसुरी अऊ बांस बाजा, कतको राज के धुमसी, ढोल, ढोलक, ढप अऊ डोलू. ये अऊ कतको दीगर बाजा मन ला भारी माहिर कारीगर मन अपन हाथ ले बनाथें जेन मन पुरखा के ये काम ला आगू बढ़ावत जावत हवंय – जइसने नरसिंगपेट्टई के नादस्वरम बनेइय्या, मायलापुर के मृदंगम बनेइय्या, कासरगोड मं बांस के ढोल अऊ पेरुवेम्बा मं ताल बाजा के बनेइय्या. फेर येकर कतको संगीत परंपरा मन नंदावत जावत हें, कतको ज़ोरदार अऊ बढ़िया चलन मं घलो हवंय, जइसने के पारी के ये कहिनी मन ले पता चलथे -अभू घलो मूल धुन मं, गाँव-देहात के नजारा मं गूँजत
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15. मया के मयारू धुन
वाह्या ह नागालैंड के कोंयाक आदिवासी समाज के एक ठन बाजा आय, जऊन ला मया जताय बर बउरे जाथे. सलाना अवलेंग बसंत तिहार मं येकर धुन सुनव
14. धुन गढ़त दहिसर के कारीगर
इरफ़ान शेख अऊ ओकर समाज मुंबई के दहिसर के चहल-पहल वाले गली मन मं रहिथे. वो मन नवा जमाना के चुनोती के बाद घलो ढोलक बनाय के सदियों जुन्ना अपन परंपरा ला आगू लेके जावत हवंय. इरफ़ान अऊ ओकर बखत मुताबिक कला ला बतावत एक ठन फिलिम
13. हवा मं गुंजत तारपी के धुन
ये बजेइय्या ला तारपी (जेला तारपा घलो कहे जाथे) बजावत देखव अऊ सुनव
12. स्टेज मं बोडो नर्तकी अऊ बाजा बजेइय्या
असम के बोडो समाज के सुबनश्री अऊ बागुरुम्बा नृत्य ला देखव, जऊन मं सिफुंग (लंबी बांसुरी), खाम (ढोल) अऊ सेरजा (वायलिन) बजेइय्या मन घलो हवंय
11. ‘बिन बजाय खरताल ले निकरत सुर’
राजस्थान के नामी बाजा खरताल बनेइय्या बचे-खुचे बढ़ई मन ले एक आंय अनोपाराम सुतार. दीगर लोगन मन फर्नीचर बनाय बर शहर चले गे हवंय काबर के वो मन के कहना आय के उहाँ जियादा कमई होथे
10. सरी जिनगी हाथ ले मोरचंग गढ़त
मोहनलाल लोहार 50 बछर ले घलो जियादा बखत ले मोरचंग ब गढ़त हवय. राजस्थान के रेत के टीला मन मं ये बाजा के धुन ला सुने जा सकत हे
9. धुन बनाय सेती जूझत माजुली के बद्योकर
बछर भर तक ले चलत रहेइय्या असमी तिहार मन मं थाप बाजा के भरो महत्ता हवय. ये महत्तम ढोल, खोल अऊ दीगर बाजा मन ला बनाय अऊ मरम्मत करेइय्या माहिर कारीगर मन के कहना आय के नवा मवेसी मारे के विरोधी कानून सेती कीमत ह बढ़े हवय अऊ अतियाचार होय हवय
8. सुर साधत मिराज के सितारमेकर
महाराष्ट्र के मिराज शहर के कतको परिवार सितार अऊ तानपुरा जइसने तार वाले बाजा बनाथें. जवान पीढ़ी येला बनाय के हुनर ला छोड़ के अब येला बजाय ला सीखत हवय
7. कटहर लकरी ले निकरत सुग्घर संगीत
भारत के कतको जुन्ना अऊ महत्तम बाजा मन ला बनाय मं कटहर के लकरी बऊरे जाथे, जेन ह जम्मो तमिलनाडु मं जामथे. पनरुती अऊ तंजावुर के भारी माहिर कारीगर मन वो लकरी ले राग अऊ सुर निकार लेथें
6. ‘मोर तारपा, मोर देंवता आय’
भिकल्या लाडक्या धिंडा वारली आदिवासी आंय. 89 बछर के ये संगीतकार वालवांडे मं रहिथे अऊ तरपा बजाथे, जेन ह बांस अऊ सूखाय लौकी ले बने एक ठन पारंपरिक बाजा आय. सुनव ओकर संगीत अऊ आस्था के कहिनी ओकरेच जुबानी
5. ‘मोर संग ये कला घलो नंदा जाही’
कर्नाटक के मनकापुर गांव मं पारंपरिक, हाथ ले बने शहनाई के लेवाली तेजी ले घटत हवय, 65 बछर के एक झिन कारीगर अपन कला ला बचाय सेती नवा उदिम के सहारा लेथे
4. कलाकारी ले पेट नई भरय
किशन जोगी मुंबई के लोकल ट्रेन मन मं सारंगी बजाके अपन ददा के विरासत ला बचाके रखे हवंय. वइसे, राजस्थान ले आय इहाँ आय ये कलाकार ला अपन गुजर-बसर करे सेती भारी जूझे ला परत हवय
3. माला मं पिरोय फूल कस नाच
जलकल्ला के महिना मं तीज-तिहार बखत छत्तीसगढ़ के गोंड समाज के मोटियारा–मोटियारीन मन हुलकी, मांडरी अऊ कोलांग नाचे बर एक गाँव ले दुसर गाँव जाथें अउ रेला गीत गाथें
2. नंदावत जात ओरछा के जंगल अऊ मनिराम के बांसुरी
छत्तीसगढ़ के नरायनपुर जिला के गोंड आदिवासी अऊ पेशा ले बांसुरी बनैय्या, मनीराम मंडावी ओ बखत ला सुरता करथे, जेन समे जंगल ह अब्बड़ अकन जानवर, रुख-रई अऊ ऊ बांस ले भरे रहय जेकर ले वो खास किसिम के ‘घुमा के बजाने वाला बांसुरी’ बनाथे
1. बांस गीत: छत्तीसगढ़ के रावत मन के धुन
छत्तीसगढ़ के बालोद जिला के यादव समाज के पंचराम, बाबूलाल अऊ सहदेव यादव अबो तक ले बांस बाजा-गीत बजाथें अऊ गाथें, फेर ये मन के ये पुरखौती बाजा अउ और गीत के अब पूछनहार,सुनइय्या कमती होगे हें
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