हबीब-उन-निसा ह अपन आंखी के आगू जेन अतियाचार ला देखिस, ओकर ले भारी डर गे रहिस, फेर प्रदर्सन करेइय्या मन के साहस ले ओला घलो प्रेरना मिलिस. गुजरे सना शेख के दाई ह पारी ला बताइस, “ मंय एक झिन आम महतारी अंव अऊ मोर लइका मन मोर संसार. मंय घर-गृहस्थी वाले माइलोगन के जिनगी गुजारे हवंव, फेर राज करेइय्या मन मोर संसार ला उजार दिन. ओकरे मन के सेती मोर बेटी के जान चले गिस. तुंहर काम हमर रच्छा करना आय, हमर जिनगी उजारे नइ.”
3 मई, 2026 के दिन सना के परीक्षा बनेच बढ़िया होय के बाद, केंद्र सरकार ह घोसना करिस के नीट के पेपर फूट गे रहिस अऊ लइका मन ला फिर ले परीक्षा देय ला परही. वो ह भारी टूट गे. ओकर जोरदार तियारी के ओकर उपर फिकिच ले बनेच असर परे रहिस. नीट भारी कठिन परीक्षा आय, जेकर ले मेडिकल कालेज मन के 1,30, 000 ले घलो कम सीट बर 20 लाख ले जियादा उम्मीदवार होथें. कतको बछर के तियारी करे के बाद, सना ला लगे रहिस के दुवाब खतम गे हवय. फेर अब ओला फिर ले उहिच मुस्किल बखत ले जूझे ला रहिस.
दुख के बात ये आय के दुबारा परीक्षा देय के बोझा, ओला अपन जान देय ले घलो कठिन लगिस. 21 जून के दिन होवेइय्या दुबारा परीक्षा के एक दिन पहिली, अपन कमरा मं फांसी लगाय के पहिली ओ ह बस कागज मं अतकेच लिखिस – “मोला माफ़ कर दिहू.”
वो ह तउन 20 झिन ले जियादा लइका मन ले एक आय जेन मन एकरे सेती आत्महत्या करिन.
जाफ़र कहिथे, “वो बिहनिया ओ ह मोर कोनो फोन के जुवाब नइ दिस.” भगवान करे रइतिस के मोर गोठ- बात हो जाय रइतिस त आज ओ ह हमर संग रइतिस.”
दुखियारिन महतारी हबीब-उन-निसा कहिथे, “मंय अतक दूरिहा सिरिफ येकरे सेती आय हवंव के ये बताय सकंव के मंय कइसने बखत ले गुजरत हवंव.” ओला ये घलो बिस्वास नइ होवत रहय के ओकर सबले बड़े बेटी अब ये दुनिया छोड़ चुके हवय. वो ह कहिथे, “हो सकथे के हमन पांच बछर मं मर जावन धन डोकरा सियान के जिनगी गुजारन, फेर हमन ला ये पीरा जिनगी भर अपन संग लेके चले ला परही.रतिहा मं मोर बने करके नींद नइ परय: आधा रात मं मोर हाथ-गोड़ कांपे लागथे.”
ओकर बाद घलो, दाई-ददा अपन 15 अऊ 11 बछर के दूनों बेटी ला छोड़ के दिल्ली चले आइन. “मंय ओकर मन के बारे मं सोचत रहिथों अऊ हलाकान रहिथों. मंय इहाँ राज करेइय्या लोगन मन ला ये बताय ला आय हवंव के ओ मन गलत हवंय. काय सत्ता ह तुमन ला अंधरा कर दे हवय? लइका मन मोर जइसने महतारी मन बर विरोध करत हवंय. ओ मन हमर दुख ला समझथें. मोर दुख मं सामिल लोगन मन ला पुलिस के हाथ ले मार खावत देखे भारी पीरा भरे रहिस. गर तुमन हमर दुख-पीरा ला समझे नइ सकव, त तुंहर ताकत के काय फायदा? बच्चों पे इतना जुल्म मत करिये (बिनती हवय लइका मन के उपर अतक जुलुम झन करव).”