हम सब कटुए हैं
हम सब कटुए हैं, आमात्य!
अपने कटे हुए सर
कटी हुई बाहें
कटे हुए पैर
और क्षत विक्षत आत्माएं लेकर
हम भटक रहें हैं
हम कातर कबंध…
हम सब कटुए हैं, राजन!
हम उस मां के कटे हुए सर हैं
जिसे पातकी पितृत्व की मदिरा से चूर
पाखंडी परशु ने धड़ से अलग कर दिया था
हम अधूरे धड़ से
मां के कटे हुए शीश के कल्ले
माटी में बोते हैं…
हम सब कटुए हैं, राजपुरूष!
हम उस तापस कुमार के भूलुंठित शीश हैं
जिसे खोखली मर्यादा की म्यान से निकाली गई
और जाति दर्प से विष बुझाई तलवार ने
काट दिया था...
जिसे किसी ने नहीं सुना
और जो अट्टहास गूंजता है हमारी संस्कृति कंदराओं में
हम उस कटे हुए शीश के अट्टहास हैं...
हम सब कटुए हैं, राजदंडाधिकारियो!
हम युगों युगों से
उस युवती की रक्त स्रावित नाक हैं
जिसे पुरुष के अहम ने
जिसे राज पुरुष दंभ ने काट दिया था
हमारी नककटी सभ्यता उस युवती के रक्त में
स्नान कर रही है और डुबकी मार
अपना ईश्वर खोज रही है
हम सब कटुए हैं, चक्रवर्ती!
हम उस योद्धा का कटा हुआ अंगूठा हैं
जिसे एक कपटी गुरुता ने काट लिया था
और फिर लगातार कटते रहे अंगूठे
कटते रहे सर
कटती रहीं बांहे
कटती रही उंगलियां
देखो आक्षितिज बिखरे हैं कटे हुए अंगूठे|
देखो उन कटे हुए अंगूठों के निशान ले रही है मंत्रिपरिषद
देखो उन कटे हुए अंगूठों की माला पहन रहे हैं महामात्य
हम सब कटुए हैं, अभिजात्यों!
हम सब कटुए हैं और बहुमत में हैं
हम खड़े हैं इतिहास के राजपथों पर
अपनी कटी हुई पहचान हथेलियों पर सजाए
आप इस देश को छोड़ें सम्राट
अपने नवनीत वदन और संपूर्ण कलेवर के साथ
ये देश हमारा है
ये आर्यावर्त कटुओं का है
हमनी सब कटुआ हईं
हमनी सब केहू कटुआ हईं जां, मंत्री जी
आपन काटल मूड़ी
काटल बांह
काटल गोड़
आ नोचल-चोंथल आत्मा लिहले
हमनी बउआतानी
हमनी लचरल कबंध...
हमनी सब केहू कटुए हईं जां, ए राजा जी!
हमनी ओह महतारी के हतल मूड़ी हईं
जौना के गरबे आन्हर बाप के कटला से
भड़इत परसु धड़ से बिलगा दहलें
हमनी आधा धड़ से
माई के हतल मूड़ी के ओधी
माटी में बोअतानी...
हमनी सब कटुआ हईं, हे राजपुरुख!
हमनी ओ तापस कुमार के भुइंया लोढ़नियात सीस हईं
जेकरा के खांखर मान से निकालल
आ जात-धरम के बीख सानल तरवारि से
हतल गइल रहे...
जेकरा के केहू ना सुनल
आ जेकर ठट्ठा बोलता हमनी के संस्कृति के खोह में
हमनी ऊ काटल सीस हईं...
हमनी सब केहू कटुआ हईं हो राजा, हे दंडाधिकारी!
हमनी कई सौ साल से
लोहू बहत नाक हईं ओ लइकी के
जेकरा पुरुख के गरब
राजपुरुख के दरप काट दहलस
हमनी के नकटा सभ्यता ओह लइकी के लोहू में
नहाता, आ डूब-डूब के आपन
भगवान खोजता
हमनी सब केहू कटुए हईं, ए चक्रवर्ती!
हमनी ऊ लड़ाका के काटल अंगूठा हईं
जेकरा के एगो धूर महंथई कटले रहे
और फेर एकसुरे कटत रहल अंगूठा
कटत रहल मूंड़ी
कटत रहल बांह
कटत रहल अंगूरी
देखा, भू से घट्टा ले छिटाइल बा काटल अंगूठा
देखा इहे काटल अंगूठा के निसान लेवता मंत्रीपरिषद
देखा उहे काटल अंगूरी के माला पहिनतारन महामंत्री
हमनी सब कटुआ हईं हो, बड़का लोग!
हमनी सब कटुआ हईं आ बहुमत में बानी
हमनी खड़ियाइल बानी इतिहास के राजपथ पर
आपन काटल पहिचान गोदौरी प सजा के
रउआ ई देस के छोड़ी सम्राट
आपन नैनू मुंह आ पूरा कलेवर के साथे
ई देस हमनी के ह
ई आर्यावर्त कटुवन के ह