कहाँ नंदागे वो गली-खोर, वो बोली-ठोली
किताबके पहिली, रोजमर्रा के आवाज मंबसे हमर महतारी भाखाजेन ह आज बनेचकन सुने बर मिलथे. अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के मऊकामं पारीभाषा तउन बोली मनला सुरता करत हवय जेनह आस-पास केचुप्पी ला टोरत, भाखाअऊ मइनखे मन के संगहमर रिस्ता ला जोड़ केराखिस
21 फ़रवरी, 2023 | पारीभाषा टीम















