हमार नाम के. मुकेस ह. हम वेल्लूर जिला के सरकारी इस्कूल में क्लास 11 में पढेनी. फोटोग्राफी हमार मन के बिसय ह. कैमरा कईसे चलावल जाय औरी कवन चीज पर फिलिम (डाक्युमेंटरी) बनावल जाय इ सीखेनी. हमार 52 बरीस के बाबूजी पत्थर के खान में पत्थर खोदे के काम करेलन. हम उनकरा तरे मेहनत करत लोग प फिलिम करेनी. ओ सब के काम में मस्किल के ऊपर फिलिम करेनी.
जब हमार बाबूजी काम प बहरा जालन तब हमार माई के. मोगेश घर देखेली. उ हमार औरी हमार 12 साल के बहीन दर्शिका के देखभाल करेली. हमनी 15 दिन प एक बेर अपना बाबूजी से भेंट करेनी. जब ऊ एक चाहे दू दिन खतिरा घरे आवेलन, अक्सरहां उ बहुत हारल-थाकल रहेलन. ईहे एगो अइसन बेरा होला जब हम उनका साथे रह पावेनी.
जब ऊ घरे रहेलन तब हम उनका काम के बारे में बहुत सवाल पूछेनी. उ बहुत धीरज से ओ सब के जबाब देलन. तब्बो हम उनकर कार करे के तरीका के ना बूझ पायीं. एक दिन हमार फोटोग्राफी क्लास के मास्टर श्रीपति के हिम्मत देला से उनका काम के जघ़े जाए के सोचनी. हमरा साथे हमार कैमरा रहे.
हम ऊहे लिखनी जवन देखनी- हमरा बाबूजी के कथा बहुत कम सब्द औरी ढेर फोटो के साथे.























