मालगांव के बंजर पठार पर बसल दरगाह गांव के लोग खातिर मेलजोल के एगो ठांव बा. महाराष्ट्र के सतारा जिला में स्थित ई दरगाह इहंवा सदियन से मौजूद बा आउर कइएक मौका पर गांव के लोग खातिर असरा बनल.

स्कूल के लरिकन सभ दरगाह पर लागल गाछ के छाह में बइठ के होमवर्क कर रहल बा. गेट लगे मौजूद नयका उमिर के लइका आउर लइकी लोग प्रतियोगी सिविल सेवा परीक्षा के तइयारी कर रहल बा. चिलचिलात गरमी में भी इहंवा ठंडा हवा बहत रहेला. पुलिस भरती के तइयारी करे वाला जवान लोग इहंई आके खुलल मैदान में कसरत आउर अभ्यास करेला.

“हमार दादा एकरा (दरगाह) बारे में कइएक कहानी कहेलन,” विनायक जाधव कहलन. 76 बरिस के ई किसान गांव के 15 एकड़ में खेती करेलन. “सोचीं ई केतना पुरान होई. हिंदू आ मुसलमान दुनो लोग मिलके एकर देखभाल करत आइल बा. दरगाह हिंदू-मुस्लिम मेल-मिलाप के पहचान रहल बा.”

बाकिर सितंबर 2023 में माहौल अचके बदल गइल. मालगांव में एह नामी दरगाह के पहचान बदले के कोसिस कइल गइल. गांव के नयका उमिर के लइका लोग के छोट, बाकिर उत्पाती गुट दावा कइलक कि ई अतिक्रमण बा. ई सभ हिंदुवादी गुट के उकसावा के नतीजा रहे.

मालगांव के 20 से 25 बरिस के हिंदू लइका लोग जिला प्रशासन के चिट्ठी लिख के एह ‘अवैध अतिक्रमण’ के गिरावे के मांग कइलक. ओह में से कुछ हिंदू नौजवान लोग दरगाह के बगल में बनल पानी टंकी में पहिलहीं तोड़फोड़ कइले रहे. चिट्ठी में लिखल रहे, “एकरा लगे के जमीन पर मुस्लिम लोग के नजर बा. ई दरगाह ग्राम पंचायत के इच्छा के खिलाफ बनावल गइल बा.”

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विनायक जाधव ( गांधी टोपी पहिनले) आपन संगी-साथी संगे मालगांव के दरगाह पर. दरगाह महाराष्ट्र के सतारा जिला में सदियन से मौजूद बा

वइसे, जइसहीं दरगाह के बुलडोजर से ढाहे के मांग उठल, गांव के लोग बिरोध कइलक. जाधव हाथ में धइल पुरान कागज देखावत कहे लगले, “साल 1918 के नक्शा में भी दरगाह के जिकिर बा. गांव में आजादी के पहिले के बनल कइएक धारमिक स्थल बा. हमनी सभे के बचावे चाहत बानी. चाहत बानी कि बच्चा लोग संगे-संगे खुसी से रहे.”

ऊ इहो कहलन, “धरम-धरम मधे बंधन लौं आपन पुढ़े नाहीं, मागे जनार (धरम के नाम पर लड़म, त केहू के तरक्की ना होई.)”

हिंदुत्व गुट ओरी से दरगाह के ढाहे के मांग के बाद, दुनो समुदाय के अनुभवी आउर बुजुर्ग लोग मालगांव में संगे आइल आउर एकरा खिलाफ एगो पत्र जारी कइलक. एह में साफ-साफ लिखल रहे कि दरगाह तुड़े के बात से गांव के बहुसंख्यक लोग सहमत नइखे. एकरा पर 200 मुसलमान आउर हिंदू लोग हस्ताक्षर कइलक. फिलहाल, ऊ लोग दरगाह बचावे में कामयाब रहल.

गांव में बहुत मुस्किल से अरजल शांति बना के रखल आज सबले बड़ चुनौती बन गइल बा.

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मालगांव अइसन मिसाल पेस कइलक, जे आजकल देखे के ना मिले. इहंवा के लोग समाज के बांटे वाला के खिलाफ ठाड़ भइल आउर मुस्लिम समुदाय के धारमिक बिरासत बचावे के दुर्लभ उदाहरण पेस कइलक.

पछिला डेढ़ बरिस से महाराष्ट्र में मुसलमान लोग के इबादत गाह सभ पर हमला तेज भइल बा. एह सभ में अक्सरहा अपराधी लोग साफ बच गइल. एकर बड़ कारण पुलिस के लापरवाही आउर बहुसंख्यक समुदाय के चुप्पी रहल.

साल 2019 में भइल चुनाव के आज ढाई बरिस बाद भारत के सबले संपन्न राज्य में तीन राजनीतिक दल- शिव सेना, कांग्रेस आउर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी गठबंधन के सरकार रहल. उद्धव ठाकरे एकर मुख्यमंत्री रहलन.

अइसे जुलाई 2022 में महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन भइल. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शिवसेना के 40 बिधायक के तुड़ के गठबंधन के उखाड़के सरकार बनइलक. तबे से कट्टरपंथी हिंदू गुट सक्रिय हो गइल. ऊ लोग राज्य भर में दरजनों रैली कइलक. एह में मुसलमान लोग के बरबाद करे के संगे-संगे ओह लोग के आर्थिक रूप से बहिष्कार के बात बेर-बेर कहल गइल. राज्य में माहौल खराब करे के ई ठोस प्रयास रहे. मुसलमान लोग के इबादत स्थल पर हमला एकरे हिस्सा रहल.

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बावां : स्कूल के बच्चा लोग दरगाह के गाछ के छाह बइठ के पढ़ाई कर रहल बा. नयका उमिर के लइका आ लइकी लोग प्रतियोगी सिविल सेवा परीक्षा के तइयारी कर रहल बा. दहिना : जाधव आपन स्कूटी से दरगाह जा रहल बाड़न. उनकर कहनाम बा, गांव में अइसन बहुते धारमिक स्थल बा जे आजादी से पहिले से बा. हमनी एह सभे के बचा के रखे के चाहत बानी

सतारा के रहे वाला एगो समाजिक कार्यकर्ता मिनाज सैय्यद के कहनाम बा कि बरसन से ध्रुवीकरण के राजनीति कइल जात रहल. बाकिर साल 2022 के बाद एकरा में बहुते तेजी आइल. “दरगाह, चाहे मकबरा जेकरा हिंदू आ मुसलमान लोग मिलके सम्हारत आउर रख-रखाव करत आइल, ओह पर हमला हो रहल बा,” ऊ कहलन. “निशाना पर समधरम संस्कृति बा.”

फरवरी 2023 में, कट्टरपंथी हिंदू के एगो गुट कोल्हापुर के बिशालगढ़ शहर में हजरत पीर मलिक रेहान शाह के दरगाह पर रॉकेट से हमला कइलक. हमला पुलिस के मौजूदगी में भइल.

सितंबर 2023 में भाजपा के बिक्रम पावस्कर के अगुआई वाला एगो कट्टरपंथी गुट, हिंदू एकता के सदस्य लोग सतारा के पुसेसावली गांव के एगो मस्जिद पर जानलेवा हमला कइलक. एह हमला के पाछू ब्हाट्सऐप पर वायरल भइल अपुष्ट वीडियो के बदला मकसद रहे. मस्जिद के भीतर शांति से नमाज पढ़ रहल कोई 10 से 12 मुसलमान लोग पर टाइल्स, लाठी आउर लोहा के रॉड से हमला कइल गइल. एह में गंभीर चोट लागे से एक आदमी के जान भी चल गइल. पढ़ीं: धार्मिक नफरत के आंधी में उजड़ल एगो गांव

दिसंबर 2023 में सांप्रदायिक सद्भाव खातिर काम करे वाला समूह- सलोखा संपर्क गट एगो पुस्तिका छापलक. एह में सतारा के खाली एक जिला में मुसलमान लोग के पूजनीय स्थल पर भइल 13 हमला दरज कइल गइल रहे. हमला के मकसद कवनो कब्र के नष्ट करे से लेके मस्जिद पर भगवा झंडा फहरावे के रहे ताकि आपस में सांप्रदायिक बैर आउर गहिर हो जाव.

पुस्तिका के हिसाब से साल 2022 के सिरिफ एक बरिस में महाराष्ट्र में 8, 218 से जादे दंगा देखल गइल. एह में 9,500 नागरिक लोग प्रभावित भइल. एक साल में रोज के हिसाब से औसतन 23 दंगा के गिनती हैरत में डाले वाला बा.

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बावां: सलोखा संपर्क गट के छापल पुस्तिका में सतारा जइसन सिरिफ एक जिला में मुसलमान लोग के पूजनीय स्थल पर 13 बेर हमला दरज कइल गइल बा. पुस्तिका के हिसाब से साल 2022 के सिरिफ एक साल में दंगा के 8,218 से जादे मामला भइल जे में 9,500 से जादे नागरिक लोग प्रभावित भइल. दहिना: मालगांव के दरगाह जेकर देख-रेख हिंदू आउर मुसमलान दुनो समुदाय मिलके करेला

साल 2023 के जून के एगो भोर बा. 52 बरिस के शम्सुद्दीन सैयद सतारा जिला के कोंडवा गांव में मस्जिद ओरी बढ़लन, त उनकर करेजा धड़-धड़ करे लागल. उहंवा दरगाह पर करियर रंग से ‘जय श्री राम’ लिखल भगवा झंडा लहरात रहे. सैयद घबरा गइलन. तुरंत पुलिस के बोलावल गइल आउर स्थिति नियंत्रण में करे के कहल गइल. बाकिर पातर गली में ठाड़ पुलिस जब झंडा उतरत देखत रहे, ओकरा कानून ब्यवस्था पर आवे वाला संकट के आभास हो गइल रहे.

मस्जिद के ट्रस्टी सैयद बतइलन, “कुछ दिन पहिले एगो मुस्लिम लइका टीपू सुल्तान से जुड़ल पोस्ट अपलोड कइले रहे. हिंदुत्व गुट के 18वां सदी के मुसलमान शासक के महिमामंडन नीमन ना लागल. ऊ लोग बदला लेवे के ठनलक. एहि से ऊ लोग के नजर गांव के मस्जिद पर रहे.”

टीपू सुल्तान के स्टेटस डाले वाला 20 बरिस के सोहेल पठान तुरंत एकरा अपलोड करे खातिर अफसोस जाहिर कइलन: “हमरा अइसन ना करे के चाहत रहे. आपन इंस्टाग्राम स्टोरी से हम परिवार के खतरा में डाल देनी.”

पोस्ट डलला के कुछे घंटा भइल, कट्टरपंथी हिंदु गुट उनकर घरे आइल आउर उनका चांटा (थप्पड़) मारलक. सोहेल बतावत बाड़न, “हमनी एकरा बदला में कवनो कदम ना उठइनी. स्थिति आउर बिगड़े के डर रहे. बाकिर ई सिरिफ एगो पोस्ट रहे. ओह लोग के मुसलमान लोग के तंग करे के बस कवनो कारण चाहीं.”

जवन रात उनकरा चांटा मारल गइल, पुलिस बीच-बचाव करे आइल, आउर केस दरज भइल- सोहेल पर. उनकरा थाना में रात बितावे के पड़ल. फिलहाल मामला जिला अदालत में चल रहल बा. उनकरा पर धरम के नाम पर तनाव फैलावे के आरोप बा. जे लोग उनकरा चांटा मारलक, ऊ लोग छुट्टा घूम रहल बा.

सोहेल के माई शहनाज, 46 बरिस, के कहनाम बा कि ऊ लोग के परिवार सतारा में पीढ़ियन से रह रहल बा. बाकिर कबो ओह लोग के एह तरह के बिबाद, चाहे सोशल मीडिया पर एह तरह के निगरानी झेले के ना पड़ल. ऊ कहत बाड़ी, “हमार माई-बाऊजी आउर दादा-दादी लोग बिभाजन के बाद भारत में रहे के तय कइले रहे. काहेकि हमनी के धरमनिरपेक्ष संबिधान में बिस्वास रहे. ई हमार जमीन बा, हमार गांव बा, हमार घर बा. बाकिर तबो जब लइका लोग काम खातिर बाहिर जाला, हमरा डर लागेला.”

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सतारा के कोंडवा गांव के रहे वाला सोहेल पठान आपन सोशल मीडिया अकाउंट पर टीपू सुल्तान के बारे में एगो पोस्ट डालले रहस. एकरा बाद उनकर गांव के मस्जिद में तोड़-फोड़ कइल गइल आउर घर में उनकरा पर हमला भइल

सोहेल गराज में काम करेलन आउर उनकर भाई, 24 बरिस के आफताब वेल्डर बाडन. परिवार में उहे दू लोग कमावे वाला बा. ओह लोग के महीना के 15,000 रुपइया के कमाई से घर के खरचा चलेला. सोहल के खिलाफ मामला में जमानत आउर बकील के फीस में उनकर दू महीना के पगार स्वाहा हो गइल. शहनाज आपन छोट झोंपड़ी देखावत कहत बाड़ी, “रउआ देख सकत बानी, हमनी कइसे रहत बानी.” आफताब के वेल्डिंग मसीन एहि एक कमरा के घर में पेंट उखड़ रहल देवाल से सटल रखल बा. “कोरट-कचहरी के चक्कर लगावे के हमनी के औकात नइखे. एके गो बात नीमन बा कि गांव के शांति समिति आगू आके मामला ठंडा कइलक.”

कोंडवे में शांति समिति के वरिष्ठ सदस्य आउर 71 बरिस के किसान मधुकर निंबालकर के कहनाम बा कि साल 2014 में बने के बाद से ई पहिल बेर बा जब समिति के बीच-बचाव करे के पड़ल. ऊ कहले, “हमनी मस्जिद में मीटिंग कइनी जहंवा भगवा झंडा फहरावल गइल रहे. दुनो समुदाय के लोग बात ना बढ़ावे के संकल्प लेलक.”

निंबालकर के कहनाम बा कि मीटिंग एगो खास कारण से मस्जिद में कइल गइल रहे. ऊ बतावत बाड़न, “एकरा सोझे के खुलल जमीन लंबा समय से हिंदू लोग बियाह-सादी में करत आइल बा. हमनी के उद्देश्य लोग के याद दिलावे के रहे कि एतना बरिस से हमनी कइसे मिलजुल के रह रहल बानी.”

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अयोध्या में 22 जनवरी, 2024 के रामलला मंदिर के उद्घाटन भइल. नवंबर 2019 में जारी सुप्रीम कोर्ट के सर्वसम्मत फैसला में अयोध्या में बिबादित जमीन के मंदिर बनावे खातिर दे देहल गइल रहे. मंदिर चार दसक पहिले बिस्व हिंदू परिषद के अगुआई वाला कट्टरपंथी हिंदू गुट के हाथों तुड़ल गइल बाबरी मस्जिद के जगह पर बनावल गइल बा.

ओहि घरिया के बाद बाबरी मस्जिद के बिध्वंस भारत में ध्रुवीकरण के नारा बन गइल.

अइसे त सुप्रीम कोर्ट बाबरी मस्जिद के गिरावे के कार्रवाई के असंवैधानिक घोषित कइलक. बाकिर मंदिर खातिर जगह देवे के फैसला से अइसन करे वाला अपराधी लोग के मन बढ़ गइल. एह फैसला से कट्टरपंथी समूह के मीडिया के नजर से दूर, छोट गांवन में मुसलमान के पूजा स्थल पर हमला करे के बढ़ावा मिल गइल.

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नसीम चाचा 2023 में भीड़ के हमला में घायल भइल आपन लइका के फोटो लेले बाड़न. वर्धनगढ़ में कइएक धरम के लोग बरसन से संगे मिलजुल के रहत आइल बा, जहंवा नसीम आपन परिवार संगे रहेलन

मिनाज सैयद के कहनाम बा कि 1947 में आजादी मिलल, त पूजा स्थल के यथास्थिति के सभे समुदाय स्वीकार कर लेले रहे. ऊ कहलन, “बाकिर सुप्रीम कोर्ट के ओह फैसला से स्थिति पूरा तरीका से बदल गइल. बात बाबरी मस्जिदे तक ना रुकल. अब त हिंदू गुट दोसर मस्जिद सभ के भी निसाना बनावत बा.”

सतारा के वर्धनगढ़ के रहे वाला 69 बरिस के हसन शिकलगर के गांव, जिला आउर राज्य जहंवा अशांति ओरी बढ़त देखाई देत बा, उहंई उनका एगो साफ पीढ़ीगत बिभाजनो देखाई देत बा. उनकर कहनाम बा, “नयका पीढ़ी के पूरा तरीका से ब्रेनवॉश कर देवल गइल बा. हमार उमिर के लोग के पुरान दिन के कमी महसूस होखेला. हम बाबरी मस्जिद गिरावल जाए के बाद के ध्रुवीकरण देखले बानी. बाकिर तबो ओतना कुछ ना भइल जेतना आज हमनी के इलाका में तनाव बा. हम 1992 में गांव के सरपंच बनल रहीं. आज हमरा लागेला हम दोयम दरजा के नागरिक बानी.”

शिकलगर अइसन एह से कहत बाड़न काहेकि उनकर गांव बरसन से बहुसंस्कृति खातिर जानल जात रहल. समूचा महाराष्ट्र से श्रद्धालु लोग वर्धनगढ़ के तलहटी में बसल एह गांव के तीर्थ स्थल पर जुटत रहे. एह गांव में एगो घना जंगल वाला पहाड़ी बा. इहंवा पांच ठो कब्र आउर एगो मंदिर एक-दोसरा के ठीक बगल में बनल बा. इहंवा हिंदू-मुसलमान लोग संगे मिलके आपन-आपन देवता के प्रार्थना करेला. दुनो समुदाय के लोग मिल के एह जगह के रखरखाव कइलक. ई काम जुलाई 2023 तक भइल.

जून 2023 में गांव के “अज्ञात लोग” पीर दा-उल मलिक के कब्र तुड़ देलक, जहंवा मुसलमान लोग नियम से नमाज अदा करत रहे. अगिला महीना, बन बिभाग एकरा अबैध बता के समाधि स्थल के पूरा तरह से जमींदोज कर देलक. मुसलमान लोग के अचरज लागेला कि पांच में से इहे दरगाह अकेले कइसे अबैध हो गइल.

PHOTO • Courtesy: Residents of Vardhangad

वर्धनगढ़ के मंदिर जेकरा बाद में अनजान लोग आउर बन बिभाग तुड़ देलक. इहंवा के मुसलमान लोग हैरान बा कि उनकरे इबादत गाह पर हमला काहे कइल गइल

वर्धनगढ़ के रहे वाला आउर एगो स्टूडेंट 21 बरिस के मोहम्मद के कहनाम बा, “ई सभ गांव के मुसलमान लोग के भड़कावे खातिर कइल गइल रहे. हमरो उहे घरिया सोशल मीडिया के एगो पोस्ट पर निसाना बनावल गइल रहे.”

कुछे घंटा के दूरी पर पुणे में रहे वाला साद के चचेरा भाई इंस्ट्राग्राम पर एगो पोस्ट कइलन. ई 17वां सदी के शासक औरंगजेब के बारे में रहे. पोस्ट से आहत होके हिंदुत्व गुट के लोग उहे रात साद के घरे पहुंचल आउर उनकरा बाहिर ले आइल. उनकरा ‘औरंगजेब के औलाद” कह के लोहा के रॉड आउर हॉकी स्टिक से पीटे लागल.

“रात जादे हो गइल रहे. ओह दिनवा हमार जान जा सकत रहे. भाग नीमन रहे उहे घरिया पुलिस के गाड़ी उहंवा से गुजरल. भीड़ गाड़ी देख के भाग गइल,” साद इयाद करत बाड़न.

साद के अगिला 15 दिन अस्पताल में रहे के पड़ल. उनकरा माथा पर चोट लागल रहे, गोड़ आउर चेहरा के हड्डी टूट गइल रहे. कइएक दिन ले उनकरा खून के उल्टी होखत रहल. आजो ऊ अपने से कहीं जा-आ ना सकेलन. ऊ मानेलन, “हमरा पर फेरु से हमला हो सकत बा. हम आपन पढ़ाई पर ध्यान नइखी दे पावत.”

साद फिलहाल बीसीएस (बैचलर ऑफ कंप्यूटर साइंस) कर रहल बाड़न. ऊ एगो होनहार छात्र बाड़न. 12वां में उनकरा 93 प्रतिशत आइल रहे. बाकिर पछिला कुछ महीना में उनकर नंबर कम हो गइल. ऊ बतइलन, “अस्पताल में भरती होखे के तीन दिन बाद हमार चाचा दिल के दौरा पड़े से मर गइलन. ऊ 75 के रहस बाकिर तंदुरुस्त रहस. उनकरा दिल के कवनो परेसानी कबो ना रहल. साफ बा कि हमरा पर भइल हमला से ऊ परेसान रहस. हम ऊ सभ कबो भूल ना सकीं.”

एह घटना के बाद मुसलमान लोग अपना में रहे लागल, हिंदू लोग से मिलल बंद कर देलक. गांव के सूरत बदल गइल. पुरान दोस्ती टूट गइल, रिस्ता खत्म हो गइल.

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बावां: वर्धनगढ़ के रहेवाला आउर छात्र मोहम्मद साद के कहनाम बा ‘ई सभ गांव के मुसलमान लोग के भड़कावे के मकसद से कइल गइल रहे’ दहिना: वर्धनगढ़ के दरजी हुसैन सिकलगर कहले, ‘हम जिनगी भर गांव के लोग के कपड़ा सियनी. पछिला कुछ बरिस से हमार हिंदू ग्राहक लोग कम हो गइल बा. मालूम ना ई द्वेष के चलते भइल कि दबाव चलते’

शिकलगर के कहनाम बा कि बात सिरिफ एह दू घटना के नइखे. अब त रोजमर्रा के चीज में अलगाव साफ नजर आवेला.

ऊ कहलन, “हम दरजी बानी. पूरा जिनगी गांव के लोग के कपड़ा सियनी. बाकिर पछिला कुछ बरिस से हमार हिंदू ग्राहक लोग कम हो गइल. हमरा पता ना अइसन द्वेष चलते भइल कि साथी लोग के दबाव चलते.”

ऊ कहेलन कि अब भाषा भी बदल गइल बा. “याद नइखे कि हम लंड्या शब्द कबो सुनले होखम,” ऊ मुसलमान लोग खातिर गाली के रूप में बोलल जाए वाला एगो शब्द के जिकिर करत बाड़न. “आजकल त हमनी के ई बहुते सुनाई देवेला. हिंदू मुस्लिम लोग एक दोसरा से नजर मिलावल बंद कर देले बा.”

वर्धनगढ़ कवनो अपवाद नइखे. पस्चिमी महाराष्ट्र में अब ई आम बात हो गइल बा. सतारा इहंई पड़ेला. इहंवा गांव धरम के आधार पर बंट गइल बा. तीज-त्योहार के रंग-रूप बदल गइल, बियाह के रिवाज सभ पहिले जइसन नइखे रहल.

शिकलगर के कहनाम बा कि वर्धनगढ़ में होखे वाला हिंदू गणेषोत्सव के तइयारी में ऊ हरमेसा आगू रहत रहस. उहंई गांव के कइएक लोग सूफी संत मोहिनुद्दीन चिश्ती के बरसी के उपलक्ष में मने वाला सलाना उर्स उत्सव में बढ़-चढ़ के हिस्सा लेवत रहे. ऊ मेहराइल आवाज में कहत बाड़न, “ऊ सभ खत्म हो गइल. एगो समय रहे रामनवमी के जुलूस जब मस्जिद से गुजरत रहे तो बाजा बंद कर देवल जात रहे. अब हमनी के परेसान करे खातिर बाजा आउर जोर से बजावल जाला.”

एकरा बावजूद दुनो समुदाय के जरूरी तबका मानेला कि बात जादे नइखे बिगड़ल. ऊ लोग के कहनाम बा कि धरम के बीच दरार पैदा करे वाला समूह गांव के बहुसंख्य लोग के राय साझा ना करे. “ऊ लोग के आवाज ऊंच हो गइल बा, ओह लोग के पीठ पर सरकार के हाथ बा. एहि से लागेला कि ऊ लोग बहुते बीर बा,” मालगांव के जाधव कहले. “जादे करके लोग शांति से जिनगी जिए के चाहेला, एहि से हिंदू लोग कुछो बोले से डेराला. एकरा बदले के जरूरत बा.”

जाधव मानेलन कि मालगांव जवन नक्से-कदम पर चलत बा, ऊ पूरा महाराष्ट्र खातिर ना होखे, बाकिर सतारा खातिर एगो उदाहरण हो सकत बा. ऊ जोर देकर कहलन, “दरगाह खातिर जइसहीं हिंदू लोग आगू आइल, कट्टरपंथी समूह पाछू हट गइल. धरम सभ के बहुलता बचा के रखे के जिम्मेदारी मुसलमान लोग पर ना, हमनी पर बा. हमनी के चुप्पी से असामाजिक तत्व के बढ़ावा मिलेला.”

अनुवाद: स्वर्ण कांता

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پارتھ ایم این ۲۰۱۷ کے پاری فیلو اور ایک آزاد صحافی ہیں جو مختلف نیوز ویب سائٹس کے لیے رپورٹنگ کرتے ہیں۔ انہیں کرکٹ اور سفر کرنا پسند ہے۔

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پریتی ڈیوڈ، پاری کی ایگزیکٹو ایڈیٹر ہیں۔ وہ جنگلات، آدیواسیوں اور معاش جیسے موضوعات پر لکھتی ہیں۔ پریتی، پاری کے ’ایجوکیشن‘ والے حصہ کی سربراہ بھی ہیں اور دیہی علاقوں کے مسائل کو کلاس روم اور نصاب تک پہنچانے کے لیے اسکولوں اور کالجوں کے ساتھ مل کر کام کرتی ہیں۔

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سورن کانتا ایک صحافی، ایڈیٹر، ٹیک بلاگر، کنٹینٹ رائٹر، ماہر لسانیات اور کارکن ہیں۔

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