उत्तरी कोलकाता के कुमारटुलि के संकेल्ला गली मन मं, जऊन ह ठेला गाड़ी जाय बर घलो मुस्किल ले चाकर हवय, तुमन ला अक्सर कुम्हारेच मन मिलहीं –जेन मन शहर के मूर्ति बनेइय्या आंय. इहिंचे ले हरेक बछर देवी दुर्गा अऊ दीगर देंवता मन के मूर्ति कोलकाता मं आथे.
कार्तिक पाल के इहींचे एक ठन वर्कशाप हवय, जेन ह असल मं बांस अऊ तिरपाल ले बने ओधा आय, जेकर नांव 'ब्रजेश्वर एंड संस' (ओकर ददा के नांव मं) हवय. वो ह हमन ला मूर्ति बनाय के लंबा अऊ एक के बाद एक काम ला बताथे. मूर्ति बनाय के कतको काम के बखत गंगा माटी (नदिया पार के माटी) अऊ पाट माटी (जूट के कुट्टी अऊ गंगा माटी ला मेंझारे) जइसने माटी के कतको किसम ले मिलाय के बाद बऊरे जाथे.










