जैसे ही आसमान में अंधेरा घिरता है, ओम शक्ति देवी का रंगीन लाइटों से सजा बड़ा सा कट-आउट जीवंत हो उठता है. बंगलामेडु के इरुलर लोग देवी के लिए सालाना तीमिति तिरुविला या फ़ायर-वॉक (अंगारों पर चलने का) उत्सव मना रहे हैं. (ओम शक्ति एक हिंदू देवी हैं.)
दोपहर भर जलने वाली लकड़ी के टुकड़े अंगारे बनने लगते हैं, और स्वयंसेवी इन्हें चमकीले फूलों के बिस्तर की तरह एक पतली सी परत में फैला देते हैं, ताकि इरुलर तीमिति को 'पू-मिति' या फूलों पर चलने की तरह देखें.
उत्साह और उत्तेजना का माहौल है. पड़ोस के गांवों के सैकड़ों लोग इरुलरों को आग पर चलता देखने और ओम शक्ति में अपना विश्वास जताने के लिए इकट्ठा हुए हैं. ओम शक्ति एक गैर-इरुलर देवी है, जिसके मानने वाले पूरे तमिलनाडु में मौजूद हैं और जिसे क्षमता और शक्ति की अभिव्यक्ति के रूप में पूजा जाता है.
इरुलर (जिन्हें इरुला भी कहते हैं) समुदाय तमिलनाडु में अनुसूचित जनजाति के रूप में दर्ज है. वे परंपरागत रूप से कन्निअम्मा देवी की पूजा करते थे, जिसे वे सात कुंवारी देवियों में से एक मानते हैं. हर इरुलर के घर में एक कलसम या मिट्टी का बर्तन देवी के प्रतीक की तरह रहता है, जिसे नीम के पत्तों के ढेर पर रखा जाता है.
























