माई बहुते धारमिक बाड़ी. उनकर आपन पारंपरिक देवी-देवता से जादे जेदासामी आ अय्यप्पन में बिस्वास बा. हफ्ता में एक बेरा ऊ घर के कोना-कोना रगड़ के साफ करेली, फेरु जेदासामी मंदिर जाएली. उहंवा के देवी-देवता से आपन मन के बात, दुख बांटेली.
हम माई के अपना खातिर एगो लुगो कीनत नइखी देखले. उनका लगे जेतना भी गिनल-गुथल साड़ी बा, कुल आठ ठो होई, ऊ सभ या त हमार चाची देले बाड़ी, चाहे बड़की दीदी. ऊ एकरे बदल-बदल के पहिनत रहेली. एह बात से ना त उनका कवनो शिकायत रहेला, ना ऊ केहू से जादे अपेक्षा रखेली.
गांव में पहिले लोग हमनी के परिवार में रोज झगड़ा होखे के चरचा करत रहे. ऊ दिन बा आउर आज के दिन बा. संघर्ष से हमनी भाई-बहिन के आउर मजबूत होके निकलला पर लोग अचरज करेला. गांव के लोग माई के बड़ाई करेला. कहेला ऊ हमनी के कवनो कमी महसूस ना होके देली आउर अपना दम पर हमनी के पाल-पोस के काबिल बनइली.
पाछू मुड़ के देखिला त बुझाला कि जब हम अपना के ना भेजे देवे के मिन्नत करत रहीं, त ऊ काहे हमरा जबरदस्ती स्कूल भेज देत रहस. आज सोचिला त लागेला कि अच्छा भइल हम श्री शांति विजिया हाईस्कूल पढ़े गइनी. इहंई हमरा अंगरेजी सीखे के मिलल. माई जदि कड़ा ना होखती आउर हम ओह स्कूल ना जइतीं त हमार ऊंच पढ़ाई के सपना अधूरा रह जाइत. हमरा ना लागे हम माई के कइल काम के बदला चुका पाएम, हम त पूरा जिनगी उनकर करजदारे रहम.
रोज पूरा दिन खटला के बाद जब सांझ में माई गोड़ सीधा करके तनी सुस्ताए लागेली, त हम उनकर गोड़ के देखिला. ई उहे गोड़ बा जे आपन बच्चा सभ के जिनगी आ भविष्य बनावे खातिर हर हाल में चलत रहल. केतना बेरा उनका घंटों पानी में ठाड़ रहे के पड़ल, अक्सरहा. तबो उनकर गोड़ कवनो सूखल, दरार से भरल धरती लागेला. माई के गोड़ के इहे दरार हमनी के जिनगी के अभाव भरलक, हमनी के संवरलक.