ये सभी महिलाएं कृष्णाजी भरीत की रीढ़ हैं. वे हर दिन तीन क्विंटल बैंगन को पकाकर बैंगन भरीत बनाती हैं, जिसे देश के दूसरे हिस्सों में बैंगन का भरता के नाम से जाना जाता है. जलगांव ज़िला प्रशासन द्वारा इस व्यस्त रेस्तरां में चुनाव जागरूकता अभियान का वीडियो शूट होने के बाद, रेस्तरां में काम करने वाले लोगों की आम जनता के बीच एक पहचान बन गई है.
बीते 13 मई को जलगांव संसदीय क्षेत्र में, महिलाओं के मतदान प्रतिशत में सुधार लाने के उद्देश्य से बनाए गए वीडियो में, कृष्णाजी भरीत की महिलाओं को नागरिक अधिकारों के बारे में बात करते, और उन्होंने उस दिन अपने मत के इस्तेमाल करने की प्रक्रिया के बारे में क्या जाना - इस बारे में बात करते देखा गया.
मीराबाई नारल कोंडे, जिनका परिवार एक छोटा सा सैलून चलाता है, कहती हैं, "मैंने ज़िला कलेक्टर से यह सीखा कि जिस पल हम वोटिंग मशीन के सामने खड़े होते हैं, हमारी उंगलियों पर स्याही लगी होती है, उस समय हम वास्तव में स्वतंत्र होते हैं." रेस्तरां से मिलने वाला उनका वेतन, उनकी आय का एक ज़रूरी हिस्सा है. "हम अपने पति, माता-पिता, बॉस या नेता के किसी दबाव के बिना, अपनी पसंद की सरकार चुनने के लिए स्वतंत्र हैं."
हर साल अक्टूबर से फरवरी तक कृष्णाजी भरीत में खाने का ऑर्डर बढ़ जाता है. इस समय रसोई में बैंगन के भरीत का उत्पादन बढ़कर 500 किलो तक हो जाता है. इस समय स्थानीय बाज़ारों में, सर्दियों में होने वाला सबसे अच्छा बैंगन बहुत ज़्यादा मात्रा में उपलब्ध होता है. महिलाओं बताती हैं कि यहां की ताज़ा पिसी हुई और तली हुई मिर्च, धनिया, भुनी हुई मूंगफली, लहसुन और नारियल का मिश्रण लोगों को खूब पसंद आता है. दूसरा, सस्ता होने के चलते भी लोग आते हैं. यहां सिर्फ़ 300 रूपए में एक किलो भरीत और खाने की दूसरी चीज़ें आसानी से मिल जाती हैं.
क़रीब 10 x 15 फीट की रसोई में चार स्टोव वाली एक भट्ठी जब जलती है, तो दाल फ्राई, पनीर-मटर और अन्य शाकाहारी चीज़ों के साथ कुल 34 व्यंजन पकते हैं. हालांकि, इन सबमें सबसे ज़्यादा मशहूर यहां का भरीत और शेव भाजी है. शेव भाजी बेसन से बनी और तेल में अच्छी तरह तली रहती है.