खेत मं किंदरत धन तरिया मं तइरत, तिरछी अंजोर अऊ अकास मं बदलत रंग ला देखत, हरेक नजारा के अवाज ला सुने सेती कान ला भूंइय्या डहर धरे... अऊ लोगन मन ला सुने जब वो मन अपन जिनगी अऊ मया के बारे मं गोठियाथें. वो मन के सुख दुख ला सुने, ओकर मन ऊपर मया-दया रखे अऊ ये सब्बो ला करत कुछेक नजारा ला कैद करके लोगन मन के आगू रखे एक अलग किसम के गम होथे.
ये छै फोटो निबंध तुमन ला गाँव, शहर अऊ नान नान शहर के लोगन मन के हिरदे तक ले जाही. ये चित्र मं तुमन ला पश्चिम बंगाल के नंदाय कला अऊ सिरोय के नाम नई लेवेइय्या भूख, हिमाचल प्रदेश के अजीब जिज्ञासा अऊ विरोध, तमिलनाडु मं कोनहा मं परे समाज के अपन अनुभव ला अपन हाथ ले लिखत पाहू अऊ कर्नाटक के समंदर तीर के लोगन मन ला नाचत पाहू. पिली वेशा कलाकार मन ला ढोल के थाप मं कलाबाजी दिखावत. ये लेख भारतीय समाज के विविधता, क्षेत्रीयता अऊ जीविका के बारे मं अनगिनत कहिनी कहिथें.
कैमरा एक ठन बड़े ताकत वाले अऊजार आय. ये ह अपन आप ला जाने के जरिया आय. येकर भाखा न सिरिफ अनियाव ला धरथे, फेर निदान के जरिया घलो बन जाथे.
हो सकत हे ये कहिनी मन ले छिन भर तुंहर धुकधुकी बंद हो जाय धन पोटा कांप जाय.




















