सूखा
रोज़ बरसता नैनों का जल
रोज़ उठा सरका देता हल
रूठ गए जब सूखे बादल
क्या जोते क्या बोवे पागल
सागर ताल बला से सूखे
हार न जीते प्यासे सूखे
दान दिया परसाद चढ़ाया
फिर काहे चौमासे सूखे
धूप ताप से बर गई धरती
अबके सूखे मर गई धरती
एक बाल ना एक कनूका
आग लगी परती की परती
भूखी आंखें मोटी मोटी
हाड़ से चिपकी सूखी बोटी
सूखी साखी उंगलियों में
सूखी चमड़ी सूखी रोटी
सूख गई है अमराई भी
सूख गई है अंगनाई भी
तीर सी लगती है छाती में
सूख गई है पुरवाई भी
गड्डे गिर्री डोरी सूखी
गगरी मटकी मोरी सूखी
पनघट पर क्या लेने जाए
इंतज़ार में गोरी सूखी
मावर लाली बिंदिया सूखी
धीरे धीरे निंदिया सूखी
आंचल में पलने वाली फिर
आशा चिंदिया चिंदिया सूखी
सूख चुके सब ज्वारों के तन
सूख चुके सब गायों के थन
काहे का घी कैसा मक्खन
सूख चुके सब हांडी बर्तन
फूलों के परखच्चे सूखे
पके नहीं फल कच्चे सूखे
जो बिरवान नहीं सूखे थे
सूखे अच्छे अच्छे सूखे
जातें, मेले, झांकी सूखी
दीवाली बैसाखी सूखी
चौथ मनी ना होली भीगी
चन्दन रोली राखी सूखी
बस कोयल की कूक न सूखी
घड़ी घड़ी की हूक न सूखी
सूखे चेहरे सूखे पंजर
लेकिन पेट की भूक न सूखी
सूखा
आंख से रोज लोर बहत बा
हाथ से हल छूट रहल बा
रुसल-फूसल जब सूखल बदरवा
का जोते का बोवे पगलवा
समुंदर ताल-तलइया सूखल
खेत-खलिहान आ मड़इया सूखल
दान देनी परसाद चढ़इनी
फेर काहे चौमासा सूखल
रउदा रउदा जर गइल धरती
सूख-सूख के मर गइल धरती
एक्को बाल ना एक्को दाना
आग लगल परती के परती
भूख से होठ सूख गइल
पेट पीठ सभ एक भइल
सूखल साखल अंगुरियन में
सूखल चमड़ी सूखल रोटी
देख सूख गइल अमराई
देख सून पड़ल अंगनाई
तीर जेका लागे छाती में
देख सूख गइल पुरवाई
गड्ढ़ा गिर्री डोरी टूटल
गगरी मटकी मोरी फूटल
पनघट पर का लेवे जाए
रस्ता ताकत गोरी सूखल
लाली उड़ल, टिकुली छूटल
धीरे-धीरे गोरी से निंदिया रूसल
अंचरा में बंधल जे आस रहे
देखत-देखत उहो टूटल
बइल के देह चूक गइल
गइयन के थन सूख गइल
कइसन घी, कइसन मक्खन
सूख गइल सब हांडी-बरतन
फूलन के परखच्चा सूखल
पाकल ना फल कच्चा सूखल
सूखल फूल के पंखुड़ी सभ,
हरियर पेड़ के पतई सभ
जातां, मेला, झांकी सूखल
दीवाली, बैसाखी छूटल
चौठ मनल ना होली भीगल
चंदन रोली राखी सूखल
बस कोयल के कूक ना छूटल
घड़ी-घड़ी के हूक ना छूटल
सूखल मुंहवा पंजरा सूखल
बाकिर पेट के भूख ना सूखल