यह स्टोरी वन्यजीव रक्षक और फ़ोटोग्राफ़र राधेश्याम बिश्नोई को समर्पित है.
जैसलमेर में हुई एक सड़क दुर्घटना में 23 मई, 2025 को राधेश्याम का निधन हो गया. वह देर रात शिकार की सूचना मिलने पर भादरिया माता ओरण (पवित्र उपवन) जा रहे थे, जो आईयूसीएन की रेड लिस्ट में शामिल चिंकारा (गज़ेला बेनेटी) का निवास स्थान रहा है. राधेश्याम के साथ वन विभाग के कर्मचारी भी थे, जिनकी इस दुर्घटना में मृत्यु हो गई.
राजस्थान के पोकरण तहसील के वाइल्डलाइफ़ फ़ोटोग्राफ़र और प्रकृतिप्रेमी राधेश्याम, गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड), चिंकारा और इलाक़े में पाए जाने वाले अन्य पक्षियों व जीव-जंतुओं के संरक्षण और शिकार-रोधी प्रयासों में बहुत गहराई और प्रतिबद्धता के साथ शामिल थे. जानकारी के लिए संपर्क करने वाले हर इंसान के साथ वह बड़ी उदारता के साथ अपना ज्ञान व तस्वीरें साझा करते थे. राधेश्याम 30 साल के थे और अपनी पत्नी, दो छोटे बच्चों और मां के साथ धोलिया गांव में रहते थे. उनकी मृत्यु ने अब एक शून्य पैदा कर दिया है, और वह अपने कार्यों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे.

















