उसका मुल्क एक ख़्वाब था. इस ख़्वाब को करोड़ों ने देखा था और उसके लिए अपनी जान दी थी. वह भी बीते कुछ सालों से एक ख़्वाब देखने लगा था. वह देखता कि कहीं से एक भीड़ आती और एक इंसान को ज़िंदा जला देती थी, और वह उन्हें रोक नहीं पाता था. इस बार उसे उजाड़ सा एक घर नज़र आया, जिसके बरामदे में भीड़ लगी थी. कुछ महिलाएं रो रही थीं, कुछ आदमी जड़ होकर खड़े थे. सफ़ेद कपड़ों से ढके दो शव रखे थे, और बगल में एक औरत बेहोश पड़ी थी. एक बच्ची की आंखें उसे एकटक देख रही थीं. उसे लगा कि उसे फ़ौरन इस ख़्वाब से बाहर आ जाना चाहिए. ख़्वाब से बाहर आकर उसने देखा कि जिस मुल्क में वह रहता है, श्मशान में तब्दील होता जा रहा है. अब मुश्किल ये थी कि इस ख़्वाब से बाहर आना मुमकिन न था.


Mumbai, Maharashtra
|TUE, MAR 21, 2023
मरघट में तब्दील होते एक मुल्क का ख़्वाब
विश्व कविता दिवस के मौक़े पर, एक कवि अपने मुल्क का ख़्वाब देखता है, और उस ख़्वाब में ख़ुद को क़ैद पाता है
Poem and Text
Painting
Editor
तो यह देश नहीं…
1.
एक हाथ उठा
एक नारा लगा
एक भीड़ चली
एक आदमी जला
एक क़ौम ने सिर्फ़ सहा
एक देश ने सिर्फ़ देखा
एक कवि ने सिर्फ़ कहा
कविता ने मृत्यु की कामना की
2.
किसी ने कहा,
मरे हुए इंसान की आंखें
उल्टी हो जाती हैं
कि न देख सको उसका वर्तमान
देखो अतीत
इंसान देश होता है क्या?
3.
दिन का सूरज एक गली के मुहाने पर डूब गया था
गली में घूमती फिर रही थी रात की परछाई
एक घर था, जिसके दरवाज़ों पर काई जमी थी
नाक बंद करके भी नहीं जाती थी
जलते बालों, नाखूनों और चमड़ी की बू
बच्ची को उसके पड़ोसियों ने बताया था
उसका अब्बा मर गया
उसकी मां बेहोश पड़ी थी
एक गाय बचाई गई थी
दो लोग जलाए गए थे
4.
अगर घरों को रौंदते फिरना
यहां का प्रावधान है
पीटकर मार डालना
यहां का विधान है
और, किसी को ज़िंदा जला देना
अब संविधान है
तो यह देश नहीं
श्मशान है
5.
रात की सुबह न आए तो हमें बोलना था
ज़ुल्म का ज़ोर बढ़ा जाए हमें बोलना था
क़ातिल
जब कपड़ों से पहचान रहा था
किसी का खाना सूंघ रहा था
चादर खींच रहा था
घर नाप रहा था
हमें बोलना था
उस बच्ची की आंखें, जो पत्थर हो गई हैं
कल जब क़ातिल
उन्हें कश्मीर का पत्थर बताएगा
और
फोड़ देगा
तब भी
कोई लिखेगा
हमें बोलना था
Want to republish this article? Please write to [email protected] with a cc to [email protected]
Donate to PARI
All donors will be entitled to tax exemptions under Section-80G of the Income Tax Act. Please double check your email address before submitting.
PARI - People's Archive of Rural India
ruralindiaonline.org
https://ruralindiaonline.org/articles/मरघट-में-तब्दील-होते-एक-मुल्क-का-ख़्वाब

