कनिका सराफ कहिथें, “2003 तक ले बाल-बिहाव ला खतम करे के लक्ष्य ह चुनोती वाला दिखथे. ये ला समझे सेती तुमन ला बस देश के कऊनो देहात इलाका मं नजर दौड़ाय के जरूरत हवय.” कनिका सराफ आंगन ट्रष्ट, बिहार के चाइल्ड सेफ्टी सिस्टम के मुखिया आंय, जऊन ह पूरा-पूरी लइका सुरच्छा ऊपर हवय. वो ह कहिथें, “फेर महामारी ह दिक्कत ला अऊ बढ़ा देय हवय. ये बखत, हमन सिरिफ पटना मंइच 200 बाल-बिहाव रुकवाय रहेन. तुमन बाकी जिला के अऊ उहाँ के गांव के अंदाजा लगाय सकत हो.”
नीति आयोग के मुताबिक, 2013-2015 के बखत के मंझा मं बिहार मं जनम के समे के लिंगानुपात हरेक हजार मरद पाछू 916 माईलोगन के रहिस. ये आंकड़ा 2005 के बनिस्बत सुधर के रूप मं देखे गे रहिस, तब ये आंकड़ा ह 909 रहिस. फेर येकर ले कऊनो आस नई बंधे,काबर 5 बछर के उमर होय के पहिलेच टूरा मन के बनिस्बत कहूं जियादा नोनी मन के मऊत हो जाय ले लिंगानुपात आगू अऊ खराब हो जाथे. राज मं 5 बछर ले कम उमर के लइका मन के मऊत दर (हरेक हजार जनम मं 5 बछर के उमर के पहिली मऊत के अंदेसा) 39 बाबू ऊपर 43 नोनी मन के हवय. संयुक्त राष्ट्र एजेंसी मन के अनुमान के अधार ले 2019 मं ये बाबत राष्ट्रीय आंकड़ा 34 बाबू ऊपर 35 नोनी मन के रहिस.
गंगा के मानना आय के पोता घर मं खुसी लेके आही, जऊन ला ओकर बेटा कभू नई लाय सकिस. वो ह कहिथें, “प्रकाश कऊनो काम के नई ये. पांचवीं के बाद कभू इस्कूल नई गीस. येकरे सेती मोर साध हवय के एक पोता होवय. ऊही ह घर ला अऊ ओकर दाई के जतन रखही. रानी ला तऊन पोसन खुराक नई मिल सकिस जऊन ह गरभ धरे महतारी ला मिले ला चाही. बीते कुछेक दिन ले कमजोरी सेती बोले तक ले नई पावत हवय. येकरे सेती, मंय खुदेच ओकर संग अस्पताल मं रहेंव अऊ बेटा ला घर पठो देवंय.”
गंगा कहिथें, “जब वो ह नसा-पानी करके घर लहूंटथे अऊ मोर बहुरिया ह वोला टोकथे, त वो ह वोला मारथे अऊ घर के समान ला टोरे लाग जाथे.” इहाँ ये सोचे के बात आय के, काय बिहार मं शराबबंदी नई ये? एनएफएचएस-4 के मुताबिक शराबबंदी घोसित करे के बाद घलो, बिहार के 29 फीसदी मरद दारु पीथें. देहात मं मरद मन के ये आंकड़ा करीबन 30 फीसदी हवय.
रानी के गरभ के बखत, गंगा ह अपन गांव के बहिर बाई के बूता खोजे के कोसिस करिस, फेर नई मिलिस. रानी बताथे, “मोर हालत अऊ मोला बीमार परे देखत मोर सास ह एक झिन रिस्तेदार ले पांच हजार रूपिया उधार लईन, जेकर ले मोर सेती कभू-कभू फल अऊ गोरस लाय सकंय.”
अपन जिनगी अऊ देह ऊपर अपन काबू नई होय के कहिनी ला उदास मन ले रानी कहिथे, “गर ये मन मोला अइसने लइका जनम करे के मसीन बना के रखे रिहीं, त मंय नई जानंव के अवेइय्या बखत मं मोर संग काय होही. फेर गर मंय जिंयत रइहूं, त कोसिस करहूं के मोर बेटी मन जतके पढ़े ला चाहें, मंय वो मन ला पढ़ाय सकंव.”
“मंय नई चाहंव के मोर बेटी मन के घलो इही हालत होवय जऊन ह मोर हवय.”
ये कहिनी मं कुछेक लोगन मन के नांव अऊ जगा वो मन के पहिचान नई करे सेती बदल दे गे हवंय.
पारी अऊ काउंटरमीडिया ट्रस्ट के तरफ ले भारत के गाँव देहात के किशोरी अऊ जवान माइलोगन मन ला धियान रखके करे ये रिपोर्टिंग ह राष्ट्रव्यापी प्रोजेक्ट ‘पापुलेशन फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया' डहर ले समर्थित पहल के हिस्सा आय जेकर ले आम मइनखे के बात अऊ ओकर अनुभव ले ये महत्तम फेर कोंटा मं राख देय गेय समाज का हालत के पता लग सकय.
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जिज्ञासा मिश्रा ठाकुर फैमिली फाउंडेशन ले स्वतंत्र पत्रकारिता अनुदान के माध्यम ले सार्वजनिक स्वास्थ्य अऊ नागरिक स्वतंत्रता ऊपर लिखथें. ठाकुर फैमिली फाउंडेशन ह ये रिपोर्ताज के बिसय मं कऊनो संपादकीय नियंत्रण नई करे हवय.
अनुवाद: निर्मल कुमार साहू