जहां तक लोगों की स्मृति साथ देती है, उसके मुताबिक़ पश्चिम बंगाल के हावड़ा में स्थित मकरदह गांव का पूर्बान्नपाड़ा समुदाय हर साल सबसे प्रकाशमान, बड़ी, और सबसे लंबी अवधि तक जलने वाली तुबड़ी बनाने की प्रतिजोगिता (प्रतियोगिता) का आयोजन करता आया है. तुबड़ी, एक प्रकार की आतिशबाज़ी है, जो क्रिसमस ट्री की तरह नज़र आती है और मोटे तौर पर रोमन कैंडल (बत्ती) भी कही जा सकती है. हालांकि, पश्चिमी दुनिया के इतिहास में इसका कोई समकक्ष नहीं मिलता है. बंगाल के गांवों में तुबड़ी बनाने में माहिर पुरुष अपने भतीजों और अन्य लड़कों को दीपावली के स्थानीय संस्करण काली पूजा के आसपास अन्य पटाखों के साथ तुबड़ी बनाना भी सिखाते हैं. आमतौर पर यह प्रतियोगिता प्रकाश पर्व दीपावली को विस्तार देते हुए उसके एक या दो हफ़्ते बाद आयोजित की जाती है.
शाम के समय पूर्बान्नपाड़ा के मुख्य हाते में - जहां सभी आयोजन होते है - बांस के दो खंभे लगाए जाते हैं, जो आपस में कसकर बंधे होते हैं. इसके ज़रिए ही प्रतिस्पर्धा में शामिल तुबड़ियों की ऊंचाई मापी जाती है, जिसकी ऊंचाई 70 फीट तक हो सकती है.















