श्रीरंगम के निकट कोल्लिडम नदी के रेतीले किनारे पर किसान वडिवेलन मुझे अपने जीवन से जुड़ी कहानियां सुना रहे हैं. शाम तेज़ी से ढल रही है, और वडिवेलन का खेत यहां से सिर्फ़ 10 मिनट की दूरी पर है. इन कहानियों में उस नदी की कहानी है जिसमें उनके जन्म के 12 दिन के बाद भयानक बाढ़ आई थी. एक कहानी उस गांव की है जहां हर आदमी एल्लु (तिल के बीज) की खेती करता था, ताकि उसकी पिसाई कर शहद के रंग वाला ख़ुश्बूदार तेल निकाला जा सके. कुछ कहानियां यह बताती हैं कि कैसे पानी की सतह पर तैरते केले के दो तनों के सहारे वडिवेलन ने तैरना सीखा, कैसे उनको कावेरी, जो कि एक बड़ी नदी है, के किनारे रहने वाली प्रिया से प्रेम हुआ, और कैसे पिता की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ भी उन्होंने प्रिया से शादी कर ली. अपने आधा एकड़ खेत की कहानी भी सुनाना वह नहीं भूलते, जिसपर वह धान, गन्ना, उड़द और तिल की खेती करते हैं...
पहली तीन फ़सलों से थोड़ी-बहुत आमदनी होती है. “धान के खेती से हमें जो आमदनी होती है उसे हम गन्ने की खेती में लगाते हैं. इस तरह हम खेत से आए पैसों को दोबारा खेत में ही निवेश कर देते हैं,” वडिवेलन स्पष्ट करते हैं. तिल - जिसे तमिल में एल्लु भी कहते हैं - की खेती तेल के लिए की जाती है. तिल की पिसाई लकड़ी के कोल्हू में की जाती है, और नल्लेनई (तिल या गिंगेली तेल) को एक बड़े बर्तन में रखा जाता है. “हम इसका उपयोग खाना पकाने और आचार बनाने में करते हैं,” प्रिया कहती हैं, “और हां, वह इसकी कुछ बूंदें पानी में मिलाकर रोज़ कुल्ला करते हैं.” वडिवेलन मुस्कुराते हैं. “और फिर कुछ बूंदों को पानी में डालकर उस पानी से स्नान भी करता हूं,” वह कहते हैं, “मुझे यह बहुत पसंद है!”
वडिवेलन को और भी कई काम पसंद है, जिनके पीछे उनका एकमात्र उद्देश जीवन के छोटे-छोटे सुख लेना है. बचपन में वह अपने दोस्तों के साथ मछलियां पकड़ते थे और उन्हें आग में पकाकर खाते थे; या पंचायत के नेता के घर पर गांव का एकमात्र टेलीविजन देखते थे. “टीवी मेरी इतनी बड़ी कमज़ोरी थी कि अगर वह ठीक से काम नहीं भी करता था, तब भी मैं उससे निकलती कोई भी आवाज़ सुनकर अपना समय गुज़ार सकता था.
दिन की धूप की तरह ख़ुशनुमा दिनों की यादें भी एक दिन ढल जाती हैं. “आप सिर्फ़ ज़मीन पर निर्भर नहीं रह सकते,” वडिवेलन कहते हैं. “हमारा काम इसलिए चल जाता है, क्योंकि मैं अपनी कैब भी चलाता हूं.” श्रीरंगम तालुका के गांव तिरुवलरसोलई में उनके घर से यहां नदी के किनारे तक हम उनकी टोयोटा एटियोस में ही आए थे. यह कार उन्होंने आठ प्रतिशत ब्याज की दर पर लिए गए एक निजी क़र्ज़ से ख़रीदी थी, जिसके बदले उन्हें हर महीने 25,000 रुपए की एक मोटी रक़म चुकानी पड़ती है. पैसों की व्यवस्था करना भी हमेशा एक मुश्किल काम रहा है. सामान्यतः आड़े मौके पर गिरवी रखने के लिए सोने का कोई जेवर काम आता है. “देखिए, हमारी तरह कोई आदमी घर बनाने के के लिए किसी बैंक से क़र्ज़ लेना चाहे, तो हमारी दस जोड़ी चप्पलें घिस जाएंगी. वे हमें दौड़ा-दौड़ा कर मार डालेंगे,” वडिवेलन कहते हैं.
आसमान इस समय गुलाबी, नीले और धूसर रंगों से बने किसी तैलचित्र की तरह दिख रहा है. कहीं से एक मोर की कूक की आवाज़ सुनाई देती है. “इस नदी में उदबिलाव भी हैं,” वडिवेलन बताते हैं. पास में ही युवा लड़के नदी में छलांग लगाकर उदबिलावों जैसा करतब दिखा रहे हैं. "मैं भी यही सब करता था. जब हम बड़े हो रहे थे, तो यहां मनोरंजन के लिए और कुछ था ही नहीं!"






































