“हरेक बखत भट्ठी जलावत, मंय जर जाथों.”
सलमा लोहार के दूनों कुहनी मन मं जरे के अनगिनत चिन्हा दिखत हवंय अऊ ओकर डेरी हाथ के दूनों ऊँगली मं तुरते कटे के घाव हवंय. वो ह भट्ठी के तरी ले मुट्ठी भर राख निकार के घाव मं रमज लेथे, जेकर ले वो ह जल्दी भर जावय.
41 बछर के सलमा के परिवार सोनीपत के बहालगढ़ बजार मं तऊन झोपड़पट्टी मं बसे छै लोहार परिवार मन ले एक आय जेन ला वो मन अपन घर कहिथें. ये झोपड़पट्टी के एक डहर भीड़भाड़ वाले बजार हवय अऊ दूसर डहर नगरपालिका के जमा करे कचरा के ढेरी हवय. तीर मं सरकारी शौचालय अऊ पानी के टंकी हवय. सलमा के परिवार बस अतकेच सुविधा के भरोसा मं हवय.
ये झोपड़पट्टी मन मं बिजली नईं ये अऊ गर 4-6 घंटा सरलग झड़ी लगथे, त ये मं पानी भर जाथे. बीते कुंवार (2023) मं अइसनेच होय रहिस. अइसने नौबत आय ले पानी उतरे तक ले अपन खटिया मं कलेचुप बइठे रहे ला परथे. पानी उतरे मं 2-3 दिन लाग जाथे. सलमा के बेटा दिलशाद बताथे, “वो बखत मं हमन ला भारी बस्साय ला झेले ला परथे.”
सलमा कहिथे, “फेर हमन कहूँ आन जगा घलो कहां जाय सकथन? हमन जानथन के इहाँ कूड़ा-कचरा के ढेरी के बगल मं रहिके बीमार परत रहिथन. इहाँ भिनभिनावत माछी मन हमर खाय मं बइठ जाथे फेर हमन अऊ कहाँ जाबो?”
गडिआ,गाडिया धन गडुलिया लोहार ला राजस्थान मं घुमंतू जनजाति (एनटी) के संग-संग पिछड़ा वर्ग के रूप मं घलो सूचीबद्ध करे गे हे. ये समाज के लोगन मन दिल्ली अऊ हरियाणा मं घलो रहिथें. फेर एक कोती जिहां दिल्ली मं वो मन ला घुमंतू जनजाति के दर्जा मिले हवय, उहिंचे हरियाणा मं वो मन पिछड़ा वर्ग के रूप मं सूचीबद्ध हवंय.
बजार के जेन इलाका मं वो मन रहिथें वो ह स्टेट हाईवे -11के बगल मं बसे हवय अऊ उहाँ बनेच अकन ताज़ा साग-भाजी, मिठाई, किराना, बिजली के सामान अऊ दीगर चिल्लर बेपारी मन के दुकान हवय. स्टाल वाले मालिक मं बजार बंद होय के बाद चले जाथें.




















