सरत मोरन कहिथे के हाथी कभू घलो अपन फांडी (सीखेइय्या) ला नइ बिसोरय. वो ह 90 ले जियादा हाथी मन ला सिखाय हवय. वो ह कहिथे के अपन सरी जिनगी मं ये हाथी अपन फांडी करा दऊड़ के आथे, चाहे वो ह घन जंगल मं जंगली हाथी मन के गोहड़ी मं काबर न होय.
पिलखाना (सिखाय के अलवा-जलबा बने ठीहा) मं नव बछरू हाथी ला धीरे-धीरे मइनखे के छुये ला बताय जाथे, जेन ला कतको दिन तक ले करत जावत रहिथे जब तक ले वोला येकर आदत झन पर जाय. सरत कहिथे, “सिखाय बखत थोकन घलो पीरा बनेच जियादा लगथे.”
जइसने-जइसने बखत गुजरत जाथे, बछरू हाथी के तीर मं जियादा लोगन मन आवत जावत रहिथें जब तक के जानवर ला कोनो दिक्कत मसूस नइ होवय.
सिखाय बखत सरत अऊ दीगर सीखेइय्या मन हाथी बर सुग्घर गीत गाथें, हाथी अऊ ओकर सीखेइय्या के मितानी के कहिनी सुनाथें.





