इरफ़ान शेख़ और उनका समुदाय मुंबई के दहिसर की चहल-पहल से भरी गलियों में रहता है. उन्होंने तमाम चुनौतियों के बावजूद ढोलक बनाने की सदियों पुरानी परंपरा को जीवित रखा है. इरफ़ान और समय के साथ मुश्किल में पड़ती उनकी कला पर आधारित फ़िल्म
प्रतिष्ठा पांड्या, पारी में बतौर वरिष्ठ संपादक कार्यरत हैं, और पारी के रचनात्मक लेखन अनुभाग का नेतृत्व करती हैं. वह पारी’भाषा टीम की सदस्य हैं और गुजराती में कहानियों का अनुवाद व संपादन करती हैं. प्रतिष्ठा गुजराती और अंग्रेज़ी भाषा की कवि भी हैं.
Author
Aayna
आयना, विजुअल स्टोरीटेलर और फ़ोटोग्राफ़र हैं.
Translator
Devesh
देवेश एक कवि, पत्रकार, फ़िल्ममेकर, और अनुवादक हैं. वह पीपल्स आर्काइव ऑफ़ रूरल इंडिया के हिन्दी एडिटर हैं और बतौर ‘ट्रांसलेशंस एडिटर: हिन्दी’ भी काम करते हैं.