एक बखत के बात आय. लाला नांव के जादूनगरी मं देंवता मन के राजा मोदरे दीन भारी निरदयी राज करत रहय. वो ह न कभू खाइस, न कऊनो ला खाय बर देवय, येकरे सेती सब्बो भूखाय रहेंव. हव, सही सुनेव जी. वो ह अपन बूड़ति डहर के राज ला औगड़ दानी नांव के एक ठन जागीरदार ला बेंच दीस.
एक दिन महाराज के पुजेरी टामो ईभा ह एक ठन भयंकर सपना देखिस के एक झिन जंगली मनखे धीराल हुंगा ओकर सिंहासन ला कब्जा करत हवय. ये त भारी बड़े अपशकुन रहिस, काबर के धीराल हुंगा एक अइसने खानदान ले रहिस जेन ह लोकतंत्र अऊ न जाने कतको खराब रिवाज ऊपर भरोसा करत रहिस. ओकर बाद त तुरते, लऊहा-लउहा जादूनगरी के मंत्री मन के बइठका होईस अऊ वो मन येकर करमाती तोड़ निकार लीन. तय होईस के शुद्ध गोबर ले गऊ माता छाप वाले 108 फुट लाम अगरबत्ती बनाय जाय.
अऊ, येकर बाद गऊ माता के पोटा तक ले साफ करे गीस, सब्बो जरूरी जिनिस जोर के रख ले गीस. ओकर बाद बत्ती जलाय गीस. फेर ये कइसने महक! किसान मन ले घिन करेइय्या, जुमला मं बूड़े महक! कहे जावत रहिस के ओकर बाद बत्ती के धुंवा धीरे-धीरे बगरत गीस, जिहां भूख पसरत गीस. राजा मोंदरे दीन ह खुदेच औघड़ दानी अऊ टामो ईभा के संग नाचिस. हो सकथे एकर ले अपशकुन टरिस धन नइ, कोन ला पता? हमन त सिरिफ अतक जानत हवन के येकर बाद ले लाला नगरी हमेशा खुसी मनाय लगिस.


