एक महतारी कऊन भाखा मं सपना देखथे? गंगा ले के पेरियार के पार तक ले वो ह अपन लइका मन ले कऊन भाखा मं गोठियाथे? का ओकर बोली हरेक राज, हरेक जिला, हरेक गाँव के संग अपन रंग बदलथे? हजारों भाखा, लाखों बोली, का वो ह तऊन सब्बो ला जानथे? वो ह कऊनो एक मं विदर्भ के किसान मन ले, हाथरस के लइका मन ले, डिंडीगुल के माईलोगन ले गोठियाथे? सुनव! अपन मुड़ी ला लाली बालू मं खुसेर देवव. एक ठन डोंगरी के टीपी मं जावव जऊन मेर हवा तुम्हर चेहरा ले मया-दुलार करत रहिथे, सुनव! का तुमन वोला सुन सकत हवव, ओकर कहिनी मन ला, ओकर गीत मन ला, ओकर रोवई ला? मोला बतावव, काय तुमन ओकर जुबान ला पहिचाने सकथो? मोला बतावव, का तुमन मोर जइसने एक ठन सुग्घरलोरी गावत सुने सकत हवव?


Bangalore, Karnataka
|WED, NOV 23, 2022
सराप परे भाखा अऊ मीनार
एक झिन मंत्री के एक ठन आम राष्ट्रीय भाखा लागू करे सेती करे गे गहिर बिनती ले छिड़े चर्चा ह एक झिन कवि ला बाबेल के मीनार के सुरता करा दे हवय
Poem and Text
Illustration
Editor
Translator
जुबान
मोर जुबान मं एक ठन कटार समा गे!
मंय येकर तेज धार के गम पाथों –
चीर देथे जुबान के नाजुक जगा मन ला.
मंय अब अऊ बोले काबिल नईं रहे सकंव,
कटार ला मोर जम्मो आखर मिल गे,
सब्बो आखर के भाव, सब्बो गीत, सब्बो कहिनी, मन ला खोदर डरिस
जेन मन रहिन सब्बो जाने पहिचाने अऊ जेन ला मसूस करे रहेंव.
लहू ले लथपथ मोर जुबान,
लहू के धार
मोर मुंह ले छाती तक बोहावत,
मोर बोर्री, मोर अलकर जगा ले होवत
द्रविड़ मन के धनहा माटी मं मिल जाथे.
भूईय्या जीभ जइसने लाल अऊ ओद्दा हो गे हवय.
हरेक बूंद ले नवा जनम होथे,
करिया धरती ले जामे लाल कांदी पंऊरे लागथे .
ओकर कोख मं सैकड़ों, हजारों अऊ लाखों
जुबान दबे हवंय
जुन्ना मरघट्टी ले मरे भाखा मन जिंयत उठ जाथें,
बिसोरे सब्बो बोली मन फागुन मं परसा के फूल जइसने खिले हवंय.
गावत हवंय गीत अऊ सुनावत कहिनी, जऊन ला मोर महतारी सुनावत रहिस.
मोर जुबान मं कटार समा गे
ओकर धार अब भोथराय लगे हवय,
कतको बोली वाले देस मं गीत मन ले डेरावत.
अनुवाद: निर्मल कुमार साहू
Want to republish this article? Please write to [email protected] with a cc to [email protected]
Donate to PARI
All donors will be entitled to tax exemptions under Section-80G of the Income Tax Act. Please double check your email address before submitting.
PARI - People's Archive of Rural India
ruralindiaonline.org
https://ruralindiaonline.org/articles/सराप-परे-भाखा-अऊ-मीनार

