मधुमक्खियां कभी-कभी धुआं उठने से पहले ही ख़तरे को भांप लेती हैं और डंक मार देती हैं. लेकिन निताई और उनके सहकर्मी किसी प्रकार के मलहम या सुरक्षात्मक कपड़े का इस्तेमाल नहीं करते. “हम केवल अपनी अंगुलियों से डंक को खींच कर बाहर निकाल देते हैं. एक बार एक आदमी को 300-400 मधुमक्खियों ने डंक मार दिया था. वह हफ़्तों तक उठ नहीं पाया था, न ही खा सका था!”
निताई दो चीज़ों में विश्वास व्यक्त करते हैं: अपनी तावीज़ और जंगलों तथा लोगों की रक्षक बनबीबी देवी पर - सुंदरबन के लोग जिन पर काफ़ी आस्था रखते हैं. वह कहते हैं, “परिस्थिति की कठिनाई के अनुसार, देवी के लिए अलग-अलग मंत्र पढ़े जाते हैं.” हम उनसे एक मंत्र सुनाने के लिए कहते हैं; वह बंगाली में बिना सांस लिए एक मंत्र सुनाते हैं, जिसका जाप शहद इकट्ठा करने वाले घर से जंगल के लिए रवाना होते समय करते हैं.
जैसा कि सुंदरबन में अक्सर होता है, बातचीत बाघों की ओर मुड़ जाती है. और हर किसी के पास बताने के लिए कोई न कोई कहानी है. निताई याद करते हैं, “एक बार एक बाघ मेरे दोस्त के सामने आ गया, जिसके डर से वह वहीं पर जम गया. मैंने बनबीबी के लिए कुछ मंत्र पढ़े - लेकिन उसे बचा नहीं सका और बाघ ने उसे मार डाला. मैंने शव को ढूंढा और उसके घर ले गया. कई साल पहले, लगभग 150-200 लोगों ने जंगल में एक बाघ को घेर लिया था. तब भी वह 1-2 लोगों को ले गया.”
वह कहते हैं कि एक समय था जब सरकार, बाघों को मारने के लिए ग्रामीणों को पुरस्कार देती थी. “लेकिन अब, क़ानून की वजह से कोई उन्हें छू भी नहीं सकता है,.” सुंदरबन में रहने वाले अन्य लोगों की तरह ही, निताई भी कभी-कभी यह महसूस करते हैं कि राज्य, लोगों से ज़्यादा बाघों की रक्षा कर रहा है. वह मज़ाक़ करते हैं, “हम बाघ की नींद में खलल डालने के कारण भी जंगल में नहीं जा सकते.” लेकिन वह जानते हैं कि बाघ महत्वपूर्ण हैं और स्थानीय वन संरक्षण समिति के सदस्य भी हैं, जो कि सरकार की वन प्रबंधन रणनीति का एक हिस्सा है. “अगर बाघ नहीं रहेंगे, तो सुंदरबन भी नहीं रहेगा. कोई भी चीज़ लोगों को जंगलों में घुसने और इसे तबाह करने से नहीं रोक पाएगी.”
हम निताई के छोटे और तंग घर में प्रवेश करते हैं, जहां वह फ़र्श पर एल्युमिनियम के एक बर्तन और डिब्बे में शहद जमा करते हैं. “इसका रंग और स्वाद इस बात पर निर्भर करता है कि आप किन पेड़ों और फूलों से - केवड़ा, गोरन, खोलसी - और किस मौसम में इसे निकालते हैं. लेकिन बिक्री वाला आपका शहद, रंग और स्वाद की दृष्टि से साल भर एक जैसा ही रहता है.”