पिस्दा के दावा के बाद घलो किसान मन के मदद बर बने कतको सरकारी काम, कागज मन मं रहगे हवय.
वो ह कहिथे, "सासन ह नियम के मुताबिक किसान मन ला बनेच मुआवजा बांटे हवय. कुछेक जिला ले सिकायत मिले हे जेन ला दूर करे बर कलेक्टर मन ला कहे गे हवय."
फेर जम्मो गड़बड़ी सरकार के मुआवजा नीति आय?
अब जब धान लुआ गे हवय, खाली खेत ला देख के नुकसान के अंदाजा नई लगाय जा सकय. अइसन मं सरकारी अफसर बरसात अऊ धान बिक्री ले नुकसान के अनुमान लगावत हंवय.
छत्तीसगढ़ सरकार के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के कहना आय, "सरकार हा अपन अफसर मन ला ये जिम्मेवारी देय रहिस के वो मन किसान मन ला राहत राशि बांटय, सिकायत त होवत रहिथे, एकर बाद घलो मोला लागथे के किसान मन मं ये ला लेके जियादा गुस्सा नई ये."
कृषि विशेषज्ञ अऊ आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक संकेत ठाकुर कहिथे, "सरकार सूखा ले निपटे के नांव ले मुआवजा बांटे के दिखावा करके अपन जिम्मेवारी ले पाछू हटत हे.राहत बर देय गे रकम बहुतेच कम हवय अऊ वो मं घलो जमके गड़बड़ घोटाला होवत हे."
ठाकुर कहिथे, "अगर हालात मं सुधार नई होईस त कतको किसान खुद्कुसी बर मजबूर हो जाहीं,हमन वो मन ला सिरिफ मनरेगा के भरोसा मं छोड़ नई सकन."
यह कहिनी राजस्थान पत्रिका के रायपुर, छत्तीसगढ़ संस्करण मं 29 फरवरी, 2016 मं छपे रहिस.
अनुवाद: निर्मल कुमार साहू