ऊ आपन एगो परिचित के आयिरमकाची पट्टा पर देले बाड़न. ऊ हंसत कहलन, “बाकिर जदि हम कुछ कटहर घर खातिर रख लीहीं, त उनका शिकायत ना होखी. चाहे त समूचा भी रखल जा सकत बा.” अइसे त, एकरा आयिरमकाची (एक हजार फल वाला) कहल जाला, बाकिर साल में एकरा से एक तिहाई आ पांचवा हिस्सा के बीच फल होखेला. ई नामी गाछ बा. एकरा पर फले वाला कटहर के मांग बहुते बा. एह गाछ के कवनो मध्यम आकार के कटहर में मोटा-मोटी दू सौ कोवा निकली. रामासामी बहुते जतन से बतइलन, “कोवा के स्वाद दिव्य होखेला.”
आमतौर पर जवन गाछ जेतने पुरान होई, ओकर टहनी सभ ओतने मोट होई आउर ओह पर ओतने जादे फल लागी. रामासामी कहेलन, “गाछ के देख-रेख करे वाला जानेला कि कवनो टहनी पर जादे से जादे केतना फल लागे के चाहीं ताकि फल बड़ा आवे. कवनो नया गाछ पर जादे फल लागल बा, त ऊ सभ छोटे रही,” ऊ ओकर साइज बतावे खातिर आपन हाथ के लगे लावत बाड़न, जइसे कि ऊ कवनो नरियर पकड़ले होखस. जादे करके किसान लोग कटहर उगावे खातिर दवाई छिड़केला. रामासामी बतावेलन कि सौ फीसदी जैविक तरीका से कटहर उगावल असंभव त नइखे, बाकिर बहुते भारी काम बा.
ऊ हंसत कहेलन, “जदि एगो बड़ गाछ पर कम गिनती में कहटर उगे खातिर छोड़ल जाव, त एक-एक कटहर खूब बड़ आउर भारी फरी. बाकिर एकरा में जादे खतरा बा. कटहर में कीड़ा लाग सकेला, ऊ बरसात में खराब हो सकेला, चाहे आंधी-तूफान में गिर सकेला. हमनी के जादे लालच ना करे के चाहीं.”
ऊ कटहर पर छपल एगो किताब खोलके ओकर फोटो सभ देखावे लगलन. “देखीं, कइसे फल सभ के बचा के रखल जाला... फल के टिका के रखे खातिर टोकरी बनावल जाला, आउर ओकरा रसड़ी के मदद से टहनी से बांध देवल जाला. एह तरीका से, फल टिकल रहेला, गिरे ना. जब एकरा काटल जाला, त रसड़ी के मदद से धीरे-धीरे नीचे उतारल जाला. आउर एह तरीका से उठावल जाला.” एगो फोटो में दू गो आदमी एगो बिसाल कटहर के उठइले रहे. कहटर एगो आदमी जेतना लंबा-चौड़ा रहे. रामासामी रोज आपन गाछ सभ के निहारेलन आउर देखत रहेलन कहूं कवनो टहनी कमजोर त ना हो गइल बा. “हम तुरंते रसड़ी के टोकरी तइयार करके ओकरा कटहर के नीचे बांध देवेनी.”
केतना बेरा त बहुते संभार के रखला के बादो कटहर टूटके भूइंया पर गिर जाला. ओकरा से जनावर के चारा तइयार कइल जाला. “देखनी ऊ कटहर सभ? सभ नीचे गिर गइल रहे. एकरा अब केहू ना कीनी. हमार गाय आ बकरी सभ एकरा मजा से खाई.” करुवाडु बेचे वाला मेहरारू लोग के कुछ मछरी बिका गइल बा. लोहा के तराजू पर तउल के मछरी सभ चौका में ले जावल जात बा. एकरा बाद, मेहरारू लोग के डोसा परसल जात बा. ऊ लोग खात-खात हमनी के बात सुन रहल बा आउर बीच-बीच में बतियावे लागत बा. ऊ लोग रामासामी से कहलक, “हमनी के एगो कटहर दे दीहीं ना. लरिकन सभ खाई.” रामासामी जवाब देत बाड़न, “अगिला महीना आके ले जइह.”