गुमला जिला के लुपुंगपत के सक्रिय ग्राम सभा ह झारखंड मं चर्चा के बिसय बने हवय. जिला मुख्यालय ले गाड़ी मं घंटा भर ले जियादा के रद्दा अऊ झारखंड के रजधानी के करीबन 55 कोस (165 किमी) दूरिहा, भीतरी के ये गाँव तक जाय असान नो हे. ये ह जंगल भीतरी मं बसे हवय अऊ इहाँ तक ले हबरे बर पहिली डोंगरी ला चढ़े परथे अऊ ओकर बाद माटी के सड़क ले जाय ला परथे. भाड़ा वाले बड़े बस असानी ले नई मिलय, फेर ऑटो अऊ छोटे गाड़ी मन देखे ला मिलथें, वइसने ये ह सब्बो बखत नई दिखय.
ये गाँव मं असुर समाज के करीबन 100 घर-परिवार हवंय, जऊन मन ला पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) के रूप मं सूचीबद्ध करे गे हवय. गुमला के छोड़, ये जनजाति झारखंड के लोहरदगा, पलामू अऊ लातेहार जिला मं रहिथे अऊ ये राज मं ये मन के कुल अबादी 22,459 हवय ( भारत मं एसटी सांख्यिकीय प्रोफ़ाइल, 2013)
करीबन आधा गाँव साक्षर हवय, येकर बाद घलो ग्राम सभा के सब्बो काम के हिसाब किताब रखे जाथे. संचित असुर कहिथे, “हरेक चीज के दस्तावेजीकरण करे जावत हवय. एजेंडा तय करे जावत हवय अऊ अइसने मुद्दा जेन ह लोगन मन के चिंता बने हवय तऊन ला उठावत हवन.” संचित जुझारू जवान नेता आंय अऊ फुटबॉल खिलाड़ी रहिन. जियादा लिंग –समान समिति मं समान्य बदलाव ला बतावत वो ह कहिथें, “ग्राम सभा एंर्रा अऊ माई दूनों लोगन के होथे.”
सरिता बताथें के पहिली ग्राम सभा के बइठका मं सिरिफ मरद लोगन मन जावत रहिन. कभू राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी रहे सरिता कहिथे, “[हमन] माइलोगन मन ला ये बात के जानकारी नई रहिस के काय चर्चा होईस.” बइठका खास करके गाँव के बासिंदा मन के लड़ई-झगरा ला सुलझाय के रहय.
फेर अब वो बात नई रह गे हवय. हमन गाँव के ग्राम सभा मं हिस्सा लेवत हवन अऊ हरेक समस्या ला लेके चर्चा करत हवन, अऊ फइसला लेगे मं हमर राय के घलो अहमियत हवय,” सरिता खुस होके कहिथे.