नागी शिवा कर्नाटक के बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान के किनारे स्थित लोक्केरे गांव में अपने परिवार के साथ रहती हैं। वह कुरुबा गौड़ा समुदाय से हैं, और घरेलू सहायिका के रूप में काम करती हैं।
उन्होंने छह महीने के दौरान, कर्नाटक के चामराजनगर जिले में भारत के प्रमुख बाघ अभ्यारण्यों में से एक, बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान के आसपास अपने दैनिक जीवन – वृक्षों, खेतों और फ़सल की कटाई, जानवरों, अपने परिवार – की तस्वीरें खींचीं। यह पहली बार था जब उन्होंने कैमरा (Fujifilm FinePix S8630) का उपयोग करना सीखा। उनका यह फोटो निबंध वन्यजीवों के साथ रहने के बारे में एक बड़ी सहयोगी फोटोग्राफी परियोजना का हिस्सा और ‘पारी’ पर प्रकाशित छह निबंधों की श्रृंखला का दूसरा भाग है। (इसका पहला भाग, जयम्मा ने जब तेंदुए को देखा, 8 मार्च 2017 को प्रकाशित हुआ था।)















