कुसुमताई सोनवणे, जिनके गाए दोहे (ओवी) को 15 मार्च 2017 को पारी पर प्रकाशित किया गया था, वह भी नंदगांव में रहती हैं. वह कहती हैं, "शाहू और मैं बचपन के दोस्त थे, हम कोलवण गांव में एक साथ स्कूल गए थे, हालांकि हमने पहली क्लास तक ही पढ़ाई की थी." दोनों रिश्ते से भी जुड़ी हुई थीं - शाहूबाई के पति, कुसुमताई के चचेरे भाई थे. दोस्तों और बहनों के तौर पर, दोनों ने एक-दूसरे के साथ काफ़ी समय बिताया था. लकड़ी के मूसल के साथ ओखल में अनाज कूटने के दौरान, दोनों अलग-अलग धुनों का अभ्यास करती थीं और नए धुन बनाने की कोशिश करती थीं. इसके बाद, चक्की पर गेंहू पीसकर आटा बनाते समय इन धुनों पर दोहे पिरोकर गाने की कोशिश होती थी. कुसुमताई कहती हैं, "हम दोनों ही एक किलो चावल या चना पीसने के लिए लाती थीं और साथ में लोकगीत गाती थीं."
शाहूबाई ने 'ग्राइंडमिल सॉन्ग्स' के डेटाबेस में मौजूद 401 गाने गाए, जिनमें से लगभग 170 गीतों को अक्टूबर, 1999 में रिकॉर्ड किया गया था. ये गीत ग्रामीण महाराष्ट्र के 110,000 से ज़्यादा दोहों (ओवी) के डेटाबेस का हिस्सा हैं. इस प्रोजेक्ट की मेज़बानी अब पारी कर रहा है, और पारी की एक टीम गायकों से मिलने, तस्वीरें लेने और वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए गांवों में जाती रहती है.
इस कड़ी में दशहरे से जुड़े तीन दोहे (ओवी) शामिल हैं. यह त्योहार नवरात्रि के नौ दिनों के अंत का प्रतीक है - और दसवें दिन, बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाया जाता ह. माना जाता है कि देवी दुर्गा ने इसी दिन राक्षस महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी. महाभारत में कहा जाता है कि पांडवों ने इसी दिन अपना वनवास पूरा किया था. रामायण के अनुसार, इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था.
इस त्योहार के समय और कुछ अन्य हिंदू त्योहारों के दौरान, पारंपरिक रीति-रिवाज़ों का पालन करने वाली महिलाएं, घर के पुरुषों को टीका लगाती हैं. महिलाएं एक प्लेट पर फूल, कुमकुम और एक कपास वाली बाती से तेल के दिए जलाती हैं. आदमी कुर्सी पर या फर्श पर रखे पीढ़े पर बैठता ह. औरतें उनके माथे पर कुमकुम लगाती हैं और प्लेट पर रखे जलते दिए को आदमी के चारों ओर घुमाती हैं. इस रिवाज़ को मराठी में ओवालणे कहा जाता है. कुछ ऐसे त्योहार भी आते हैं जब बच्चों या महिलाओं को इस तरह से पूजा जाता है. इस लेख में शामिल तीन दोहों में इस रिवाज़ का इस्तेमाल किया गया है.