झारखंड के पलामू ज़िले के चेचरिया गांव में मनरेगा और मुफ़्त एलपीजी सिलेंडर, सड़क और हैंडपंप जैसी सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में दलित ग्रामीणों के प्रति उदासीनतापूर्ण व्यवहार हुआ है. अपनी समस्याओं से तंग आ चुके इन क्षुब्ध लोगों का यह मानना है कि 2024 का आम चुनाव इस हिसाब-किताब को बराबर करने के लिए सही अवसर है
अश्विनी कुमार शुक्ला, झारखंड के स्वतंत्र पत्रकार हैं, और नई दिल्ली के भारतीय जन संचार संस्थान (2018-2019) से स्नातक कर चुके हैं. वह साल 2023 के पारी-एमएमएफ़ फ़ेलो हैं.
Editor
Sarbajaya Bhattacharya
सर्वजया भट्टाचार्य, पारी के लिए बतौर सीनियर असिस्टेंट एडिटर काम करती हैं. वह एक अनुभवी बांग्ला अनुवादक हैं. कोलकाता की रहने वाली सर्वजया शहर के इतिहास और यात्रा साहित्य में दिलचस्पी रखती हैं.
Translator
Prabhat Milind
प्रभात मिलिंद, शिक्षा: दिल्ली विश्विद्यालय से एम.ए. (इतिहास) की अधूरी पढाई, स्वतंत्र लेखक, अनुवादक और स्तंभकार, विभिन्न विधाओं पर अनुवाद की आठ पुस्तकें प्रकाशित और एक कविता संग्रह प्रकाशनाधीन.