ये कहिनी बदलत मऊसम ऊपर लिखाय पारी के तऊन कड़ी के हिस्सा आज जऊन ह पर्यावरन रिपोर्टिंग के श्रेणी मं साल 2019 के रामनाथ गोयनका अवार्ड जीते हवय.

कडल ओसई रेडियो टेसन ले ए यशवंत कहिथें, “बिहनिया के 11 बजके 40 मिनट हो गे हवय, येकरे सेती अब हवा के गति के ताजा जानकारी बताय जावत हवय. बीते एक हफ्ता धन एक महिना ले, कचान काथू (दक्खन हवा) बनेच तेज रहिस. ओकर गति 40 ले 60 (किलोमीटर प्रति घंटा) रहिस. आज ये ह जनी-मनी मछुवारा मन के मदद सेती रहिस, ये ह कम होके 15 (किमी प्रति घंटा) मं आ गे हवय.”

तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिला के पामबन टापू के मछुआरा मन बर ये ह भारी बढ़िया ख़बर आय. यशवंत जऊन ह खुदेच एक मछुआरा आंय बताथें, येकर मतलब हवय के वो मन बगेर कऊनो डर के समुंदर मं जाय सकत हवंय.” वो ह ये इलाका के समाज के रेडियो टेसन, कडल ओसई (समंदर के अवाज) मं रेडियो जॉकी घलो हवंय.

रक्तदान ऊपर एक ख़ास प्रसारण सुरु करे सेती यशवंत मऊसम के रिपोर्ट से जुरे अपन बात ये कहत खतम करथें: “तापमान 32 डिग्री सेल्सियस हबर गे हवय. येकरे सेती भरपूर पानी पियंत रहव अऊ घाम मं झन जावव.”

ये एक जरूरी सावधानी आय काबर पामबन मं अब 1996 के बनिस्पत, जऊन बछर यशवंत के जनम होय रहिस, कहूँ जियादा तिपत दिन देखे ला मिलत हवंय. तब, ये टापू मं बछर भर मं कम से कम 162 दिन अइसने होवत रहिस जब घाम 32 डिग्री सेल्सियस के निसान ला छूवत रहिस धन ओकर पर चले जावत रहिस. ओकर ददा एंथनी सामी वास जऊन ह अभू घलो मछुवारा हवंय – जब साल 1973 मं जन्मे रहिन, त अतक घाम बछर भर मं 125 दिन ले जियादा नई परत रहिस. फेर आज तऊन घाम वाले दिन के आंकड़ा बछर मं कम से कम 180 हो चुके हवय, ये कहना आय बदलत मऊसम अऊ ग्लोबल वार्मिंग ऊपर एक ठन इंटरैक्टिव मसीन ले करे गे गिनती के, जऊन ला न्यूयॉर्क टाइम्स ह ये बछर जुलाई मं ऑनलाइन छापे रहिस.

येकरे सेती, यशवंत अऊ ओकर संगवारी न सिरिफ मऊसम ला फेर मऊसम के बड़े मुद्दा ला घलो समझे के कोसिस करत हवंय. ओकर ददा अऊ दीगर मछुवारा – जऊन मं के असल अबादी ये टापू के दू माई सहर पामबन अऊ रामेश्वरम मं 83,000 के करीबन हवय – वो मन ले ये आस हवय के वो मन ये बदलाव के सही मतलब ला समझाहीं.

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अपन ददा एंथनी सामी अऊ अपन डोंगा (जउनि) के संग रेडियो जॉकी यशवंत: बहिर निकरे के पहिली हमन हवा अऊ मऊसम के अंदाजा लगावत रहें, फेर आज हमर कऊनो घलो अंदाजा सटीक नई होवय

एंथनी सामी कहिथें, “मंय 10 बछर के उमर ले मछरी धरत हवंव. ये तय हवय के समुंदर मं तब ले भारी बदलाव होय हवय. पहिली, बहिर निकरे के पहिली हमन हवा अऊ मऊसम के अंदाजा लगावत रहेन. फेर आज, हमर कऊनो घलो अंदाजा सटीक नई होवय. अतका भयंकर बदले हवय के वो हमर गियान ला झुठला देथें. पहिली, समुंदर मं जाय बखत अतक गरमी कभू नई होवत रहिस. फेर आज, गरमी हमर बर बहुते जियादा दिक्कत करत हवय.”

सामी जऊन समुंदर के बात करत हवंय वो ह कभू-कभू जानलेवा बन जाथे. जइसने के ये बछर 4 जुलाई के होय रहिस, जब यशवंत – जेन ह अपन ददा के डोंगा धरे जब कभू मऊका मिलथे, मछली धरे ला जाथें – रात मं 9 बजे के बाद ये खबर ले के आइस के समुंदर मं खराब मऊसम सेती चार झिन मन अपन रद्दा भटक गे हवंय. वो बखत कडल ओसई बंद हो गे रहिस – येकर प्रसारण बिहनिया 7 बजे ले संझा 6 बजे तक ले होथे – फेर आरजे (रेडियो जॉकी) होय सेती वो ह रेडियो मं आइस अऊ घोसना करिस के कुछु मछुआरा बिपत मं फंस गे हवंय. रेडियो टेसन के मुखिया, गायत्री उस्मान कहिथें, “हमर टेसन के तीर मं हर बखत एक झिन आर जे रहिथे, भले दफ्तर के टेम के मुताबिक बंद हो जावय, अपात हालत मं हमन हमेसा प्रसारण करे सकथन.” अऊ दीगर करमचारी मन तीरेच मं रहिथें. तऊन दिन कडल ओसई के करमचारी मन पुलिस, तट रक्षक, जनता,अऊ दीगर मछुआरा मन ला खबरदार करे के काम भारी जल्दी ले करिन.

दू दिन के भारी मिहनत के बाद, सिरिफ दू झिन ला बचाय जाय सकिस. गायत्री कहिथें, वो मन टूटे वल्लम (सधारन देसी डोंगा) ले लटके रहिन. दीगर दू झिन हाथ पिरोय सेती, मंझा मंइच डोंगा ला छोड़ दीन. बिछुड़त बखत वो मन अपन दूनो संगवारी ले कहिन के वो मन मया के संदेसा ओकर घर के मन तक पहुंचा देंव अऊ वो मन ला समझा देंय के वो मं जियादा बखत डोंगा ला धरे नई रहे सकिन. वो मन के लाश 10 जुलाई के समुंदर के पार परे मिलिस.

54 बछर के ए के सेसुराज धन ‘कैप्टन राज’ कहिथें, “अब हालत पहिली जइसने नई ये.” वो ह ये उपाधि अपन नांव के डोंगा सेती पाय हवय. वो ह बताथें के नो बछर के उमर मं जब वो ह समुंदर मं जाय ला सुरु करे रहिस, त वो बखत येकर सुभाव मितान कस रहिस. हमन ला मालूम रहेव के मछरी कतका मिलहीं अऊ मऊसम कइसने रिही. आज, दूनो के बारे मं अनुमान लगे मुस्किल हवय.”

वीडियो देखव : कैप्टन राज एक ठन अंबा गीत गावत

54 बछर के ए के सेसुराज धन ‘कैप्टन राज’ कहिथें, ‘अब हालत पहिली जइसने नई ये.’ वो ह बताथें के ‘समुंदर सुभाव मितान कस रहिस... हमन ला मालूम रहेव के मछरी कतका मिलहीं अऊ मऊसम कइसने रिही. आज, दूनो के बारे मं अनुमान लगे मुस्किल हवय’

राज ये बदलाव ले असमंजस मं हवंय, फेर कडल ओसई करा वो मन के कुछु जुवाब हवंय. गैर सरकारी संगठन, नेसक्करंगल डहर ले 15 अगस्त 2016 मं सुरु करे जाय के बाद ले ये टेसन ह समुंदर, मऊसम के उतार-चढ़ाव, अऊ बदलत मऊसम उपर कार्यक्रम चलावत आवत हवय.

गायत्री कहिथें, “कडाल ओसई एक ठन रोज के कार्यक्रम चलाथे, जेकर नांव हवय समुथिरम पलगु (समुंदर ला जानव). येकर उद्देश्य समंदर ला बचाय हवय. हमन जानत हवन के येकर ले जुड़े मुद्दा मन समाज ऊपर लंबा बखत तक ले असर करहीं. समुथिरम पलगु बदलत मऊसम ऊपर चले गोठबात ला चलावत रकहे के हमर कोसिस हवय. हमन समुंदर के नुकसान करेईय्या कारोबार अऊ ओकर ले बचे के बारे मं चर्चा करथन (जइसने के, डोंगा मन के बहुते जियादा मछरी धरे धन डीजल अऊ पेट्रोल, पानी ला कइसने असकट करत हवंय). कार्यक्रम बखत हमर करा लोगन मन के फोन आथें, जऊन मन अपन उपर बीते बात ला बताथें. कभू-कभू, वो मन अपन गलत करे के बात ला बताथें – अऊ करार करथें के वो मन ला नई दुहरायेंव.”

एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (एमएसएसआरएफ), चेन्नई के संचार प्रबंधक क्रिस्टी लीमा कहिथें, सुरु होयच के संगे संग, कडल ओसई के टीम हमर ले जुरे हवय.” ये संस्था ह ये रेडियो टेसन के मदद करथे. वो मन अपन कार्यक्रम मं हमर विशेषज्ञ मन ला बलावत रहिथें, फेर मई ले, हमन बदलत मऊसम के बारे मं लोगन मन ला चेताय सेती घलो वो मं के संग काम करे हवन. कडल ओसई के जरिया ले अइसने करे असान आय, काबर कम्युनिटी रेडियो के रूप मं वो मन पामबन मं पहिली ले बनेच पसंद करे जाथें.”

ये रेडियो टेसन ह ‘कडल ओरु अदिसयम, अदई कापदु नम अवसियम’ (समंदर अचरज आय, हमन ला येला बचाय ला चाही) नांव ले, मई अऊ जून मं खास करके बदलत मऊसम के मुद्दा ऊपर चार कड़ी  प्रसारित करिस. एमएसएसआरएफ के तटीय प्रणाली अनुसंधान इकाई के विशेषज्ञ, येकर अध्यक्ष वी सेल्वम के अगुवई मं ये कड़ी मन मं सामिल होइन. सेल्वम के कहना आय, “अइसने कार्यक्रम भारी महत्तम हवंय काबर जब हमन बदलत मऊसम के बारे मं गोठियाथन, त हमन सबले ऊपर जा के धन विशेषज्ञ मन के स्तर मं अइसने करथन. येकर बारे मं जमीनी स्तर मं चर्चा करे के जरूरत हवय, तऊन लोगन के मंझा मं जाके जऊन मन असल मं रोज के रोज येकर असर ला झेलत हवंय.”

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डेरी: पामबन रद्दा मं कडल ओसई के दफ्तर, पामबन रद्दा मं मछरी के भारी कारोबार होथे. जऊनि: टेसन के 11 करमचारी मन ले एक झिन, डी रेडीमार जऊन ह अभू घलो समुंदर मं जाथें

10 मई मं प्रसारित एक कड़ी ह पामबन के बासिंदा मन ला अपन टापू हं होवत बड़े बदलाव ला बढ़िया ढंग ले समझे मं मदद करे रहिस. 20 बछर पहिली तक, 2,065 मीटर लंबा ये पामबन पुल के तीर मं कम से कम 100 परिवार रहत रहिन जऊन ह रामेश्वरम सहर ला भारत के जमीन ले जोरथे. फेर समंदर के बढ़ती ह वो मन ला ये जगा ला छोर के दूसर जगा मं जाय ला मजबूर करिस. कड़ी मं, सेल्वम सुनेइय्या मन ला समझाथें के बदलत मऊसम अइसने किसिम के विस्थापन ला कइसने बढ़ावत जावत हवय.

न त विशेषज्ञ मन धन मछुआरा मन अऊन टेसन के खबरची मन ये मुद्दा ला असान बनाय के कोसिस करिन. वो मन ये बदलाव मं के जिम्मेवार कऊनो घटना धन कऊनो कारन बताय घलो नई सकिन. फेर ये बिपत ला बगराय मं मइनखे के कारोबार के भूमका डहर जरुर आरो करथें. कडल ओसई के कोसिस हवय के वो ह ये सवाल के जुवाब हासिल करे अऊ खोजे मं ये समाज के अगुवई करय.

सेल्वम कहिथें, “पामबन टापू पर्यावरन तंत्र आय अऊ येकरे सेती जियादा सुरच्छित नई ये, फेर रेत के टीला मन ये टापू ला मऊसम के कुछेक असर ला बचाथें. येकर छोड़, ये टापू श्रीलंका के पार के तूफ़ान से कुछु हद ले सुरच्छित हवय.

वो ह कहिथें के फेर असल नुकसान समुंदर के सब्बो संपत्ति आय, जेकर पाछू मऊसम अऊ गैर-मऊसम के कारक  मन के हाथ आय. खास करके डोंगा ले बहुते जियादा मछरी धरे सेती अब कमी आ गे हवय. समुंदर के गरम होय ले मछरी मन अब खइरखा-खइरखा नजर मं नई आवंय.

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डेरी: एम सैलास तऊन माइलोगन ले भेंट करके बात करत हवंय, जऊन मन ओकरे जइसने पामबन टापू के मछुआरा समाज ले हवंय. जऊनि: रेडियो टेसन के मुखिया, गायत्री उस्मान ये समाज के मंच सेती सीधा रद्दा लेके आय हवंय

मछुआरा समाज के अऊ कडल ओसई के आरजे बी मधुमिता ह 24 मई ले प्रसारित एक कड़ी मं बताईस, “ ऊरल, सिरा, वेलकंबन... जइसने किसिम के पूरा पूरी नंदा गे हवंय. पाल, सुरा, कलवेती, कोंबन सुरा जइसने किसिम के कुछु अभू घलो हवंय, फेर वो मन के अबादी बनेच कम हवय. अचरज के बात ये आय के केरल मं कऊनो जमाना मं भारी मिलत रहय माथी मछरी, अब हमर कोती भारी अबादी मं हवंय.”

उही कड़ी मं एक दीगर सियान डोकरी माई, लीना (जेकर पूरा नांव मिले नई ये) कहिथें के एक दीगर किसिम मन्डईकलुगु, जऊन ह करीबन 20 बछर पहिली इहाँ टनों मिलत रहिस, अब नंदा हे हवय. वो ह बताथें के कइसने ओकर जमाना के लोगन मन तऊन मछरी के मुंह ला खोलके ओकर अंडा निकारें अऊ खावंय. ये ह एक ठन अइसने ब्बत आय जऊन ला एम सैलास जइसने कम उमर के माइलोगन, जऊन ह ओकरे समाज ले हवंय, (कडल ओसई एंकर अऊ निर्माता, जेन ह एमकाम के डिग्री हासिल करे हवय)

लीना कहिथें, “1980 के दसक तक, हमन टनों कट्टई, सीला, कोंबन सुरा, अऊ अइसने किसिम के मछरी पावत रहेन. आज हमन ये मछरी मन ला डिस्कवरी चैनल मं खोजत हवन. मोरा बबा- डोकरा बबा (जऊन मन बिन मशीन वाले डोंगा बऊरत रहिन) कहत रहिन के इंजिन के अवाज ह मछरी मन ला दूरिहा खदेर देथें. अऊ पेट्रोल धन डीजल ह पानी मं जहर घोर दीस अऊ मछरी मन के सुवाद ला बदल दीस.” वो ह सुरता करत बताथे के तऊन बखत माइलोगन मन घलो समुंदर के कोंटा मं पानी मं उतर जावंय अऊ जाल ले मछरी धरत रहेंय. अब फेर कोंटा मं मछरी नई मिलय, येकरे सेती माईलोगन मन घलो समुंदर मं जाय कम कर देय हवंय.

17 मई के एक कड़ी मं मछरी धरे के पुरखा ले चलत आवत तरीका अऊ गियान के चर्चा करे गीस – अऊ समुंदर के जिनगी ला बचाय सेती दूनो ला कइसने एके संग करे जाय, येकर ऊपर घलो बात होइस. गायत्री कहिथें, “मछुआरा मन ले ये बात बर तियार करे जाथे के वो मन पार मं पिंजरा डारें अऊ मछरी बीजा तियार करें. सरकार ह ये पिंजरा कल्चर ला मानत हवय, काबर ये ह नंदावत जावत समुन्द्र के सम्पदा ले लड़थे.”

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मछुआरा मन के हित के अवाज

पामबन के 28 बछर के मछुआरा, एंटनी इनिगो येला अपनाय बर तियार हवंय. “पहिली, गर ड्यूगांग (समुंदर के स्तनपायी) हमर हाथ आवत रहिस, त हमन वोला फेर समुंदर मं नई छोड़त रहेन, फेर कडल ओसई ले प्रसारित एक ठन कार्यक्रम मं सुने के बाद हमन ला पता चलिस के बदलत मऊसम अऊ मइनखे के करनी ह वो ला कइसने नंदावत जावत हाल तक ले लेग गे हवय. हमन वो मन ला समुंदर मं फेर छोड़े बर अपन महंगा जाल ला घलो काटे बर तियार हवन, कछुवा मन के संग घलो हमन अइसनेच करथन.”

गायत्री कहिथें, “गर हमर करा आके कऊनो विशेषज्ञ ये बताथें के बदलत मऊसम मछरी मन ऊपर कइसने असर डारत हवंय, त उहिंचे हमर ले कुछु अईसने मछुवारा घलो जुर जाथें जऊन ह अपन गम ले बताथें के ये बात मं कतक सच्चाई हवय.”

सैलास कहिथें, “मछरी मन के नंदावत जाय के दोस हमन देंवता अऊ प्रकृति ला जिम्मेदार मानेन. अपन कार्यक्रम के जरिया ले हमन मसूस करे हवन के ये ह पूरा तरीका ले हमर गलती आय.” कडल ओसई के सब्बो करमचारी ओकरे जइसने मछुआरा समाज ले हवंय- गायत्री ला छोड़ के. वो ह काबिल साउंड इंजीनियर आंय, जऊन ह डेढ़ बछर पहिली वो मन के संग जुरे रहिन अऊ ये समाज के मंच सेती साफ सोझ रद्दा अऊ उद्देश्य ले के आइन.

कडल ओसई के दफ्तर ह पामबन रद्दा मं हवय जिहां जियादतर दिन मछरी के भारी कारोबार होथे. बोर्ड मं नीला रंग ले येकर नांव लिखाय हवय – नमतु मुन्नेट्रतुक्कन वानोली (हमर विकास सेती रेडियो). दफ्तर के भीतरी मं नवा जमाना के रिकॉर्डिंग स्टूडियो के संग एफएम टेसन हवय. ओकर करा लइका, माइलोगन, अऊ मछुआरा मन सेती अलग-अलग कार्यक्रम हवय – अऊ मंझा-मंझा मं वो मन समुंदर मं जाय मछुवारा मन बर अंबा गीत बजावत रहिथें, रेडियो टेसन के जम्मो 11 करमचारी मन ले सिरिफ यशवंत अऊ डी. रेडिमर अभू घलो समुंदर मं जाथें.

यशवंत के घर के मन कतको बछर पहिली तूतुकुडी ले पामबन आ गे रहिन. वो ह बताथें, “उहाँ मछरी धरे के काम नफा वाले नई रह गे रहिस. मोर ददा ला बहुते अकन मछरी धरे मं दिक्कत आवत रहिस”. रामेश्वरम ओकर बनिस्बत बढ़िया रहिस, “फेर कुछु बछर बाद, इहां घलो मछरी मन कमती होय ला धरिन.” कडल ओसई ह वो मन के सोच मं लाईस के ये ह ककरो ‘जादू टोना’ के नतीजा नो हे, फेर हो सकत हवय तऊन ‘जादू टोना’ के नतीजा आय जेन हमन खुदेच ये आबोहवा ऊपर करे हवन.”

वो ह मुनाफा कमाय ला लेके लोगन के लोभ के चिंता करथें. कुछु डोकरा सियान मन के अभू घलो ये मानना हवय के वो मन येकरे सेती गरीब हवंय, काबर वो मन के पुरखा मन मछरी धरे के मामला मं कुछु जियादा नई करिन. वो मन जियादा ले जियादा नफा पाय के कोसिस करथें, जेकर सेती समुंदर ला जियादा दुहे जावत हवय. हमन कुछु जवान लइका मन अब येकर खतरा ला समझथन, येकरे सेती हमन तऊन ‘जादू टोना’ ला खतम करे के कोसिस करत हवन.”

वो ह मुनाफा कमाय ला लेके लोगन के लोभ के चिंता करथें. कुछु डोकरा सियान मन के अभू घलो ये मानना हवय के वो मन येकरे सेती गरीब हवंय, काबर वो मन के पुरखा मन मछरी धरे के मामला मं कुछु जियादा नई करिन... वो मन जियादा ले जियादा नफा पाय के कोसिस करथें, जेकर सेती समुंदर ला जियादा दुहे जावत हवय

वीडियो देखव: आर जे यशवंत पामबन के लोगन मन ला मऊसम के जानकारी देवत हवंय

येकर बाद घलो ये बड़े समाज के पुरखा ले मिले गियान, लोगन मन के सीखे के भरपूर जरिया बने हवय. मधुमिता कहिथें, “विशेषज्ञ अक्सर इहीच त करथें. वो मन तऊन गियान ला प्रमानित करथें अऊ सुरता करथें के हमन ला येला काबर बऊरे ला चाही, हमर रेडियो टेसन पुरखा ले मिले गियान ला एक ठन महत्तम जागा देथे. बदला मं, हमर समाज हमर प्रसारन मं आय विशेषज्ञ मन के गियान ला अमल मं लाथें.”

पामबन कंट्री बोट्स फ़िशरमेन एसोशिएशन के अध्यक्ष, एसपी रायप्पन ये बात के हामी भरथें. “हमन समुंदर के जिनगी के सीमा ले जियादा दुहे अऊ येकर खतरा के बारे मं हमेसा बात करे हवन.” कडल ओसई डहर ले मछुवारा मन मं बगराय जागरूकता जियादा असरदार हवय, हमर लोग मन अब ड्यूगांग धन कछुआ ला बंचाय सेती कभू-कभू महंगा जाल ला घलो काट देथें.” सैलास अऊ मधुमिता ला आस हवय के ओकर रेडियो टेसन, हो सकत हवय एक दिन मन्डईकलुगु ला घलो टापू के पानी मं लहूंटाय मं मदद करही.

अधिकतर सामुदायिक रेडियो टेसन जइसनेच, येकर प्रसारण घलो 5 कोस ले जियादा दुरिहा सुने नई जाय सकय. गायत्री के कहना आय, “फेर पामबन मं लोगन मन कडल ओसई ला अपन जिनगी के हिस्सा बना लेय हवंय – अऊ हमन ला सुनेइय्या मन के दिन भर मं दस चिठ्ठी मिलथे. हमन जब सुरु करे रहेन त लोगन मन ला अचरज होय रहिस के हमन कऊन अन अऊ कऊन विकास के बात करत हवन. अब वो मन हमर ऊपर भरोसा करथें.”

अब वो मन अपन भरोसा सिरिफ आबोहवा लेच खोवत हवंय.

जिल्द फोटू: पामबन मं 8 जून के दिन संयुक्त राष्ट्र के विश्व महासागर दिवस समारोह मं लइका मन के हाथ मं तख्ती हवय , जऊन मं लिखाय हवय कडल ओसई (फ़ोटू: कडल ओसई)

पारी के बदलत मऊसम ऊपर लिखाय देश भर ले रिपोर्टिंग के ये प्रोजेक्ट, यूएनडीपी समर्थित तऊन पहल के हिस्सा आय, जऊन मं आम जनता अऊ ओकर जिनगी के गुजरे बात ला लेके पर्यावरन मं होवत बदलाव के रिकार्ड करे जाथे

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अनुवाद: निर्मल कुमार साहू

Reporter : Kavitha Muralidharan

कविता मुरलीधरन, चेन्नई की एक स्वतंत्र पत्रकार और अनुवादक हैं. वह 'इंडिया टुडे' (तमिल) की संपादक रह चुकी हैं, और उससे भी पहले वह 'द हिंदू' (तमिल) के रिपोर्टिंग सेक्शन की प्रमुख थीं. वह पारी के लिए बतौर वॉलंटियर काम करती हैं.

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Editor : P. Sainath

पी. साईनाथ, पीपल्स ऑर्काइव ऑफ़ रूरल इंडिया के संस्थापक संपादक हैं. वह दशकों से ग्रामीण भारत की समस्याओं की रिपोर्टिंग करते रहे हैं और उन्होंने ‘एवरीबडी लव्स अ गुड ड्रॉट’ तथा 'द लास्ट हीरोज़: फ़ुट सोल्ज़र्स ऑफ़ इंडियन फ़्रीडम' नामक किताबें भी लिखी हैं.

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Series Editors : P. Sainath

पी. साईनाथ, पीपल्स ऑर्काइव ऑफ़ रूरल इंडिया के संस्थापक संपादक हैं. वह दशकों से ग्रामीण भारत की समस्याओं की रिपोर्टिंग करते रहे हैं और उन्होंने ‘एवरीबडी लव्स अ गुड ड्रॉट’ तथा 'द लास्ट हीरोज़: फ़ुट सोल्ज़र्स ऑफ़ इंडियन फ़्रीडम' नामक किताबें भी लिखी हैं.

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शर्मिला जोशी, पूर्व में पीपल्स आर्काइव ऑफ़ रूरल इंडिया के लिए बतौर कार्यकारी संपादक काम कर चुकी हैं. वह एक लेखक व रिसर्चर हैं और कई दफ़ा शिक्षक की भूमिका में भी होती हैं.

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Translator : Nirmal Kumar Sahu

Nirmal Kumar Sahu has been associated with journalism for 26 years. He has been a part of the leading and prestigious newspapers of Raipur, Chhattisgarh as an editor. He also has experience of writing-translation in Hindi and Chhattisgarhi, and was the editor of OTV's Hindi digital portal Desh TV for 2 years. He has done his MA in Hindi linguistics, M. Phil, PhD and PG diploma in translation. Currently, Nirmal Kumar Sahu is the Editor-in-Chief of DeshDigital News portal Contact: [email protected]

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