दिल्ली में घरेलू सेविका के रूप में काम करने वाली रुख़साना ख़ातून ने, बिहार में अपने पति के गांव से राशन कार्ड बनवाने की कई वर्षों तक कोशिश की — और अब उन्हें इसकी काफी ज़रूरत महसूस हो रही है क्योंकि लॉकडाउन के कारण उनके परिवार को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है