एक-राष्ट्र-कोई-राशन-कार्ड-नहीं

Darbhanga, Bihar

Nov 19, 2020

एक राष्ट्र, कोई राशन कार्ड नहीं

दिल्ली में घरेलू सेविका के रूप में काम करने वाली रुख़साना ख़ातून ने, बिहार में अपने पति के गांव से राशन कार्ड बनवाने की कई वर्षों तक कोशिश की — और अब उन्हें इसकी काफी ज़रूरत महसूस हो रही है क्योंकि लॉकडाउन के कारण उनके परिवार को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है

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Author

Sanskriti Talwar

संस्कृति तलवार, नई दिल्ली स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं और साल 2023 की पारी एमएमएफ़ फेलो हैं.

Translator

Qamar Siddique

क़मर सिद्दीक़ी, पीपुल्स आर्काइव ऑफ़ रुरल इंडिया के ट्रांसलेशन्स एडिटर, उर्दू, हैं। वह दिल्ली स्थित एक पत्रकार हैं।