ताड़ के पत्तों के हैट, जिन्हें पश्चिम बंगाल के शंतिनिकेतन और श्रीनिकेतन के डोम बिरादरी की महिलाएं बनाती थीं, किसी ज़माने में इस इलाक़े की सामान्य वेशभूषा के हिस्सा होते थे. लेकिन बाज़ार में अब सिंथेटिक टोपियों की भरमार के कारण ये हैट लगभग ग़ायब हो चुके हैं
श्रेया कनोई एक डिज़ाइन रिसर्चर हैं, जो शिल्पकला के साथ जुड़े आजीविका के सवालों पर काम करती हैं. वह साल 2023 की पारी-एमएमएफ़ फ़ेलो हैं.
See more stories
Editor
Sarbajaya Bhattacharya
सर्वजया भट्टाचार्य, पारी के लिए बतौर सीनियर असिस्टेंट एडिटर काम करती हैं. वह एक अनुभवी बांग्ला अनुवादक हैं. कोलकाता की रहने वाली सर्वजया शहर के इतिहास और यात्रा साहित्य में दिलचस्पी रखती हैं.
See more stories
Photo Editor
Binaifer Bharucha
बिनाइफ़र भरूचा, मुंबई की फ़्रीलांस फ़ोटोग्राफ़र हैं, और पीपल्स आर्काइव ऑफ़ रूरल इंडिया में बतौर फ़ोटो एडिटर काम करती हैं.
See more stories
Translator
Prabhat Milind
प्रभात मिलिंद, शिक्षा: दिल्ली विश्विद्यालय से एम.ए. (इतिहास) की अधूरी पढाई, स्वतंत्र लेखक, अनुवादक और स्तंभकार, विभिन्न विधाओं पर अनुवाद की आठ पुस्तकें प्रकाशित और एक कविता संग्रह प्रकाशनाधीन.