हमारी-एकमात्र-संपत्ति-ये-हाथ-पैर-हैं

Dhamtari, Chhattisgarh

Jun 30, 2019

‘हाथ-पैर ही हमारी अकेली संपत्ति है’

घास के गठ्ठर को कांधे पर रखकर 70 वर्षीय भगौली साहू, लगभग 100 रुपए कमाने के लिए कभी-कभी छत्तीसगढ़ के शंकरदाह गांव से धमतरी शहर तक लगभग 18 किलोमीटर पैदल चलते हैं

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Author

Purusottam Thakur

पुरुषोत्तम ठाकुर, साल 2015 के पारी फ़ेलो रह चुके हैं. वह एक पत्रकार व डॉक्यूमेंट्री फ़िल्ममेकर हैं और फ़िलहाल अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन के लिए काम करते हैं और सामाजिक बदलावों से जुड़ी स्टोरी लिखते हैं.

Translator

Qamar Siddique

क़मर सिद्दीक़ी, पीपुल्स आर्काइव ऑफ़ रुरल इंडिया के ट्रांसलेशन्स एडिटर, उर्दू, हैं। वह दिल्ली स्थित एक पत्रकार हैं।