समाप्ति-की-कगार-पर-कोटागिरी-के-कोल्लेल

The Nilgiris district, Tamil Nadu

Jun 05, 2019

समाप्ति की कगार पर कोटागिरी के कोल्लेल

मोहना रंगन लोहे के 30 प्रकार के उपकरण बना सकते हैं, लेकिन नीलगिरि के परंपरागत कोटा आदिवासी लोहारों के ग्राहक अब चूंकि थोड़े ही बचे हैं, इसलिए उन्हें साल भर का ख़र्च निकालने के लिए मुश्किल से ही काम मिल पाता है

Want to republish this article? Please write to [email protected] with a cc to [email protected]

Author

Priti David

प्रीति डेविड, पारी की कार्यकारी संपादक हैं. वह मुख्यतः जंगलों, आदिवासियों और आजीविकाओं पर लिखती हैं. वह पारी के एजुकेशन सेक्शन का नेतृत्व भी करती हैं. वह स्कूलों और कॉलेजों के साथ जुड़कर, ग्रामीण इलाक़ों के मुद्दों को कक्षाओं और पाठ्यक्रम में जगह दिलाने की दिशा में काम करती हैं.

Translator

Qamar Siddique

क़मर सिद्दीक़ी, पीपुल्स आर्काइव ऑफ़ रुरल इंडिया के ट्रांसलेशन्स एडिटर, उर्दू, हैं। वह दिल्ली स्थित एक पत्रकार हैं।