क्योंझर के तत्कालीन जिला कलेक्टर विष्णु साहू ने रिकॉर्ड नहीं किया कि किन कारणों से समुदाय भूमि शीर्षक के दावे नहीं दिए गए, जबकि एफआरए कानून के तहत इसकी आवश्यकता है। इसके बजाय जनवरी १९, २०१३ को उनके द्वारा ओएमसी को जंगल को सौंपने के समर्थन में तैयार प्रमाण पत्र में कहा गया है कि सात गांवों में सभी एफआरए अधिकारों का निपटारा किया गया है।
जब मैंने ओडिशा सरकार वन एवं पर्यावरण सचिव, एस सी महापात्रा से संपर्क किया, जिनके विभाग ने ओएमसी की ओर से मंत्रालय को मंजूरी का आवेदन पत्र प्रस्तुत किया था, वे कहते हैं, "मैं इस बारे में कुछ भी नहीं जानता" और तुरंत फ़ोन काट देते हैं। इसके बाद वे फ़ोन का जवाब ही नहीं देते हैं।
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नवंबर २०१५ की शुरुआत में, जब प्रस्तावों में अपने नाम की धोखाधड़ी के बारे में पता चला तो सात गांवों में से दो, आम्बदहरा और नितिगोठ ने अवैध गतिविधियों की ओर इशारा करते हुए पर्यावरण और जनजातीय मामलों के मंत्रालयों को पत्र भेजा। उन्होंने ओडिशा के राज्यपाल को भी लिखा था जिन्हे संविधान के तहत, आदिवासी क्षेत्रों में समुदायों के अधिकारों की रक्षा की विशेष जिम्मेदारी है । तीन महीने हो गए पर इन अधिकारियों में से किसी ने भी कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है।
बात यहाँ ख़तम नही होती है । २८ से ३० दिसंबर २०१५ तक पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति के तीन सदस्यीय दल ने प्रस्तावित साइट निरीक्षण के लिए क्योंझर का दौरा किया। उनके विचारार्थ विषय में ओएमसी के प्रस्तावित खदान क्षेत्र में एफआरए के कार्यान्वयन को देखना भी शामिल था ।
२९ दिसंबर को, मैं टीम के प्रमुख और अतिरिक्त महानिदेशक, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, अनिल कुमार से क्योंझर होटल में मिली, जहां उनकी टीम रह रही थी । उन्होंने जोर देकर कहा कि मैं ओ.एम.सी अधिकारी जिनके साथ वे नाश्ता कर रहे थे, उनकी मौजूदगी में ही बात करूं। कुमार ने यह कहते हुए कि " एफ ए सी के काम गोपनीय है”, मुआइने या कैसे टीम एफआरए के कार्यान्वयन की जांच करेगी इस बारे में मेरे किसी भी सवाल का जवाब देने से मना कर दिया।
गांवों की जालसाजियों के आरोप की शिकायतों के लिए समिति की प्रायोजित जांच और क्या सदस्य गांवों का दौरा करेंगे, इन मुद्दों को मैंने दोहराया तो, कुमार मुझसे बोले कि मैँ ईमेल से उन्हें उल्लंघन के बारे में सूचित करूँ । एक दिन पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक समाचार पत्र को इंटरव्यू देते हुए और उनकी सरकार की उपलब्धियों की सूची बताते हुए कहा था , "पर्यावरण मंजूरी एक नियम के रूप में दी जा रही हैं। "
३० दिसंबर को जिले मैँ ३ दिन बिताने के बाद , एफ ए सी टीम सात गांवों में से किसी का भी दौरा किये बिना या किसी ग्रामीण से बात किए बिना ही, क्योंझर से रवाना हो गयी ।
'साइट निरीक्षण ' पूरा हो गया था ।
इस कहानी का एक संस्करण फरवरी, २०१६ को आउटलुक पत्रिका में छपा था ।