मैं सजावटी सामान बनाने के लिए शोलापीठ (एशिनोमीन एस्पेरा एल. पौधे के कॉर्क) का इस्तेमाल करता हूं. यह एक बहुउपयोगी पदार्थ है, जिसे विभिन्न आकारों और डिज़ाइन में काटा जा सकता है, और यह वज़न में भी हल्का होता है. हम इसे ओडिशा में शोलापीठ काम कहते हैं.
मैं गले का हार, दशहरे के लिए कढ़ाई, फूल और दूसरे सजावटी सामान बना सकता हूं, लेकिन मेरा बनाया टाहिया सबसे ज़्यादा लोकप्रिय है. मंच पर परफ़ॉर्म करने के दौरान ओडिशी नर्तक सिर पर जो सजावटी मुकुट पहनते हैं उसे ही टाहिया कहते हैं.
बाज़ार में प्लास्टिक के बने टाहिया भी उपलब्ध मिलते हैं, लेकिन उनसे नर्तकों को माथे की त्वचा में परेशानी महसूस होती है, इसलिए उसे लंबे समय तक पहनना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा, प्लास्टिक को विभिन्न आकृतियों में भी नहीं ढाला जा सकता है.
बहुत से कुशल कारीगरों ने टाहिया बनाना बंद कर दिया है, लेकिन मुझे यह बनाना पसंद है.












