अनुवाद: डॉ. मोहम्मद क़मर तबरेज़


Birbhum, West Bengal
|SUN, APR 29, 2018
बीरभूम की बर्षा की उम्र से बड़ी यात्रा
पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले के श्यामबाटी गांव की रहने वाली बर्षा गड़ाय अपनी उम्र की एकमात्र लड़की है, जो चार साल की आयु से ही प्रख्यात बाउल संगीतकार बासुदेब दास से प्रशिक्षण ले रही है, और दार्शनिक बाउल गाने गा रही है
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Ananya Chakroborty
बर्षा कहती है, “मुझे गायन, पढ़ना, और पेंटिंग पसंद है.” पश्चिम बंगाल में छोटी लड़कियों के बीच बाउल संगीत का चलन आम नहीं है - हालांकि महिला बाउल गायिका भी मौजूद हैं, लेकिन उनकी संख्या पुरुषों की तुलना में कम है. बर्षा अपनी उम्र की एकमात्र लड़की है, जो बासुदेब दास से प्रशिक्षण ले रही है.
बाउल, आध्यात्मिक संगीत है, इसे एक सांस्कृतिक विरासत और जीवन दर्शन के रूप में देखा जाता है. बाउल लोग ख़ुद को आंतरिक सत्य को खोजने वाला, अपनी सुरीली प्रार्थनाओं की पवित्रता द्वारा वास्तविक प्रकृति की पुनःप्राप्ति, संगीत द्वारा भगवान की खोज में जुटे व्यक्ति के रूप में देखते हैं. बाउल संगीत में परमात्मा से प्रेम का उल्लेख होता है, और यह शरीर (देहो साधना) और मन (मोनो साधना) की अभिव्यक्ति है. एक बच्चे के लिए ये विषय बहुत गहरे हैं, लेकिन बर्षा इस दुनिया की यात्रा पर पहले ही रवाना हो चुकी है.
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