बिमान फ्रिज से मैरिनेट (मसाला में सानल) चिकन के एगो डिब्बा निकालत बाड़न. फेरू एगो-एगो करके चिकन के टुकड़ा के आटा में लपेट बढ़िया से छानत बाड़न. खउलत तेल में जइसहीं ई छनाए लागत बा, बिमान पाव रोटी टोस्ट करे लागत बाड़न. बर्गर बनावत-बनावत ऊ बतावे लगलें, “माई भोरे-भोरे काम पर चल जात रहे. हमरा आपन पेट अपने से भरे के पड़त रहे.” ऊ बतावत बाड़न कि कइसे 10 बरिस के उमिर से ही ऊ खाना पकावे लगलन. उनकर माई, इला दास खेतिहर मजदूरी करेली, आउर बाबूजी दीघला दास मछरी बेचेलन.
बिमान कहत बाड़ें, “माई जब खाना पकावस, त हम आंख गड़ा के देखीं. अइसहीं देखत-देखत हम दाल, चिकन आउर मछरी बनावल सीख लेनी. हमार पड़ोसी आउर दोस्त सभ के हमार हाथ के बनल खाना बहुत भावत रहे. ऊ लोग हमर घरे आके खाना खात रहे. एहि सभ चलते खाना बनावे में हमार रुचि जाग गइल.”
मोटा-मोटी 18 बरिस में बिमान रोजी-रोटी खातिर घर छोड़ देले रहस. ऊ मुंबई में आपन एगो दोस्त लगे गइलन. ओह घरिया उनकर पाकिट में सिरिफ 1,500 रुपइया रहे. उहंवा उनकर एगो नातेदार मदद कइलन. उनकरा शहर के एगो अपार्टमेंट में सेक्योरिटी गार्ड के नउकरी मिल गइल. बाकिर ऊ जादे दिन ना टिक सकलन, “हम ऊ काम छोड़ के भाग गइनी. बाद में हमरा आपन नातेदार खातिर बहुते खराब लागल. हम उनकरा एगो चिट्ठी लिखनी, ‘रउआ से निहोरा बा हमरा गलत मत समझम. ई काम हमरा खातिर नइखे, आउर हम एह काम खातिर नइखी. एहि से हम एकरा छोड़ देहनी’.”
एकरा बाद बिमान मुंबई के अलग-अलग होटल में काम कइलन. इहंवा ऊ पंजाबी, गुजराती, इंडो-चाइनीज आउर इहंवा तक कि कॉन्टिनेंटल (महाद्वीपीय शैली) पकवान बनावे के सीख लेलन. बाकिर अबही खाना बनावे के हुनर से ऊ दूर रहस. ऊ बतइले, “पहिले पहिले हम होटल सभ में प्लेट साफ करत रहीं, आउर टेबल लगावे के काम करीं.” जब 2010 आइल, बिमान के हैदराबाद के एटिको नाम के फूड कोर्ट में काम करे के मउका भेंटल. एहिंगे धीरे-धीरे ऊ आगू बढ़े लगलें. बाद में तरक्की भइल आउर ऊ उहंवा के मैनेजर बन गइलें.